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Himalayan Orange Tourism Patna: इसको लेकर पटनावासियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. गुरुवार से शुरू हुआ यह फेस्टिवल 13 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान लोग न सिर्फ हिमालयी गांवों के उत्पाद खरीद सकेंगे, बल्कि अलग अलग राज्यों के संतरे भी खरीदने का मौका मिलेगा.
पटना. इन दिनों राजधानी पटना हिमालय की गोद में रहने वाले लोगों की रौनक से गुलजार है. पारंपरिक भेष-भूषा में सजे लोग पटना सिटी सेंटर में आयोजित 7वीं हिमालयन ऑरेंज टूरिज्म फेस्टिवल में हिस्सा लेने पहुंचे हैं. दरअसल, इस फेस्टिवल में हिमालयी राज्यों के ग्रामीण क्षेत्रों से आए लोग ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से शामिल हुए हैं. यहां वे पारंपरिक भोजन, कपड़े, पेंटिंग्स और खास तौर पर अपने क्षेत्रों में उगने वाले संतरे लेकर आए हैं. इन्हें देखने और उनकी संस्कृति को करीब से महसूस करने के लिए पटनावासियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है. गुरुवार से शुरू हुआ यह फेस्टिवल 13 दिसंबर तक चलेगा. इस दौरान लोग न सिर्फ हिमालयी गांवों के उत्पाद खरीद सकेंगे, बल्कि अलग अलग राज्यों के संतरे भी खरीदने का मौका मिलेगा.
हिमाचल के चम्बा की पेंटिंग के दीवाने हुए लोग
हिमाचल के चंबा गांव की पर्यटन का प्रतिनिधित्व कर रहीं ज्योति नाथ के हाथों से बनी पारंपरिक पेंटिंग लोगों को खूब पसंद आ रही है. उनके स्टॉल पर चंबा में बने पेंटिंग, टोपी और कपड़े प्रदर्शित किए गए हैं. ज्योति नाथ ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि यहां आने वाले लोग उनके गांव में बने इन उत्पादों को खरीद सकते हैं. उन्होंने पेंटिंग के बारे में कहा कि इसे ‘मिनिएचर पेंटिंग’ कहा जाता है, जो चंबा की पारंपरिक कला है, यह पेंटिंग कहानी को फॉलो करते हुए बनाई जाती है. उनकी यह कलाकृतियां फेस्टिवल में लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित कर रही हैं.
बिहार में पहली बार हुआ आयोजन
इस फेस्टिवल के कॉर्डिनेटर राज बासु ने लोकल 18 को बताया कि हिमालयन ऑरेंज फेस्टिवल एशिया का सबसे बड़ा ग्रामीण पर्यटन को समर्पित कार्यक्रम है. अब तक इसका आयोजन कोलकाता में किया जाता था, लेकिन इस बार इसे पटना के सिटी सेंटर मॉल में आयोजित किया गया है. इस फेस्टिवल में अरुणाचल प्रदेश से लेकर हिमाचल प्रदेश तक, हिमालय की गोद में बसे अलग अलग राज्यों के ग्रामीण लोग शामिल हुए हैं. इसमें हिमाचल, सिक्किम, असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मणिपुर, नेपाल और भूटान सहित लगभग सभी हिमालयी क्षेत्रों के प्रतिभागी मौजूद हैं.
राज बासु ने आगे बताया कि ग्रामीण पर्यटन की असली पहचान ऑरेंज यानी संतरा है. उन्होंने कहा कि संतरा हमारे लिए सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि हमारी विरासत, हमारी संस्कृति और हमारी पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है. हर साल इस मौसम में लगभग हर गांव में संतरे की खेती होती है. यही वजह है कि इस फेस्टिवल का नाम बड़े सम्मान के साथ ‘ऑरेंज फेस्टिवल’ रखा गया है. यहां सिक्किम का जी आई टैग वाला संतरा भी लोगों के लिए उपलब्ध है.
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