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17 मिनट पहले
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गगनयान-G1 की लॉन्चिंग अगले 2 महीनों में होने की उम्मीद है!
ISRO ने गगनयान कार्यक्रम के क्रू मॉड्यूल (CM) और सर्विस मॉड्यूल (SM) को अलग करने वाले सिस्टम की टेस्टिंग पूरी कर ली है। इसके बाद इस सिस्टम के डिजाइन की क्षमता की पुष्टि हुई है।
ये परीक्षण तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई स्पेस सेंटर (VSSC) में किए गए। गगनयान का पहला मानवरहित मिशन G1 साल 2026 में लॉन्च करने का लक्ष्य है।

पहले ‘ह्यूमन-रेटेड LVM3’ (HLVM3) रॉकेट के जरिए लॉन्च किए जाने की उम्मीद है।
मॉड्यूल सेपरेशन को ऐसे समझिए…
गगनयान का ऑर्बिटल मॉड्यूल क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल से मिलकर बना है। दोनों मॉड्यूल एक सेपरेट सिस्टम के जरिए जुड़े होते हैं। अंबिलिकल कनेक्शनों से इनके बीच बिजली और लिक्विड की सप्लाई होती है।
लॉन्च से पहले दोनों मॉड्यूल को एक साथ जोड़ा जाता है। मिशन के ऑर्बिट में रहने वाले चरण के खत्म होने तक ये एक यूनिट की तरह काम करते हैं।
पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश से पहले क्रू मॉड्यूल, सर्विस मॉड्यूल से अलग होता है। इसके लिए कई घटनाएं तय क्रम में होती हैं।
परीक्षण में क्या जांचा गया
ISRO ने सेपरेशन सिस्टम के पूरे डिजाइन की पुष्टि के लिए विक्रम साराभाई सेंटर में ये परीक्षण किए। टेस्ट सेटअप में क्रू मॉड्यूल और सर्विस मॉड्यूल की एक साथ जुड़ी संरचना तैयार की गई थी। पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए इसमें बड़ी संख्या में इंस्ट्रूमेंट लगाए गए थे।
ISRO के मुताबिक, इन परीक्षणों से सेपरेशन सिस्टम के डिजाइन की क्षमता की पुष्टि हुई। साथ ही, क्रू मॉड्यूल के कई अहम सिस्टम की मजबूती और झटके सहने की क्षमता भी जांची गई।
इनमें एवियोनिक्स सिस्टम, इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम और पिछले हिस्से, शंकु के आकार वाले हीट शील्ड में लगा थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम शामिल है।
क्रू मॉड्यूल डिप्लॉयबल अंबिलिकल शील्ड की भी जांच की गई। इसके अलावा, क्रू मॉड्यूल अप राइटिंग सिस्टम और थर्मल एंड ह्यूमिडिटी कंट्रोल सिस्टम से जुड़े पाइरोटेक्निक डिवाइस भी परीक्षण में शामिल थे।
मॉड्यूल सेपरेशन को सवाल-जवाब में समझें…
मॉड्यूल अलग करना क्यों जरूरी है: गगनयान के क्रू मॉड्यूल को पृथ्वी पर लौटना है, जबकि सर्विस मॉड्यूल अंतरिक्ष में जरूरी सेवाएं देता है। वापसी के समय सर्विस मॉड्यूल को अलग करना जरूरी है, ताकि क्रू मॉड्यूल अपने हीट शील्ड के साथ वायुमंडल में प्रवेश कर सके।

बिजली और तरल पदार्थों के कनेक्शन भी अलग होंगे: दोनों मॉड्यूल के बीच बिजली, संचार और पर्यावरण नियंत्रण, जीवन समर्थन प्रणाली से जुड़े तरल पदार्थों के लिए अम्बिलिकल कनेक्शन होते हैं। सेपरेशन के दौरान ये कनेक्शन भी सही क्रम में टूटने चाहिए।
हीट शील्ड बचाएगी तेज गर्मी से: पृथ्वी के वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के दौरान क्रू मॉड्यूल को बहुत तेज गर्मी का सामना करना पड़ेगा। इसके लिए थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम और हीट शील्ड जरूरी हैं। हालिया परीक्षण में इनसे जुड़े हिस्सों की झटके सहने की क्षमता भी जांची गई।
सिर्फ अंतरिक्ष में पहुंचना नहीं, सुरक्षित लौटना भी लक्ष्य: क्रू मॉड्यूल की वापसी में पैराशूट अहम भूमिका निभाएंगे। पैराशूट मॉड्यूल की गति कम करने में मदद करते हैं, ताकि समुद्र में उतरते समय सुरक्षित रिकवरी की जा सके।

जुलाई 2026 में ISRO ने क्रू मॉड्यूल के पैराशूट और अन्य सुरक्षा प्रणालियों से जुड़े परीक्षणों की जानकारी दी थी।
समुद्र में उतरने के बाद मॉड्यूल को सीधा रखना: समुद्र में उतरने के बाद क्रू मॉड्यूल को सही स्थिति में बनाए रखने के लिए क्रू मॉड्यूल अप-राइटिंग सिस्टम विकसित किया गया है। जुलाई 2026 में इसके फ्लोटेशन सिस्टम का परीक्षण भी किया गया था।
इमरजेंसी में अंतरिक्ष यात्रियों को बचाने की व्यवस्था: गगनयान में क्रू एस्केप सिस्टम भी है। उड़ान के दौरान गंभीर समस्या आने पर यह अंतरिक्ष यात्रियों वाले मॉड्यूल को रॉकेट से दूर ले जाने के लिए बनाया गया है। अक्टूबर 2023 में ISRO ने TV-D1 परीक्षण के जरिए इस सिस्टम का उड़ान के दौरान प्रदर्शन जांचा था।
सबसे अहम सवाल-1 में इंसानों की जगह क्या होगा: G1 पहली मानवरहित उड़ान है। इसमें मानव यात्रियों के बजाय सिस्टम की कार्यक्षमता जांची जाएगी; मिशन की योजना में व्योममित्र नाम के अर्ध-मानवाकार रोबोट को भी शामिल किया गया है।

गगनशन मिशन: 2027 में शुभांशु समेत पायलट अंतरिक्ष जाएंगे
गगनयान ISRO का ह्यूमन स्पेस मिशन है। इसके तहत 2027 में स्पेसक्राफ्ट से वायुसेना के तीन पायलट्स को स्पेस में भेजा जाएगा। ये पायलट 400 किमी के ऑर्बिट पर 3 दिन रहेंगे, जिसके बाद हिंद महासागर में स्पेसक्राफ्ट की लैंडिंग कराई जाएगी। मिशन की लागत करीब 20,193 करोड़ रुपए है।
गगनयान मिशन के लिए अभी वायुसेना के चार पायलट्स को चुना गया है, जिनमें से एक ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला हैं। शुभांशु इसीलिए एक्सियम मिशन के तहत इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन गए थे।
गगनयान के जरिए पायलट्स को स्पेस में भेजने से पहले इसरो दो खाली टेस्ट फ्लाइट भेजेगा। तीसरी फ्लाइट में रोबोट को भेजा जाएगा। इसकी सफलता के बाद चौथी फ्लाइट में इंसान स्पेस पर जा सकेंगे। पहली टेस्ट फ्लाइट इस साल के अंत तक भेजी जा सकती है।

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