Monday, October 5, 2026
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कच्चा दूध ताजा है फिर भी खतरनाक? जानें भारत और अमेरिका के Pasteurization नियम


Raw Milk Side Effects: सुबह दूध का गिलास हाथ में लेते समय शायद ही कोई यह सोचता है कि इसमें ऐसे बैक्टीरिया भी हो सकते हैं जिन्हें आंखों से देखना संभव नहीं है. खासकर गांवों या डेयरी से सीधे आया दूध कई लोगों को ज्यादा ताजा और शुद्ध लगता है. इसी वजह से कुछ लोग उसे बिना गर्म किए पीना पसंद करते हैं, लेकिन दूध का ताजा होना और उसका सुरक्षित होना एक ही बात नहीं है.

Raw Milk यानी बिना पाश्चराइज किया हुआ दूध हानिकारक कीटाणुओं का स्रोत हो सकता है. Brucella, Salmonella, E. coli और Listeria जैसे बैक्टीरिया संक्रमण की वजह बन सकते हैं. ऐसे में दूध को पाश्चराइज करने की जरूरत क्यों पड़ती है और भारत व अमेरिका में इसे लेकर क्या नियम हैं, यह समझना जरूरी है.

Raw Milk क्या होता है और इसमें खतरा क्यों रहता है?

Raw Milk वह दूध है जिसे पाश्चराइजेशन जैसी तय हीट-ट्रीटमेंट प्रक्रिया से नहीं गुजारा गया हो. दूध निकालते समय साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए तब भी उसमें हानिकारक सूक्ष्मजीव पहुंचने की संभावना पूरी तरह खत्म नहीं होती. CDC के अनुसार Raw Milk से Campylobacter, E. coli, Listeria, Brucella और Salmonella जैसे कीटाणुओं का संक्रमण हो सकता है.
मुश्किल यह है कि दूषित दूध हमेशा देखने, सूंघने या स्वाद से अलग नहीं लगता. इसलिए केवल यह मान लेना कि दूध सीधे गाय या भैंस से आया है, उसे अपने आप सुरक्षित नहीं बना देता. खासकर गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में संक्रमण गंभीर हो सकता है.

Brucellosis का खतरा भी जुड़ा है

Brucella बैक्टीरिया से Brucellosis नाम का संक्रमण हो सकता है. CDC के मुताबिक संक्रमित पशु उत्पादों से भी इसका संक्रमण फैल सकता है और बिना पाश्चराइज किए डेयरी उत्पाद इसके संभावित स्रोत हैं. इस बीमारी में बुखार, थकान, पसीना, सिरदर्द और मांसपेशियों या जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण हो सकते हैं. कुछ मामलों में दिल का संक्रमण जैसी जटिलताएं भी हो सकती हैं.

Pasteurization दूध को कैसे सुरक्षित बनाता है?

पाश्चराइजेशन में दूध को एक तय तापमान तक गर्म करके निश्चित समय तक रखा जाता है. इसका उद्देश्य बीमारी पैदा करने वाले हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करना है. यानी सिर्फ दूध को हल्का गर्म कर देना और पाश्चराइजेशन एक ही चीज नहीं हैं. भारत में FSSAI के मानकों के अनुसार पाश्चराइजेशन के लिए दूध के हर हिस्से को कम से कम 63 डिग्री सेल्सियस पर 30 मिनट या 71.5 डिग्री सेल्सियस पर 15 सेकेंड तक गर्म किया जा सकता है. इसके बाद पाश्चराइज्ड दूध को तुरंत ठंडा किया जाता है. FSSAI के दस्तावेज में अन्य स्वीकृत temperature-time combination का भी उल्लेख है.

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अमेरिका में Raw Milk पर इतने सख्त नियम क्यों हैं?

अमेरिका में FDA ने 1987 में Raw Milk की interstate sale यानी एक राज्य से दूसरे राज्य में बिक्री पर रोक लगाने वाला नियम जारी किया था. हालांकि किसी राज्य की सीमा के भीतर Raw Milk की बिक्री की अनुमति है या नहीं, यह संबंधित राज्य के कानूनों पर निर्भर करता है. FDA के अनुसार सभी राज्यों में एक जैसा नियम नहीं है. अमेरिकी स्वास्थ्य एजेंसियां पाश्चराइजेशन को दूध की सुरक्षा का अहम तरीका मानती हैं. CDC भी Raw Milk से जुड़े संक्रमण के खतरे को देखते हुए पाश्चराइज्ड दूध और डेयरी उत्पाद चुनने की सलाह देता है.

भारत में क्या ध्यान रखें?

भारत में दूध की गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए FSSAI के खाद्य मानक लागू होते हैं. बाजार में मिलने वाले पाश्चराइज्ड दूध के पैकेट पर दी गई जानकारी देखना उपयोगी है, अगर दूध Raw है या उसके पाश्चराइजेशन को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं है तो उसे सीधे पीने के बजाय सुरक्षित तरीके से गर्म करके इस्तेमाल करना ज्यादा सावधानी वाला तरीका है.



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