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NDA Seat Sharing: एनडीए ने सीट शेयरिंग का ऐलान कर दिया है. बीजेपी-जेडीयू 101-101 सीट पर और चिराग पासवान की पार्टी को 29 सीटें मिली हैं. उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी को 6-6 सीटें मिली हैं.
NDA Seat Sharing: एनडीए ने सीट शेयरिंग का ऐलान कर दिया है. बीजेपी-जेडीयू 101-101 सीट पर और चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास) को 29 सीटें मिली हैं. उपेंद्र कुशवाहा और जीतन राम मांझी की पार्टी को 6-6 सीटें मिली हैं. रविवार को भी रूठने और मनाने का दौर पूरे दिन जारी रहा. आखिरकार केंद्रीय मंत्री और बिहार बीजेपी के प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान ने सीट शेयरिंग का ऐलान कर दिया. इस बीच बीजेपी की एक और अहम बैठक हो रही है. इस बैठक में चिराग पासवान की पार्टी एलजेपी (रामविलास), उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी राष्ट्रीय लोक मोर्चा और जीतन राम मांझी की पार्टी हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) को लेकर सीट शेयरिंग पर चर्चा होगी और उसके बाद सीटों के नाम घोषित किए जाएंगे.
मान-मनोव्वल और मुलाकातों का दौर
रविवार को बीजेपी ने एक बार फिल से सहयोगी दलों से सीधा संवाद शुरू किया. केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और विनोद तावड़े के साथ गृह मंत्री अमित शाह ने व्यक्तिगत रूप से मान-मनोव्वल की कमान संभाली. उपेंद्र कुशवाहा की नाराज़गी को लेकर सबसे पहलले चर्चा हुई. बीजेपी सूत्रों की मानें तो कुशवाहा की पार्टी की पुरानी सीटें चिराग पासवान को दी जा रही हैं. इससे कुशवाहा को लगता है कि उनके लव-कुश समीकरण के आधार को कमजोर किया जा रहा है. अमित शाह ने कुशवाहा से मुलाकात कर उन्हें भविष्य में बड़ी भूमिका और सम्मानजनक सीट देने का आश्वासन दिया. इस पर कुशावाह केंद्र में मंत्री पद और एक एमएलसी सीट मांगा है.
चिराग के बाद अब मांझी और कुशवाहा की बारी
शुरुआत में जीतन राम मांझी भी कम सीटों के ऑफर और अपनी सुरक्षित सीटों पर चिराग के दावेदारी से खुश नहीं हैं. धर्मेंद्र प्रधान ने मांझी से मुलाकात कर उन्हें महादलित समुदाय में उनकी अहमियत को दोहराया और कम से कम 6 सीटें देने पर सहमति बनाने की कोशिश की. इस बीच जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह और संजय झा ने भी बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की ताकि सीटों को लेकर कोई असमंजस न रहे.
सीट बंटवारे में सबसे बड़ा गतिरोध चिराग पासवान और उपेंद्र कुशवाहा-जीतन राम मांझी के बीच टक्कर वाली सीटों पर थी. खासकर वैशाली, हाजीपुर, मगध और शाहाबाद क्षेत्र की उन सीटों पर पेंच फंसा था, जहां चिराग अपने उम्मीदवार उतारना चाहते हैं. बीजेपी यह जोखिम नहीं लेना चाहती थी कि महागठबंधन पहले सूची जारी कर चुनावी माहौल को अपने पक्ष में कर ले.

