Sunday, August 2, 2026
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ईश्वर और मूर्तियां मनुष्यों को नुकसान नहीं पहुंचाते, अंधविश्वास vs आस्था को लेकर मद्रास हाईकोर्ट ने खींची लकीर


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Madras High Court: जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति पर स्थापित मूर्तियों की शांतिपूर्वक पूजा करता है, तो आम जनता, बहुमत होने के नाम पर, कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकती. सरकारी अधिकारियों को अंधविश्वासों और झूठी मान्यताओं के आगे नहीं झुकना चाहिए.

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जज ने आदेश दिया कि लाउडस्पीकर को लेकर पुलिस कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. (फाइल फोटो)

चेन्नई. तमिलनाडु के एनोर जिले से बड़ी खबर सामने आई है. यहां नेट्टुकुप्पम स्थित भजन कोविल स्ट्रीट के निवासी कार्तिक अपने घर में शिवशक्ति दक्षेश्वरी, विनायगर और वीरभद्र स्वामी की मूर्तियों की पूजा करते थे. पड़ोसी भी पूजा में शामिल होते थे. मूर्तियों की स्थापना और पूजा के बाद, इलाके में कुछ लोगों की कथित तौर पर रहस्यमय परिस्थितियों में मृत्यु हो गई. स्थानीय निवासियों द्वारा इसी कारण से शिकायत दर्ज कराने पर अधिकारियों ने मूर्तियों को जब्त कर लिया.

इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए मद्रास हाईकोर्ट में एक मामला दायर किया गया. मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अप्रैल 2025 में आदेश दिया कि मूर्तियां याचिकाकर्ता को लौटा दी जाएं और यह भी निर्देश दिया कि लाउडस्पीकर का उपयोग इस तरह से न किया जाए जिससे आम जनता को परेशानी हो. कोर्ट ने कहा कि लोगों से कोई धन भी न लिया जाए.

इस आदेश के बावजूद अधिकारियों द्वारा अभी तक मूर्तियां वापस न किए जाने का आरोप लगाते हुए कार्तिक ने अदालत की अवमानना ​​की याचिका दायर की. अवमानना ​​याचिका की सुनवाई करते हुए जस्टिस भरत चक्रवर्ती ने याचिकाकर्ता को तिरुवोट्टियूर तालुक तहसीलदार कार्यालय जाकर मूर्तियां वापस लाने का निर्देश दिया.

याचिकाकर्ता द्वारा मूर्तियां वापस लेने के बाद जज ने अवमानना ​​कार्यवाही समाप्त कर दी. साथ ही, जज ने आदेश दिया कि यदि लाउडस्पीकर का उपयोग करके जनता को असुविधा पहुंचाई जाती है, तो पुलिस कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है. इसके अलावा, यदि याचिकाकर्ता के घर में बिना अनुमति के मंदिर का निर्माण किया गया है, तो अधिकारी कानून के अनुसार कार्रवाई कर सकते हैं.

इसी प्रकार, जज ने हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती विभाग के अधिकारियों को भी निर्देश दिया कि यदि कोई दान पेटी (हुंडियाल) रखी गई है तो कार्रवाई करें. जज ने आगे कहा कि यदि कोई व्यक्ति अपनी संपत्ति पर स्थापित मूर्तियों की शांतिपूर्वक पूजा करता है, तो आम जनता, बहुमत होने के नाम पर, कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकती. सरकारी अधिकारियों को अंधविश्वासों और झूठी मान्यताओं के आगे नहीं झुकना चाहिए. न्यायाधीश ने यह भी टिप्पणी की कि न तो ईश्वर और न ही मूर्तियां मनुष्यों को कोई नुकसान पहुंचाती हैं, और इस तरह की मान्यताएं अंधविश्वास हैं और इन्हें भक्ति नहीं माना जा सकता है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें

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