Sunday, October 18, 2026
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चमकीला रंग देखकर न खरीदें हल्दी-मिर्च, असली समझकर घर न ले आएं मिलावटी मसाले


Fake Masala Identification: बाजार से हल्दी, लाल मिर्च या धनिया पाउडर खरीदते समय ज्यादातर लोग ब्रांड, कीमत और पैकेट देखकर ही फैसला कर लेते हैं, लेकिन सिर्फ अच्छा पैकेट या चमकीला रंग देखकर मसाले की शुद्धता का पता नहीं लगाया जा सकता. पिसे हुए मसालों में कुछ दूसरी चीजों की मिलावट हो सकती है, जिसे पहचानना आसान नहीं होता. ऐसे में मसाला खरीदते समय कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) भी खाने-पीने की चीजें खरीदते समय लेबल और पैकेट की हालत जांचने पर जोर देता है. आइए जानते हैं कि मसाले खरीदते समय किन बातों को देखना चाहिए और घर पर मिलावट का शक होने पर क्या करना सही रहेगा.

पिसे मसालों में मिलावट पहचानना मुश्किल क्यों है?

साबुत मसालों को देखकर उनकी बनावट और हालत का अंदाजा लगाया जा सकता है, लेकिन जब हल्दी, मिर्च या धनिया पीसकर पाउडर बना दिया जाता है, तो उसमें मिली दूसरी चीजों को पहचानना मुश्किल हो सकता है. कुछ मामलों में रंग बदलने वाले पदार्थ, स्टार्च या दूसरे पदार्थ मिलाए जा सकते हैं. हालांकि, हर पिसा हुआ मसाला मिलावटी नहीं होता. इसलिए केवल उसके रंग या कीमत के आधार पर उसे नकली मानना सही नहीं है. मसाला खरीदते समय पैकेट पर दी गई जानकारी और उसकी हालत पर ध्यान देना ज्यादा जरूरी है.

1. पैकेट पर FSSAI लाइसेंस नंबर देखें

पैक्ड मसाला खरीदते समय पैकेट पर FSSAI का लोगो और लाइसेंस नंबर जरूर देखें. साथ ही निर्माता या पैकर और ब्रांड से जुड़ी जानकारी भी पढ़ें. इससे आपको पता चलता है कि पैकेट पर जरूरी खाद्य सुरक्षा संबंधी जानकारी दी गई है या नहीं. ध्यान रखें कि सिर्फ FSSAI नंबर लिखा होने से मसाले के पूरी तरह शुद्ध होने की गारंटी नहीं मिलती. इसलिए बाकी जानकारी भी जांचें.

2. पैकिंग की तारीख और बेस्ट बिफोर पढ़ें

मसाला खरीदते समय पैकेट पर लिखी पैकिंग या निर्माण की तारीख और बेस्ट बिफोर की जानकारी देख लें. इससे आपको मसाले की इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी समझने में मदद मिलेगी. बेस्ट बिफोर का मतलब यह नहीं है कि तारीख निकलते ही मसाला हमेशा असुरक्षित हो जाता है. फिर भी खरीदारी करते समय सही तारीख वाला पैकेट चुनें और उसे घर पर सूखी, ठंडी जगह पर रखें.

3. बहुत ज्यादा चमकीले रंग से रहें सावधान

अगर हल्दी या लाल मिर्च का रंग असामान्य रूप से चमकीला दिख रहा है, तो खरीदने से पहले बाकी जानकारी भी जांचें. कुछ मामलों में रंग बढ़ाने के लिए मिलावट की जा सकती है, लेकिन केवल रंग देखकर मसाले को नकली नहीं कहा जा सकता. अलग-अलग किस्मों और मसालों की प्राकृतिक रंगत भी अलग हो सकती है.

4. गांठें और अजीब गंध को नजरअंदाज न करें

पिसे मसाले में बहुत ज्यादा गांठें हों या उसमें से सीलन और अजीब गंध आए, तो सावधान रहें. ऐसा नमी लगने या गलत तरीके से रखे जाने के कारण भी हो सकता है, अगर पैकेट खोलने के बाद मसाले की गंध या बनावट असामान्य लगे, तो उसे खाने में इस्तेमाल न करें. शक होने पर दुकानदार से संपर्क करें या खाद्य सुरक्षा विभाग में शिकायत करें.

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5. पैकेट की सील और बैच नंबर जांचें

मसाला खरीदते समय देखें कि पैकेट फटा हुआ तो नहीं है और उसकी सील सही है या नहीं. खुली या खराब पैकिंग वाला सामान खरीदने से बचें. पैकेट पर बैच या लॉट नंबर, निर्माता की जानकारी और दूसरी जरूरी डिटेल भी पढ़ें, अगर बाद में उत्पाद को लेकर कोई शिकायत करनी पड़े, तो ये जानकारियां काम आ सकती हैं.

6. साबुत मसाले खरीदना बेहतर विकल्प हो सकता है

अगर घर पर मसाले पीसने की सुविधा है, तो साबुत धनिया, जीरा, काली मिर्च और हल्दी खरीदने पर विचार कर सकते हैं. साबुत मसालों की बनावट और हालत देखना आसान होता है. हालांकि, साबुत मसाले भी हमेशा मिलावट से मुक्त हों, यह जरूरी नहीं है. इन्हें खरीदते समय भी साफ-सफाई, गुणवत्ता और पैकिंग का ध्यान रखें.

7. खुले में बिकने वाले पिसे मसालों से बचें

खुले में रखे पिसे मसालों में धूल, नमी और दूसरी चीजें मिल सकती हैं. इसलिए पैक्ड मसाले खरीदना बेहतर विकल्प है, जिन पर निर्माता, बैच नंबर और जरूरी लेबल की जानकारी दी गई हो. खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत मसालों की बिक्री और पैकिंग से जुड़े नियमों का पालन जरूरी है. खरीदारी करते समय साफ-सुथरी दुकान और सही पैकिंग को प्राथमिकता दें.



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