Saturday, May 30, 2026
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AMCA फाइटर जेट: 70 kN से 120 kN तक, भारत का सपना अब हकीकत-गरजेगा स्वदेशी इंजन!


नई दिल्ली: दिल्ली के लाल किले पर हर साल स्वतंत्रता दिवस की परेड में जब भारतीय वायुसेना के जेट आसमान को चीरते हैं तो पूरा देश गर्व से भर उठता है. तिरंगे के नीचे उड़ते ये फाइटर जेट हमारी संप्रभुता और ताकत का प्रतीक बन जाते हैं. लेकिन इस शोरगुल और उत्साह के बीच एक सच्चाई दब जाती है… इन जेट्स का दिल, यानी इंजन, अब भी ज्यादातर विदेशी है.

यही वजह है कि आज भारत की असली आजादी का सवाल सिर्फ सीमाओं पर नहीं बल्कि तकनीकी आत्मनिर्भरता पर भी खड़ा है. और इस सफर का सबसे मुश्किल पड़ाव है एक पूरी तरह स्वदेशी फाइटर जेट इंजन. अगर भारत अपने जेट्स को अपना इंजन दे पाए, तो यह ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सबसे बुलंद उड़ान होगी.

शुरुआती प्रोटोटाइप ने 70–78 kN तक थ्रस्ट तो दिया, लेकिन टारगेट तक नहीं पहुंच सका. टर्बाइन ब्लेड मेटलर्जी, आफ्टरबर्नर स्थिरता और फंडिंग जैसी चुनौतियों ने प्रोजेक्ट को झटका दिया. तेजस को आखिरकार विदेशी GE-404 इंजन से उड़ान भरनी पड़ी.

लेकिन इसे नाकामी कहना गलत होगा. कावेरी ने भारत को डिजाइन टीम, टेस्ट फैसिलिटी, मटेरियल साइंस और प्राइवेट इंडस्ट्री पार्टनरशिप जैसी बुनियाद दी. गोदरेज जैसी कंपनियों ने इसके आठ मॉड्यूल बनाए और पूरा इकोसिस्टम खड़ा किया. यही नींव अब AMCA तक जाने वाले रास्ते की पहली ईंट है.

कावेरी से शुरू हुआ सफर 120 kN तक पहुंचेगा. (फाइल फोटो PTI)
90 kN से 120 kN तक: मंजिल की ओर एक मापा हुआ सफर
भारत का अगला बड़ा लक्ष्य है Advanced Medium Combat Aircraft (AMCA)- 5th Gen स्टील्थ फाइटर. इसके लिए 110–120 kN thrust वाला इंजन चाहिए. गोदरेज एयरोस्पेस के बिज़नेस हेड मानेक बहरमकमदिन कहते हैं “50 kN से सीधे 120 kN तक छलांग लगाना वैसा ही है जैसे 2G से सीधे 5G पर जाना. तकनीकी तौर पर मुमकिन लेकिन बेहद रिस्की. हमें पहले 90 kN का भरोसेमंद इंजन बनाना होगा जो तेजस Mk-2 को पावर दे सके. वहीं से AMCA का रास्ता खुलेगा.”

यानी रास्ता है स्पाइरल डेवलपमेंट… छोटे कदमों से धीरे-धीरे एवरेस्ट की चोटी तक पहुंचना. अमेरिका और फ्रांस जैसे देशों ने भी यही मॉडल अपनाकर सफलता पाई.

रॉकेट से फाइटर जेट तक: गोदरेज की भूमिका
गोदरेज का सफर ताले और तिजोरियों से शुरू होकर रॉकेट इंजन और अब जेट इंजन तक पहुंचा है. विक्रम साराभाई और ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जैसे दिग्गजों की छांव में इस कंपनी ने ISRO के लिए विकास इंजन, क्रायोजेनिक स्टेज और चंद्रयान-मंगलयान तक को सहारा दिया.आज लगभग आधा बिजनेस एविएशन सेक्टर को समर्पित है. हाई-टेम्परेचर ब्रेज़िंग, 3D मेटल प्रिंटिंग और एक्ट्यूएटर सिस्टम जैसे टेक्नोलॉजी अब AMCA प्रोग्राम में इस्तेमाल होंगी.

हाइब्रिड रास्ता: आज के लिए विदेशी, कल के लिए देसी
बहरमकमदिन का सुझाव है कि AMCA को शुरू में विदेशी इंजन के साथ उड़ाया जाए, ताकि डेडलाइन न खिसके. इस बीच स्वदेशी इंजन पर काम जारी रहे और जब तैयार हो, उसे शामिल कर लिया जाए. यही रास्ता है जिससे भारत बिना देरी के आज की जरूरत भी पूरी कर सके और कल की आत्मनिर्भरता भी पा सके.

2040 का सपना: जब गरजेगा भारतीय इंजन
गोदरेज महाराष्ट्र के खालापुर में 500 करोड़ रुपये का नया एयरोस्पेस प्लांट बना रहा है. यह 2028 तक तैयार होगा. वहां से घरेलू और ग्लोबल दोनों बाजारों के लिए इंजन बनेंगे. अगर सरकार, उद्योग और स्टार्टअप्स मिलकर कावेरी की सीख को आगे बढ़ाएं, तो 2040 तक AMCA को अपना स्वदेशी इंजन मिलेगा. उस दिन आसमान में गूंजता शोर सिर्फ ताकत का नहीं, बल्कि भारत की असली स्वतंत्रता का ऐलान होगा.



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