समस्तीपुर के ताजपुर के एक बड़े कारोबारी के यहां डकैती की साजिश रचने के मामले में गिरफ्तार कुख्यात नक्सली दीपक कुमार उर्फ डॉक्टर (38) करीब डेढ़ महीने पहले हत्या के एक मामले में समस्तीपुर मंडल कारा से जमानत पर बाहर आया था। जेल से निकलने के बाद उसने पुराने परिचित अपराधियों को जुटाकर नया गिरोह तैयार किया। इसी गिरोह ने वैशाली के जंदाहा थाना क्षेत्र के महिसौर स्थित हरप्रसाद चौक पर सीएसपी में पांच लाख रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया। इसके बाद ताजपुर के बड़े कारोबारी को निशाना बनाने की तैयारी थी, लेकिन उससे पहले ही पुलिस ने गिरोह का पर्दाफाश कर दीपक समेत पांच बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पूछताछ में दीपक ने बताया कि पातेपुर और जंदाहा इलाके में अब नक्सली के नाम पर लोग लेवी देने को तैयार नहीं हैं। नक्सली गतिविधियों में नाम आने के कारण सामान्य तौर पर निजी काम भी नहीं मिलता। इसी वजह से उसने पुराने साथियों के साथ जेल में संपर्क में आए कुछ युवाओं को जोड़कर नया गिरोह बनाया और आपराधिक वारदात शुरू कर दी। 10 साल से गांव नहीं आया दीपक दीपक मूल रूप से हसनपुर थाना क्षेत्र के भटवन गांव का रहने वाला है। पुलिस के अनुसार, वो पिछले करीब 10 वर्षों से गांव नहीं आया है। उसके पिता विलियम कुमार उर्फ विलियम रावत अपनी पत्नी के साथ गांव में रहते हैं। दोनों बुजुर्ग हैं और गांव में पीडीएस की दुकान चलाकर जीवनयापन करते हैं। दीपक की पत्नी प्रीति पटना के कंकड़बाग इलाके में अपने बच्चे के साथ अलग रहती है। वह वहां एक निजी स्कूल में शिक्षिका है। पढ़ाई के लिए मुजफ्फरपुर भेजा गया था पुलिस पूछताछ के दौरान दीपक के पुराने आपराधिक इतिहास की भी जानकारी सामने आई। बताया गया कि वर्ष 2012 में उसके पिता ने उसे पढ़ाई के लिए मुजफ्फरपुर भेजा था। वहां उसका एक चचेरा भाई भी पढ़ता था। दोनों के बीच विवाद के बाद चचेरा भाई लापता हो गया। काफी तलाश के बावजूद उसका आज तक पता नहीं चल सका। इसके बाद दीपक इधर-उधर भटकता रहा और इसी दौरान वैशाली के नक्सली गिरोह के संपर्क में आया। हालांकि शुरुआती दौर में उसका नाम किसी बड़ी वारदात में सामने नहीं आया था। लेवी के लिए दो किसानों के अपहरण और हत्या में आया नाम दीपक का नाम पहली बार बड़े नक्सली मामले में वर्ष 2018 में सामने आया। 27 दिसंबर 2018 को जंदाहा थाना क्षेत्र के महिसौर नहर के पास खेत से लौट रहे दो बड़े किसानों रंजीत कुमार सिंह और रमेश झा का लेवी के लिए अपहरण कर लिया गया था। बाद में दोनों की हत्या कर दी गई। घटना के दौरान लाल सलाम के नारे लगाए गए थे। मामले की जांच में वैशाली के कुख्यात नक्सली अमरनाथ सहनी, हेमंत सहनी, अशेश्वर सहनी, विजय सहनी और सुरेंद्र सहनी समेत अन्य लोगों के नाम सामने आए थे। अमरनाथ सहनी की गिरफ्तारी के बाद अनुसंधान के दौरान पहली बार दीपक का नाम भी सामने आया। इसी रात डीह बुचौली गांव में लेवी नहीं देने पर ऋषिकेश झा के घर पर हमला कर उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बचाव के लिए पहुंचे उनके चाचा उमाकांत झा और भाई भूषण झा पर भी बम से हमला किया गया था, जिसमें दोनों घायल हो गए थे। पुलिस के अनुसार, ऋषिकेश झा ने गांव में पत्ता उद्योग और आरओ प्लांट लगाया था। इसके बाद नक्सली संगठन की ओर से उनसे लेवी की मांग की जा रही थी। लेवी नहीं देने पर उनकी हत्या कर दी गई। 21 जनवरी 2019 को पहली बार हथियार के साथ पकड़ा गया दीपक उर्फ डॉक्टर को 21 जनवरी 2019 को वैशाली के पातेपुर थाना क्षेत्र में जीवाजोड़ मंदिर के पास हथियार के साथ गिरफ्तार किया गया था। उसके पास से एक देसी पिस्टल और गोलियां बरामद हुई थीं। इस मामले में तत्कालीन थाने के दारोगा छोटन कुमार के बयान पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इससे पहले 5 जनवरी 2019 को समस्तीपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में कल्याणपुर निवासी सुनील सहनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। बकाया रुपये मांगने के विवाद में हुई इस हत्या में भी दीपक का नाम सामने आया था। पुलिस के अनुसार, इस वारदात में उसने शूटर की भूमिका निभाई थी। पांच गिरफ्तार, चार की तलाश सदर डीएसपी सतीश सुमन ने बताया कि ताजपुर के कारोबारी को लूटने की साजिश में दीपक उर्फ डॉक्टर गिरोह का मास्टरमाइंड है। गिरफ्तार रामपुर दुधपुरा निवासी राहुल कुमार भी उसके साथ गिरोह में शामिल था। राहुल पूर्व में पॉक्सो एक्ट के मामले में जेल जा चुका है। डीएसपी ने बताया कि मामले में गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चार अन्य फरार हैं। फरार आरोपियों की पहचान कर ली गई है और उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
Source link

