भागलपुर के नाथनगर प्रखंड में स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज परिसर में बाढ़ पीड़ितों के लिए एक अस्थायी राहत शिविर बनाया गया है। इस शिविर में फिलहाल 228 परिवारों को चिन्हित किया गया है, जिनमें से 200 से अधिक परिवार रह रहे हैं। यह शिविर उन परिवारों के लिए सहारा बना है, जिन्हें बाढ़ के कारण अपना घर-बार छोड़ना पड़ा है। खास बात यह है कि जगदीशपुर अंचल खुद बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में नहीं आता। इसके बावजूद, प्रशासन ने आसपास के बाढ़ प्रभावित इलाकों से विस्थापित होकर आ रहे लोगों के लिए यहां रहने और राहत की व्यवस्था की है। शिविर में लोगों के रहने, भोजन, स्वास्थ्य सुविधाओं, बच्चों की पढ़ाई और आंगनबाड़ी की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही, मवेशियों के चारे का भी इंतजाम है। प्रशासन ने अधिकारियों और कर्मचारियों को लगातार निगरानी करने की जिम्मेदारी दी है, ताकि शिविर में रह रहे परिवारों को कोई परेशानी न हो। बाढ़ की वजह से बच्चों के लिए खोला गया अस्थायी स्कूल बाढ़ के कारण बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े, इसके लिए राहत शिविर में एक अस्थायी स्कूल खोला गया है। छोटे बच्चों के लिए आंगनबाड़ी केंद्र भी चलाया जा रहा है। इससे शिविर में रह रहे बच्चों को एक ही जगह पढ़ाई और पोषण दोनों की सुविधा मिल रही है। शिविर में रहने वाले लोगों के लिए सामुदायिक रसोई से दो समय का भोजन तैयार किया जा रहा है। सुबह और शाम दोनों समय खाना मिलता है। शिविरार्थियों ने भोजन की गुणवत्ता पर संतोष जताया है। उन्होंने बताया कि खाना स्वादिष्ट है और उसमें तेल-मसाले का सही इस्तेमाल किया गया है। मवेशियों के लिए भी चारा और स्वास्थ्य सुविधा राहत शिविर में केवल लोगों की ही नहीं, बल्कि उनके साथ आए मवेशियों की भी चिंता की गई है। पशुओं के लिए अलग से जगह, हरा चारा और सूखा पशु आहार उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। मवेशियों के स्वास्थ्य की निगरानी भी की जा रही है। पशुओं से संबंधित व्यवस्था की देखरेख डीएचओ मैडम की ओर से की जा रही है। शिविर की व्यवस्था देखने पहुंचे विधायक, स्वास्थ्य सेवा पर जताई नाराजगी राहत शिविर की व्यवस्थाओं का जायजा लेने स्थानीय विधायक मिथुन यादव अधिकारियों के साथ पहुंचे। उन्होंने शिविर में रह रहे परिवारों से बातचीत कर भोजन, रहने की व्यवस्था और अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। निरीक्षण के दौरान अधिकांश व्यवस्थाओं को उन्होंने संतोषजनक पाया, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नाराजगी जाहिर की। निरीक्षण के शुरुआती दौर में मौके पर स्वास्थ्यकर्मी और चिकित्सा व्यवस्था मौजूद नहीं होने तथा ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव नहीं किए जाने की बात सामने आई। इसे लेकर विधायक ने संबंधित अधिकारी से जवाब तलब किया और राहत शिविर में स्वास्थ्य सेवाओं को तत्काल दुरुस्त करने का निर्देश दिया। बाद में मेडिकल टीम के मौके पर पहुंचने के बाद शिविरार्थियों की स्वास्थ्य जांच और आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर निर्देश दिए गए। प्रशासन की ओर से बताया गया कि नया शिविर स्थापित होने के कारण स्वास्थ्य कर्मियों के पहुंचने और बैठने की व्यवस्था में शुरुआती परेशानी हुई थी, जिसे तत्काल दूर किया जा रहा है। ब्लीचिंग का छिड़काव और स्वच्छता पर भी जोर बाढ़ के बाद संक्रमण और जलजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए राहत शिविर में साफ-सफाई और ब्लीचिंग के छिड़काव को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विधायक ने संबंधित अधिकारियों को इस दिशा में लापरवाही नहीं बरतने की हिदायत दी। शिविर में नियमित साफ-सफाई और स्वच्छता व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। कुछ परिवारों के पास पॉलीथिन की कमी, जल्द उपलब्ध कराने का आश्वासन निरीक्षण के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ परिवारों के पास तिरपाल या पॉलीथिन की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इस पर विधायक और अधिकारियों ने जरूरतमंद परिवारों को जल्द पॉलीथिन उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया। अधिकारियों के अनुसार कल तक सभी जरूरतमंद परिवारों को पॉलीथिन उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। तीन पालियों में आपदा मित्रों की तैनाती राहत शिविर की सुरक्षा और आपदा की स्थिति में तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए तीन पालियों में आपदा मित्रों की ड्यूटी लगाई गई है। आपदा मित्र शिविर में रह रहे परिवारों की समस्याओं पर नजर रखने के साथ किसी भी आपात स्थिति में तत्काल सहयोग करेंगे। गर्भवती महिलाओं के लिए भी विशेष व्यवस्था अंचल अधिकारी के अनुसार शिविर में किए गए सर्वे के दौरान अभी तक कोई गर्भवती महिला चिन्हित नहीं हुई है। हालांकि प्रशासन ने ऐसी स्थिति के लिए भी तैयारी रखी है। यदि शिविर में कोई गर्भवती महिला सामने आती है तो चिकित्सा टीम की ओर से तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराने के साथ जरूरत पड़ने पर उसे बेहतर इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। अधिकारियों का कहना है कि राहत शिविर की सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है। जो भी छोटी-मोटी कमियां सामने आई हैं, उन्हें आज दिनभर में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन लगातार शिविर में रह रहे लोगों से बातचीत कर उनकी समस्याओं और जरूरतों की जानकारी ले रहा है, ताकि बाढ़ के इस संकट के बीच उन्हें अधिकतम राहत उपलब्ध कराई जा सके।
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