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Fuman Oilfield : फुमान ऑयलफील्ड (Fuman Oilfield) से चीन अब तक 2.036 करोड़ टन कच्चा तेल और 8.15 अरब घन मीटर प्राकृतिक गैस निकाल चुका है. 6000 मीटर की गहराई से तेल और गैस निकाली जा रही हैं. इस गहराई पर अत्यधिक दबाव और खौलते तापमान के कारण ड्रिलिंग करना बेहद मुश्किल काम है. लेकिन, चीन ने तकनीकी चुनौतियों को मात देकर तकलीमाकान रेगिस्तान (Taklamakan desert) को अपनी ऊर्जा सुरक्षा का बड़ा गढ़ बना लिया है.
फुमान ऑयलफील्ड (Fuman Oilfield) चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तानी और अल्ट्रा-डीप तेल और गैस क्षेत्र है. ( फोटो साभार : @CGTNOfficial/X)
नई दिल्ली. दुनिया के सबसे बड़े रेतीले और ठंडे रेगिस्तानों में गिने जाने वाले तकलीमाकान रेगिस्तान (Taklamakan desert) का सीना चीरकर चीन ने जमीन के 19,000 फीट नीचे एक तेल और गैस का विशाल भंडार खोज निकाला है. चीन के इस कारनामे से दुनिया हैरान है. उत्तर-पश्चिमी चीन के शिनजियांग क्षेत्र में स्थित फुमान ऑयलफील्ड (Fuman Oilfield) अब ड्रैगन के लिए कुबेर का खजाना साबित हो रहा है और वह ‘पाताल’ की परतों से रात-दिन तेल और गैस खींचने में जुटा हुआ है. चाइना ग्लोबल टेलीविजन नेटवर्क की एक रिपोर्ट के अनुसार, चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (CNPC) द्वारा संचालित फुमान ऑयलफील्ड से अब तक कुल 2.686 करोड़ टन तेल और गैस निकाली जा चुकी है.
फुमान ऑयलफील्ड (Fuman Oilfield) चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तानी और अल्ट्रा-डीप तेल और गैस क्षेत्र है. यह उत्तर-पश्चिम चीन के शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र में स्थित टकलीमाकान (Taklimakan Desert) के तारिम बेसिन में स्थित है. इस ऑयलफील्ड में तेल और गैस के भंडार जमीन में 6,000 मीटर से लेकर 10,000 मीटर तक हैं. इतनी गहराई से तेल और गैस निकालना बेहद कठिन काम है. लेकिन, चीन ने इस चुनौती को भी पार पा लिया है. पेट्रोचाइना के अनुसार, इस पूरे क्षेत्र में 1 अरब टन से अधिक तेल और गैस होने का अनुमान है. इंटरनेशनल एनर्जी मार्केट में छाई अनिश्चितता के बीच चीन अपनी घरेलू तेल आपूर्ति बढ़ाने के लिए टकलीमाकान रेगिस्तान में तेजी से तेल और गैस निकाल रहा है.
खोद डाले 485 गहरे कुएं
ड्रैगन फुमान ऑयलफील्ड में अब तक 485 अल्ट्रा-डीप कुएं खोदे चुका है. इनमें से 464 कुएं ऐसे हैं, जो प्रति कुआं 10,000 टन से अधिक उत्पादन दे रहे हैं. वहीं, 133 कुओं ने 1 लाख टन से अधिक का रिकॉर्ड उत्पादन दर्ज किया है. इतनी विशाल संख्या में गहरे कुओं के नेटवर्क ने फुमान को चीन का सबसे बड़ा रेगिस्तानी तेल क्षेत्र और अल्ट्रा-डीप हाइड्रोकार्बन उत्पादन का मुख्य केंद्र बना दिया है.
रेगिस्तान के साथ ही चीन गहरे समुद्र से भी कच्चा तेल निकाल रहा है.
8,000 मीटर नीचे मिलीं 50 करोड़ साल पुरानी चट्टानें
हाल ही में फुमान ऑयलफील्ड के झेंटान-1 कुएं में चीनी इंजीनियरों ने 8,080 मीटर (लगभग 26,500 फीट) की हराई से चट्टानों के नमूने यानी रॉक कोर निकाले हैं. ये वो चट्टानें हैं जो लगभग 50 करोड़ साल से धरती के गर्भ में दबी हुई हैं. यह पहली बार है जब उत्तर-पश्चिमी तारिम बेसिन में 8 हजार मीटर से अधिक गहराई से इस प्रकार के नमूने निकाले गए हैं. इन नमूनों की जांच से यह समझने में मदद मिलेगी कि धरती की इतनी गहराई में तेल और गैस की परतें कितनी मोटी और परिपक्व हैं.
50 करोड़ टन का प्रमाणित भंडार
तकलीमाकान रेगिस्तान में 50 करोड़ टन से अधिक के प्रमाणित तेल और गैस भंडार हैं. इनका आधा हिस्सा 6,000 मीटर से ज्यादा गहरी अल्ट्रा-डीप परतों में मौजूद है. 8 किलोमीटर नीचे तक पहुंचकर रॉक कोर निकालने की सफलता यह साबित करती है कि चीन अब ऊर्जा के लिए सिर्फ सामान्य भंडारों पर निर्भर नहीं है, बल्कि वह उन भू-गर्भीय सीमाओं को लांघ रहा है जहां तक पहुंचना अब तक नामुमकिन समझा जाता रहा है.
सबसे बड़ा तेल आयातक है चीन
चीन दुनिया का कच्चे तेल (crude oil) का सबसे बड़ा आयातक है. चीन की घरेलू खपत का 70% से अधिक हिस्सा आयातित तेल से पूरा होता है. साल 2025 में चीन ने रिकॉर्ड 55.773 करोड़ टन कच्चा तेल आयात किया. यानी हर दिन औसतन 1.155 करोड़ बैरल. वहीं चीन का वार्षिक घरेलू क्रूड उत्पादन लगभग 21.5 करोड़ मीट्रिक टन है. चीन हर दिन लगभग 11 मिलियन बैरल कच्चा तेल अपनी धरती और समुद्र से निकालता है.
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रुली बिश्नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …
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