Thursday, October 22, 2026
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2027-28 तक तैयार होगी ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन मिसाइल: चीफ बोले- वजन 1.3 टन होगा; रेंज बढ़ाकर 1500km करना रोडमैप में शामिल, इसकी शुरुआती रेंज 290km थी




ब्रह्मोस एयरोस्पेस 2027-2028 तक ब्रह्मोस-नेक्स्ट जेनरेशन (NG) पहला प्रोटोटाइप तैयार कर सकता है। ब्रह्मोस-NG यानी मिसाइल का छोटा और हल्का रूप है। अभी वाली ब्रह्मोस 3 टन की है, इसलिए एक सुखोई-30 पर 1 ही मिसाइल लगती है। नई ब्रह्मोस-NG (नेक्स्ट जेनरेशन) सिर्फ 1.3 टन का होगा। सुखोई पर 3 मिसाइल लगेंगी। तेजस, राफेल जैसे छोटे फाइटर जेट पर भी लग सकेगी। यानी इसकी ज्यादा स्वदेशी, नई टेक्नोलॉजी और हल्के मटेरियल से बनेगी। कंपनी के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जयतीर्थ जोशी ने ANI को दिए इंटरव्यू में बताया कि मिसाइल अपनी शुरुआती 290 किमी स्ट्राइक रेंज से आगे की क्षमता दिखा चुकी है। अब कंपनी 1500 KM रेंज वाली मिसाइल का सोच रही है, लेकिन वो अभी सिर्फ कागज पर है। इसके लिए रूस से बात चल रही है। विदेशी सेनाएं ब्रह्मोस-NG भी रुचि दिखा रहीं डॉ. जोशी ने बताया कि कुछ देशों ने लड़ाकू विमान से लॉन्च की जा सकने वाली बह्मोस को अपनी एयरफोर्स में शामिल करने में रुचि दिखाई है। इन देशों के पास सुखोई-30 विमान मौजूद हैं। इसके अलावा, कुछ देशों ने ब्रह्मोस-एनजी की इच्छा भी जताई है, जिसे पहले एयरबोर्न कॉन्फिगरेशन में विकसित किया जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर में प्रदर्शन के बाद बढ़ी दिलचस्पी डॉ. जोशी के मुताबिक, मिसाइल के ऑपरेशन सिंदूर में प्रदर्शन के बाद विदेशी सेनाओं की इसके ऑपरेशनल और फंक्शनल पैरामीटर्स में दिलचस्पी बढ़ी है। सेनाएं ऐसा अत्याधुनिक सिस्टम चाहती हैं, जो तेजी से बदलते युद्ध के माहौल के अनुसार खुद को ढाल सके। डॉ. जोशी ने कहा कि ब्रह्मोस एक बेहद आधुनिक हथियार है। यह समय के साथ विकसित हो रहा है और इसने अपने प्रदर्शन की क्षमता साबित की है। पूरे ऑपरेशन के दौरान मिसाइल ने दुश्मन के ठिकानों पर सटीक निशाना लगाया। इस दौरान एक भी मिसाइल इंटरसेप्ट नहीं हुई। भारत के रक्षा निर्यात में ब्रह्मोस की भूमिका डॉ. जोशी ने कहा कि मिसाइल के युद्ध प्रदर्शन का भारत के रक्षा निर्यात पर असर पड़ा है। उनके मुताबिक, ब्रह्मोस भारत की रक्षा क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है। उन्होंने कहा, “ब्रह्मोस अब सिर्फ एक मिसाइल नहीं है। यह आत्मविश्वास से भरे और आत्मनिर्भर नए भारत की ताकत, सटीकता और गर्व है। सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान के प्रमुख एयरबेस, नूर खान समेत कई अहम ठिकानों को निशाना बनाया। इससे इस हथियार प्रणाली की ताकत सामने आई। ब्रह्मोस सिस्टम भारत के रक्षा निर्यात का भी अहम आधार है। भारत का रक्षा निर्यात 38,400 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है। इसमें सालाना 62.7% की वृद्धि दर्ज की गई है।



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