Friday, May 29, 2026
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Street Food: विदेशी धरती पर देसी स्वाद…पप्पू कचौरी के जायके ने जीता सबका दिल, खानो वालों का लगता ट्रफिक


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Famous Street Food: पप्पू कचौरी का स्वाद इतना लाजवाब है कि इसका नाम अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं, बल्कि विदेशों तक मशहूर हो चुका है. एक बार खाने वाला इसका जायका कभी नहीं भूल पाता. देसी तड़के और अनोखे स्वाद की वजह से यह कचौरी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है.

भीलवाड़ा: राजस्थान प्रदेश अपने खास चटपटे और तीखे व्यंजनों को लेकर देश ही नहीं पूरे दुनिया मे मशहूर हैं. स्वाद के शौकीनों के लिए हम आपको एक ऐसी कचौरी के बारे में बताने जा रहे हैं जो राजस्थान के मात्र भीलवाड़ा जिले में मिलती है. भीलवाड़ा  में बनने वाली पप्पू की कचौड़ी के स्वाद का हर कोई दीवाना हैं. शहर के जवाहर नगर में पप्पू भाई की कचौड़ी लोगों के स्वाद की पहली पसंद बन चुकी है. पप्पू भाई ने अपनी शुरुआत साल 1990 में की थी. उस समय बारिश के दिनों में वह ठेला लगाकर कचौड़ी बेचा करते थे.

धीरे-धीरे उनके स्वाद का जादू लोगों पर इस कदर चढ़ा कि अब साल के 12 महीने, चाहे सर्दी हो या गर्मी, उनकी कचौड़ी बिकती है. बरसात के दिनों मे पप्पू की कचोरी की डिमांड और भी ज्यादा बढ़ जाती है और लोगों को कचोरी खाने के लिए लंबी लाइन का इंतजार करना पड़ता है

कचौड़ी की सबसे बड़ी खासियत
पप्पू भाई बताते हैं कि उनकी कचौड़ी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह आम कचौड़ी से थोड़ी बड़ी और ज्यादा मसालेदार होती है. इसमें भरपूर मसाला डाला जाता है, जिससे इसका स्वाद तीखा और अलग बन जाता है. यही नहीं, यह कचौड़ी 10 दिन तक खराब नहीं होती, जबकि आमतौर पर कचौड़ी उसी दिन खाने लायक होती है. इस वजह से लोग यहां से पैक करवा कर दूर-दराज तक ले जाते हैं. उनके ग्राहक ऑस्ट्रेलिया, पेरिस और मुंबई तक कचौड़ी लेकर जाते हैं. कई बार लोग मसाला ठंडा करवाकर भी साथ ले जाते हैं.

हर दिन दोपहर 12 बजे तक ही पप्पू भाई कचौड़ी बनाते हैं और तब तक करीब 1200 से 1500 कचौड़ियां बिक जाती हैं. उनके पास आने वाले ग्राहकों की संख्या इस बात का सबूत है कि स्वाद ही उनकी सबसे बड़ी पहचान है.

भीलवाड़ा की खास विरासत मानी जा रही
ग्राहक मुरली का कहना है कि उन्होंने पप्पू भाई की कचौड़ी पिछले 20 सालों से खाना जारी रखा है. उनका मानना है कि अगर किसी को सर्दी-जुकाम हो और वह दो कचौड़ी खा ले तो राहत मिल जाती है. वहीं, एक अन्य ग्राहक योगेश शर्मा कहते हैं कि यहां का स्वाद इतना लाजवाब है कि वह रोजाना कचौड़ी खाने आते हैं और अपने परिवार के लिए पैक करवा कर भी ले जाते हैं.

पप्पू भाई की कचौड़ी अब सिर्फ भीलवाड़ा की गली-मोहल्लों तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह शहर की पहचान बन गई है. इसका स्वाद हर किसी की जुबां पर है और यह कचौड़ी भीलवाड़ा की खास विरासत मानी जा रही है.

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Jagriti Dubey

With more than 6 years above of experience in Digital Media Journalism. Currently I am working as a Content Editor at News 18. Here, I am covering lifestyle, health, beauty, fashion, religion, career, politica…और पढ़ें

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