केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने जलवायु संकट के लिए यूरोप को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि भारत की तुलना में यूरोप की आबादी आधी है, लेकिन वहां प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन 7 से 8 गुना ज्यादा है। गोयल ने जर्मनी में एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि भारत को जलवायु परिवर्तन से जुड़ी अपनी जिम्मेदारियां निभाने के साथ 1.4 अरब लोगों की जरूरतें भी पूरी करनी हैं। देश की आबादी दुनिया की कुल आबादी का 17% है। फैक्ट चेक- यूरोप में प्रति व्यक्ति सालाना कार्बन उत्सर्जन 6-7 टन है, जबकि भारत में यह करीब 2 टन है, यानी एक यूरोपीय नागरिक औसतन एक भारतीय से 3 गुना से ज्यादा उत्सर्जन करता है। ‘इस संकट के लिए सबसे पहले कौन जिम्मेदार?’ गोयल ने यूरोपीय देशों से सवाल करते हुए कहा, “इस पूरी गड़बड़ी के लिए सबसे पहले कौन जिम्मेदार है? ओजोन परत को नुकसान कहां से पहुंचा? किसने वातावरण में इतना सारा कार्बन छोड़ा?” उन्होंने कहा कि वैश्विक उत्सर्जन में यूरोप की हिस्सेदारी और वहां प्रति व्यक्ति पर्यावरण पर पड़ने वाला असर भारत के मुकाबले काफी ज्यादा रहा है। गोयल ने कहा, “आज भी यहां बैठे हुए मेरा प्रति व्यक्ति कार्बन उत्सर्जन शायद आपके मुकाबले 10% या 15% से भी कम है।” भारत हवा-सौर ऊर्जा से बिजली बनाने में तीसरे नंबर पर गोयल ने कहा कि भारत संसाधनों की बर्बादी रोकने और चीजों को दोबारा इस्तेमाल करने पर जोर दे रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। देश का स्वच्छ ऊर्जा कार्यक्रम दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले कार्यक्रमों में शामिल है। ऊर्जा क्षेत्र पर नजर रखने वाली संस्था एंबर के मुताबिक, 2024 में भारत हवा और सौर ऊर्जा से बिजली बनाने के मामले में जर्मनी को पीछे छोड़कर दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच गया था। वहीं, 2025 में भारत में नवीकरणीय ऊर्जा से बिजली उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई। सौर, पवन, जलविद्युत और जैव ऊर्जा से बिजली उत्पादन कुल 98 टेरावाट-घंटे बढ़ा। ——————- यह खबर भी पढ़ें… तिब्बत में 7 तीव्रता का भूकंप, 16 मौतें, 54 घायल: 10 किमी गहराई में था केंद्र; पाकिस्तान-अफगानिस्तान में भी झटके तिब्बत में 7 तीव्रता का भूकंप आया है। भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 8:03 बजे भूकंप के झटके महसूस हुए। इसमें 16 लोगों की मौत हो गई और 54 लोग घायल हो गए। पूरी खबर पढ़ें…
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