भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रणौत के खिलाफ छात्रों को ‘गटर जनरेशन’ कहने और उनके अभिभावकों का अपमान करने के मामले में गुरुवार को जिला जज संजय कुमार मलिक की अदालत में सुनवाई हुई। वादी पक्ष ने मामले से जुड़े दस्तावेज पेश किए। यह मामला कंगना रणौत की सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। आरोप है कि उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों को ‘गटर जनरेशन’ कहा था और उनके अभिभावकों का अपमान किया था। इस मामले में राजीव गांधी बार के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने परिवाद दायर किया था। 3 सितंबर को खारिज हुआ था परिवाद एमपी-एमएलए अदालत में 3 सितंबर को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुज कुमार सिंह ने परिवाद खारिज कर दिया था। आदेश में कहा गया था कि परिवाद में जिस घटना का उल्लेख किया गया है, उससे वादी न तो पीड़ित है और न ही व्यथित। इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए जिला अदालत में रिवीजन दाखिल किया गया। नीट पेपर लीक का भी किया उल्लेख परिवाद में नीट और अन्य परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक होने से करोड़ों छात्रों के प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया कि कई छात्र तनाव में आकर आत्महत्या कर चुके हैं। पेपर लीक के विरोध में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन भी हुए थे। परिवाद में कंगना रणौत की 27 जुलाई को सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम पर आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ की गई टिप्पणी का भी हवाला दिया गया है।
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कंगना के ‘गटर जनरेशन’ बयान मामले रिवीजन पर सुनवाई: वादी पक्ष ने कोर्ट में पेश किए दस्तावेज, 3 सितंबर को खारिज हुआ था परिवाद – Agra News
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