Wednesday, July 15, 2026
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RGHS में OPD जांच नियम बदलने का विरोध: रेसटा ने नए नियमों को बताया कर्मचारी विरोधी, वापस लेने की रखी मांग – Tonk News




राजस्थान सरकार चकी ओर से राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत ओपीडी में 2 हजार रुपए से अधिक की जांच के लिए प्री-अप्रूवल (पूर्व अनुमति) अनिवार्य करने का विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश सरकार के इस फैसले ने वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों,पेंशनर्स और सेवानिवृत्त कर्मचारियों में चिंता बढ़ा दी है। फैसले के विरोध में शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) राजस्थान ने मोर्चा खोलते हुए। इसे मरीजों के हितों के खिलाफ बताया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद का कहना है कि आरजीएचएस योजना का उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को त्वरित एवं सरल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन नया आदेश इस व्यवस्था को आसान बनाने के बजाय और जटिल बना देगा। संगठन के अनुसार अधिकांश पेंशनर्स वरिष्ठ नागरिक है,जिन्हें समय-समय पर एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य महंगी जांचों की आवश्यकता पड़ती है। पूर्व अनुमति मरीजों के लिए बनेगी परेशानी इन जांचों की लागत सामान्यत 6 से 8 हजार रुपए या उससे अधिक होती है। ऐसे में हर बार पूर्व अनुमति लेने की बाध्यता मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनेगी। संगठन ने आशंका जताई कि पूर्व अनुमति मिलने में यदि 3 से 6 घंटे का समय लगता है तो गंभीर मरीजों के उपचार में अनावश्यक देरी हो सकती है। कई मामलों में कुछ घंटों की देरी भी मरीज के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। इसके अलावा ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट, पोर्टल या तकनीकी समस्याओं के कारण मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ सकती है। स्वीकृति नहीं मिलने पर आवेदन अप्रूव होगा नई गाइडलाइन में मंजूरी की समय सीमा भी तय कर दी गई है। पोर्टल पर भेजे गए प्री-ऑथराइजेशन अनुरोध पर 1 से 3 घंटे के भीतर निर्णय किया जाएगा। यदि निर्धारित समय में कोई निर्णय नहीं होता है तो संबंधित रिक्वेस्ट ऑटो अप्रूव मानी जाएगी। यदि जांच अत्यंत आवश्यक है तो आवेदन पर शीघ्र निर्णय किया जाएगा, जबकि सामान्य मामलों में अधिकतम तीन घंटे के भीतर मंजूरी या अस्वीकृति का निर्णय देना होगा। सरकार से आदेश वापस लेने की मांग शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष सलावद का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया जोड़ने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे मरीजों को तत्काल जांच और उपचार मिल सके। महासंघ ने सरकार से इस आदेश को वापस लेकर आरजीएचएस योजना के मूल उद्देश्य सरल, सुलभ और त्वरित चिकित्सा सुविधा को बरकरार रखने की मांग की है। इस संबंध में शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेश महामंत्री नवल सिंह मीणा,प्रदेश प्रवक्ता राजीव चौधरी,प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंसाराम खिजुरी,प्रदेश संरक्षक साफी मोहम्मद मंसूरी,प्रदेश सभाध्यक्ष सांवल राम सोनड़,प्रदेश सचिव राजकमल मीणा, प्रदेश संगठन मंत्री राजेश रेबारी, प्रदेश विधि सहलाकार अधिवक्ता हनुमान शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष गजराज सिंह मोठपुर, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्याम सुंदर विश्नोई, प्रदेश सहलाकार देवी सिंह मीणा ने इस आदेश का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दो हजार रुपए से अधिक की जांच के लिए पूर्व अनुमति की अनिवार्यता को तत्काल वापस लिया जाए अथवा पेंशनर्स और वरिष्ठ नागरिकों को इससे पूर्ण छूट प्रदान की जाए ताकि उन्हें बिना विलंब आवश्यक जांच एवं उपचार मिल सकें।



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