Friday, September 25, 2026
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UN में नेपाल पीएम ने भारत-चीन को थैंक्यू कहा: बोले- हिमालय बचाने के लिए साथ आएं, भोटेकोशी की बाढ़ पूरी दुनिया को चेतावनी


न्यूयॉर्क11 मिनट पहले

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नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार रात संयुक्त राष्ट्र महासभा के सत्र को संबोधित किया।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने गुरुवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भोटेकोशी की बाढ़ के बाद मदद के लिए भारत और चीन को धन्यवाद किया।

उन्होंने कहा कि हिमालय में बढ़ते खतरे से निपटने के लिए नेपाल, भारत और चीन को साथ आना होगा। शाह ने भोटेकोशी की बाढ़ को सिर्फ नेपाल की आपदा नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए चेतावनी बताया।

शाह ने कहा कि इस बाढ़ ने सड़कें, पुल, स्कूल, घर और लोगों के काम-धंधे तबाह कर दिए। उन्होंने दुनिया से अपील करते हुए कहा कि जलवायु आपदा से प्रभावित गरीब देशों को दोबारा खड़ा करने के लिए कर्ज नहीं, ग्रांट यानी ऐसी मदद दी जाए जिसे वापस न करना पड़े।

मार्च 2026 में प्रधानमंत्री के बाद बालेन शाह का यह UNGA में पहला भाषण था।

मार्च 2026 में प्रधानमंत्री के बाद बालेन शाह का यह UNGA में पहला भाषण था।

हिमालय के लिए भारत-चीन के साथ अलर्ट सिस्टम बनाने का प्रस्ताव

बालेन शाह ने नेपाल, भारत और चीन के बीच एक साझा अलर्ट सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया, ताकि बाढ़ और ग्लेशियर से आने वाली आपदाओं का पहले पता चल सके। इसके तहत तीनों देश;

  • सैटेलाइट से मिली जानकारी आपस में शेयर करेंगे।
  • खतरनाक ग्लेशियर झीलों पर नजर रखेंगे।
  • बाढ़ की पहले सूचना देने वाला सिस्टम मजबूत करेंगे।
  • आपदा आने पर राहत-बचाव में साथ काम करेंगे।

शाह ने कहा कि तीनों देशों के बीच जानकारी शेयर होने और मिलकर तैयारी करने से आपदा में होने वाला नुकसान कम किया जा सकता है।

बालेन बोले- भोटेकोशी की बाढ़ सिर्फ नेपाल की समस्या नहीं

बालेन शाह ने कहा कि भोटेकोशी-त्रिशूली की बाढ़ सिर्फ नेपाल की समस्या नहीं है। जलवायु बदलाव का असर पूरे हिमालयी इलाके पर पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि इसका असर भारत, भूटान, बांग्लादेश, पाकिस्तान और दूसरे पड़ोसी देशों पर भी पड़ सकता है। इसलिए हिमालय से जुड़ी आपदाओं से निपटने के लिए देशों को मिलकर काम करना होगा।

ग्लेशियर टूटने के बाद आई थी बाढ़

26 अगस्त को नेपाल-चीन सीमा के पास तिब्बत इलाके में ग्लेशियर टूटने के बाद भूस्खलन हुआ, जिससे अचानक बाढ़ आ गई। पानी और मलबे ने नीचे की घाटियों में भारी तबाही मचाई।

इस आपदा में कम से कम 1450 लोगों की मौत हुई है। कई हफ्ते बाद भी राहत और लापता लोगों की तलाश जारी है। 6000 से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। शाह ने कहा कि इनमें से कई लोग शायद कभी नहीं मिल पाएंगे।

नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद क्षतिग्रस्त मकान। तस्वीर 31 अगस्त की है।

नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट में भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद क्षतिग्रस्त मकान। तस्वीर 31 अगस्त की है।

नेपाल को GDP के 10% के बराबर मदद की जरूरत

शाह के मुताबिक, इस आपदा के बाद नेपाल को सड़क, पुल, घर और दूसरी जरूरी चीजें दोबारा बनाने के लिए अपनी GDP के करीब 10% के बराबर मदद की जरूरत है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने यह भी कहा कि,

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दुनिया ने युद्ध के लिए सामान पहुंचाने की व्यवस्था तो बहुत मजबूत बना ली है, लेकिन जरूरतमंद लोगों तक खाना और राहत पहुंचाने की व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं है।

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नेपाल ने UN फंड से 20 मिलियन डॉलर की मदद मांगी

नेपाल ने संयुक्त राष्ट्र के लॉस एंड डैमेज फंड से 20 मिलियन डॉलर की मदद मांगी है। इस फंड से एक देश अधिकतम इतनी ही राशि मांग सकता है।

हालांकि, यह रकम नेपाल को हुए नुकसान के मुकाबले काफी कम है। नेपाल सरकार के शुरुआती आकलन के मुताबिक, बाढ़ से देश को करीब 5 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है।

लॉस एंड डैमेज फंड 2022 में पाकिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद बनाया गया था, ताकि जलवायु आपदाओं से प्रभावित देशों की मदद की जा सके। अब तक इस फंड से किसी देश को राशि जारी नहीं की गई है।

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