Saturday, June 6, 2026
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अमरोहा की पहचान हैं ये 5 लाजवाब खाने की चीजें, जरूर करें ट्राई


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यूपी के अमरोहा जनपद में वैसे तो खाने-पीने की बहुत सी चीज हैं. लेकिन पांच ऐसी चीज है. जो खाने पीने में बहुत लाजवाब है. इसके साथ ही दूर-दूर से लोग इनका स्वाद लेने के लिए आते हैं और लोग इन्हें खूब पसंद करते हैं.अमरोहा में जो भी घूमने आता है. वह इन चीजों का स्वाद जरूर लेता है.

यूपी के अमरोहा जनपद में खाने की कई चीजें मशहूर हैं. जिनमें नान गोश्त और नल्ली निहारी,अमरोहा की मशहूर बिरयानी,लजीज पकौड़े और चाट,मटन पाया और कीमा,अमरोहा के आम शामिल है. यह चीज शहर की मशहूर चीज हैं. जिन्हें खाने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. और दूर-दूर तक इन चीजों की डिमांड रहती है. इसलिए अमरोहा शहर में जो भी आते हैं. वह इन चीजों का लुत्फ जरूर लेते हैं.

अमरोहा अपनी अन्य पहचान के साथ-साथ खाने-पीने के क्षेत्र में भी मशहूर है. यहां का नान गोश्त और नल्ली निहारी खाने के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. सुबह से देर रात तक यहां की गलियां गोश्त और मसालों की खुशबू से महकती रहती हैं.यह अमरोहा की सबसे मशहूर डिश है. मिट्टी के तंदूर में सिकी गरमागरम नान ऊपर से करारी और अंदर से रुई जैसी नरम होती है. इस पर लगा देसी घी और कलौंजी इसका स्वाद बढ़ा देते हैं. गोश्त को देसी घी, खड़े मसाले, भुना प्याज, दही और लहसुन-अदरक के साथ बड़ी देग में धीमी आंच पर 4 से 5 घंटे पकाया जाता है. ग्रेवी इतनी गाढ़ी और दानेदार होती है कि नान पर लपेटते ही चिपक जाए. बकरे का गोश्त इतना गल जाता है कि हड्डी खुद-ब-खुद अलग हो जाती है. तीखा, चटपटा और शाही जायका हर निवाले में मिलता है।

निहारी अमरोहा की सुबह की शान है.बड़े की नल्ली और गोश्त को रातभर कोयले की धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसमें सोंठ, सौंफ, पीपली, जावित्री और खास निहारी मसाला डाला जाता है. 8 से 10 घंटे पकने के बाद ग्रेवी गाढ़ी हो जाती है और ऊपर सुनहरा तेल तैरने लगता है. इसे खमीरी रोटी, कुलचा या शीरमाल के साथ खाया जाता है. परोसते समय ऊपर से बारीक कटा अदरक, हरी मिर्च, हरा धनिया और नींबू डाला जाता है. एक चम्मच मुंह में जाते ही सारा स्वाद घुल जाता है. सर्दियों में तो इसका मजा दोगुना हो जाता है।

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अमरोहा की बिरयानी सिर्फ एक डिश नहीं, यह यहां की तहजीब और खाने की विरासत का हिस्सा है. अपने अनोखे जायके, खुशबू और बनाने के तरीके के कारण यह दूर दूर तक मशहूर है. लखनवी और मुरादाबादी बिरयानी से इसका अंदाज थोड़ा अलग और खास है.यहां की बिरयानी असली दम पुख्त तरीके से तैयार होती है. सबसे पहले बकरे के गोश्त को दही, अदरक लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, तला हुआ प्याज, केवड़ा जल, गुलाब जल और खास गरम मसालों में 5 से 6 घंटे तक मैरिनेट किया जाता है. इससे गोश्त रसीला और खुशबूदार हो जाता है।

लंबे दाने वाले बासमती चावल को तेज पत्ते, दालचीनी और नमक के साथ आधा उबाला जाता है.फिर बड़ी तांबे की देग में नीचे मैरिनेट किया हुआ गोश्त और ऊपर आधे पके चावल की परत लगाई जाती है. बीच में तला प्याज, पुदीना, केसर वाला दूध और देसी घी डाला जाता है. देग का मुंह आटे से सील करके कोयले की धीमी आंच पर दम दिया जाता है.इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका हल्का सुनहरा पीला रंग और ऐसी भीनी खुशबू जो गली में आते ही भूख बढ़ा दे.चावल का एक एक दाना खिला हुआ होता है. गोश्त इतना नरम कि हड्डी से खुद अलग हो जाए. इसमें मिर्च और तेल कम होता है पर जायका पूरा शाही मिलता है. हर निवाले में केवड़े और गरम मसाले का स्वाद घुला होता है।

अमरोहा के पकोड़े और चाट का स्वाद पूरे इलाके में मशहूर है. यहां के आलू, पालक और पनीर के पकोड़े बेसन में अजवाइन और हींग डालकर कुरकुरे तले जाते हैं. इन्हें हरी चटनी और इमली की खट्टी मीठी चटनी के साथ गरमागरम परोसा जाता है. यहां की आलू टिक्की चाट और दही भल्ले की बात ही अलग है. आलू टिक्की को करारा सेंककर उस पर दही, हरी चटनी, मीठी चटनी, चाट मसाला और सेव डाला जाता है. दही भल्ले मुंह में जाते ही घुल जाते हैं.मंडी चौक और रेलवे रोड की पुरानी दुकानों पर शाम को भीड़ लगती है.तीखा, चटपटा और खट्टा मीठा स्वाद हर किसी को अपना दीवाना बना देता है।

अमरोहा का मटन पाया और कीमा खाने वालों की पहली पसंद है. पाया को रातभर धीमी आंच पर अदरक लहसुन, गरम मसाले और देसी घी में पकाया जाता है. सुबह तक शोरबा गाढ़ा और लजीज हो जाता है. पाया इतना गल जाता है कि हड्डी का सारा रस ग्रेवी में उतर आता है. इसे कुलचा या तंदूरी रोटी के साथ खाया जाता है. यहां का कीमा भी खास है. बकरे के कीमे को भुने प्याज, टमाटर, दही और खास मसालों में भूनकर तैयार किया जाता है. इसमें तेल कम और खुशबू ज्यादा होती है.मंडी चौक और कोट की पुरानी दुकानों पर सुबह से ही पाया और कीमे की महक गली में फैल जाती है. एक बार खाएंगे तो भूल नहीं पाएंगे।

अमरोहा के दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम पूरे देश में मशहूर हैं. यहां के आमों का स्वाद, खुशबू और मिठास बेमिसाल है. अमरोहा के आम दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तक जाते हैं. साथ ही दुबई, सऊदी अरब और यूरोप के कई देशों में भी निर्यात होते है. हर साल हजारों टन आम विदेश भेजे जाते हैं.यहां आम का सीजन मई के आखिरी हफ्ते से शुरू होकर अगस्त तक चलता है.सबसे पहले दशहरी, फिर लंगड़ा और आखिर में चौसा बाजार में आता है. अमरोहा को आमों की नगरी भी कहा जाता है. यहां की मिट्टी और मौसम आम को खास मिठास देते हैं. एक बार खाएंगे तो स्वाद कभी नहीं भूलेंगे.

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