मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह ने केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को लेकर प्रतिक्रिया दी है। अनंत सिंह से पूछा गया कि ललन सिंह किसके साथ हैं। इसपर अनंत सिंह ने मजाकिया अंजाद में कहा कि कौन से ललन सिंह की बात कर रहे हैं ? पूरे बिहार में 100 ललन सिंह हैं। हम उनको नहीं जानते हैं। मैं नीतीश कुमार और पार्टी को अपना भगवान मानता हूं। दूसरी तरफ भी रहे तो नीतीश जी को मानते रहेंगे। सरकार के विरोध में चल रहे हैं, पुलिस कहीं-कहीं जुर्माना किया है। उससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। ‘नीतीश का नाम लेकर नीरज आगे बढ़ें हैं’ अनंत सिंह से जब पूछा गया कि जदयू प्रत्याशी नीरज कुमार मंदिर गए हैं। इस सवाल पर अनंत सिंह ने कहा कि वह कोई गलत काम नहीं कर रहे हैं। जिसे अपना भगवान मानते हैं, उसके पास जा रहे हैं। हम जनता को भगवान मानते हैं, इसलिए जनता के बीच जाते हैं। उन्होंने नीरज कुमार पर निशाना साधते हुए कहा कि वह आज तक नीतीश कुमार का नाम लेकर आगे बढ़े हैं। उन्होंने अपने नाम पर अब तक क्या किया है ?
कार्रवाई कराएं, जनता जवाब देगी अपने समर्थन में आतिशबाजी होने को लेकर अनंत सिंह ने कहा कि जनता मालिक है और जनता से पूरी उम्मीद है। जनता ही न वोट देंगे। कोई दुकान से तो वोट खरीदकर लाएंगे नहीं। मोकामा में कई जगह विरोध होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मैं सरकार के विरोध में हूं, इसलिए पुलिस ने मेरे कई समर्थकों को पकड़कर थाने में बैठा दिया है। इन सब चीजों से उन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि इससे फायदा ही होगा।
अनंत सिंह और नीरज विवाद में केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की एंट्री… अनंत-नीरज के विवाद सुलझाने का जिम्मा ललन को मिला था अनंत सिंह और नीरज के विवाद चल रहा है। जदयू की कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने ललन सिंह को दोनों के बीच के विवाद को सुलझाने का जिम्मा सौंपा था। ललन सिंह ने कहा था कि जदयू के कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने मुझको फोन किया था। मैंने अनंत सिंह से बात की। उनकी कुछ शिकायतें हैं। उनका कहना है कि जब नीतीश सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव आया था तब मैं राजद में होते हुए भी नीतीश सरकार के समर्थन में था। मेरी पत्नी ने नीतीश सरकार को सपोर्ट किया था।
अनंत सिंह ने कहा था-नीतीश कुमार की लिए गोली खाई अनंत सिंह कह चुके हैं कि मैं नीतीश कुमार को मानता हूं। उन्होंने बिहार को बनाया है। मैं उनका दीवाना हूं। उनके लिए 9 लोगों की कुर्बानी दी। गोली तक खाई। लेकिन पार्टी में नीति है तो अब न्याय हो। मैं जब विधानसभा का चुनाव लड़ रहा था तब नीरज ने क्या-क्या नहीं किया। तब पार्टी कहां थी। अगर नियम है तो सबके लिए बराबर हो। वरना पार्टी रहे या ना रहे। मैं किसी का कर्मचारी नहीं हूं। नीरज कुमार ने 4 विधानसभा चुनाव में मेरे विरोध किया तब पार्टी ने क्यों कोई एक्शन नहीं लिया।
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