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देश के टियर-2 और टियर-3 शहर अब तेजी से विकास की नई उड़ान भर रहे हैं. केंद्र और राज्य सरकारें छोटे शहरों को हवाई नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दे रही हैं. यही वजह है कि आने वाले सालों में कई नए एयरपोर्ट शुरू होने जा रहे हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि जहां नया एयरपोर्ट बनता है, वहां सिर्फ विमान ही नहीं उतरते, बल्कि कारोबार और रोजगार के नए मौके भी आते हैं.
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नई दिल्ली. भारत के छोटे शहरों (टियर-2 और टियर-3) की सूरत और सीरत अब बदलने वाली है. देश में तेजी से फैलते एविएशन नेटवर्क और नए एयरपोर्ट्स के निर्माण ने न सिर्फ आम आदमी के सफर को आसान बनाया है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था की किस्मत का ताला भी खोल दिया है. सरकार की रीजनल कनेक्टिविटी स्कीम (UDAN) के तहत जैसे ही किसी छोटे शहर में नए एयरपोर्ट की घोषणा होती है या रनवे तैयार होता है, वैसे ही वहां का रियल एस्टेट मार्केट और रोजगार की दुनिया पूरी तरह बदल जाती है.
किसी भी शहर में एयरपोर्ट का आना उस इलाके के इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए एक ‘गेम-चेंजर’ साबित होता है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में एयरपोर्ट की बाउंड्री वॉल बनते ही आसपास की जमीनों के रेट में 50% से लेकर 200% तक का भारी उछाल देखा जा रहा है. एयरपोर्ट के आसपास के 10 से 15 किलोमीटर के दायरे में अचानक से बड़े डेवलपर्स, होटल चेन्स, मॉल्स और रेजिडेंशियल सोसाइटीज की एंट्री होने लगती है.
इन्वेस्टर्स की बन जाते हैं पसंद
जो इलाके कभी सुनसान माने जाते थे, वे अचानक से निवेशकों के लिए ‘हॉटस्पॉट’ बन जाते हैं. जेवर (नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट) या मोपा (गोवा) जैसी जगहों के अलावा, दरभंगा, बरेली और कलबुर्गी जैसे छोटे शहरों में एयरपोर्ट आने के बाद प्रॉपर्टी के दामों में जो तेजी आई है, वह इसका सबसे बड़ा उदाहरण है.
रोजगार के नए मौके
एक नया एयरपोर्ट अपने साथ सिर्फ हवाई जहाज नहीं लाता, बल्कि रोजगार का एक पूरा इकोसिस्टम लेकर आता है. इससे स्थानीय युवाओं और व्यापारियों के लिए शानदार मौके खुलते हैं. एयरपोर्ट ऑपरेशंस, ग्राउंड हैंडलिंग, सिक्योरिटी, केटरिंग और रिटेल स्टोर्स में हजारों डायरेक्ट नौकरियां पैदा होती हैं. वहीं दूसरी तरफ, कैब ड्राइवर्स, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और होटल इंडस्ट्री में इनडायरेक्ट रोजगार का सैलाब आ जाता है. इसके अलावा, बेहतर एयर कनेक्टिविटी के कारण बड़ी आईटी कंपनियां, मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स और स्टार्टअप्स भी इन छोटे शहरों का रुख करने लगते हैं. इससे स्थानीय युवाओं को अपने ही घर में नौकरियां मिलने लगती हैं.
भविष्य की तस्वीर
आने वाले समय में टियर-2 और टियर-3 शहर देश की आर्थिक तरक्की की मुख्य वजह बनने वाले हैं. अगर आपके शहर में भी नए एयरपोर्ट का काम शुरू हो रहा है, तो समझ लीजिए कि आपके इलाके की किस्मत बदलने वाली है. बेहतर कनेक्टिविटी, बढ़ता निवेश, रियल एस्टेट का उछाल और रोजगार के असीमित मौके इन शहरों को ‘कल के महानगर’ बनाने की राह पर ले जा रहे हैं.
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वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें

