श्रावस्ती1 मिनट पहले
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श्रावस्ती जिले में 14 सितंबर से चल रहे गणेश महोत्सव का बुधवार रात्रि 10:00 बजे तक कई जगहों पर श्रद्धा के साथ समापन हुआ। लक्ष्मणपुर बाजार, परसिया राजा, हरैया तराई और संग्रामगंज समेत करीब 12 स्थानों से भगवान गणेश की प्रतिमाओं की भव्य शोभायात्राएं निकाली गईं।श्रद्धालु ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों और भक्ति गीतों के साथ पैदल विसर्जन स्थलों तक पहुंचे।
लक्ष्मणपुर बाजार से शाम करीब सात बजे रथ पर सजी गणेश प्रतिमा के साथ शोभायात्रा शुरू हुई। इसमें महिला, पुरुष और बच्चों समेत बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल थे। वे करीब छह किलोमीटर पैदल चलकर बहादुरपुर गोड़पुरवा स्थित बूढ़ी राप्ती नदी पहुंचे। यहां विधि-विधान से पूजा और आरती के बाद प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
भिनगा बाजार के चार स्थानों से शाम करीब छह बजे विसर्जन यात्रा निकली। डीजे पर बज रहे धार्मिक गीतों के बीच श्रद्धालु करीब 10 किलोमीटर पैदल चलकर भकला घाट पहुंचे। यहां पूजा के बाद गणेश प्रतिमाओं को पवित्र जल में विसर्जित किया गया। लक्ष्मण नगर में भी गणेश महोत्सव के समापन पर शोभायात्रा निकालकर भकला घाट में प्रतिमा का विसर्जन किया गया।
विसर्जन यात्राओं को लेकर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे। शोभायात्रा के रास्ते और विसर्जन स्थलों पर पुलिसकर्मी तैनात रहे। पुलिस की निगरानी में सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से पूरे हुए। जिले के कई दूसरे इलाकों में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन 25 सितंबर को होगा।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गणेश चतुर्थी भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है। भगवान गणेश को बुद्धि, विवेक, सुख-समृद्धि और शुभता का प्रतीक माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि किसी भी शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश की पूजा से करने पर सारी बाधाएं दूर होती हैं। इसी वजह से उन्हें विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य कहा जाता है।
गणेश चतुर्थी पर श्रद्धालु घरों और सार्वजनिक जगहों पर गणेश प्रतिमा स्थापित कर पूजा, आरती, भजन-कीर्तन और प्रसाद बांटते हैं। उत्सव के आखिर में प्रतिमा का विसर्जन किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विसर्जन को गणपति को सम्मान के साथ विदाई देने का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालु गणपति से परिवार में सुख-शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना करते हैं।





