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Doka Mutton Recipe: बारिश से मिथिलांचल में डोका (घोंघा) की भरमार हो जाती है. ऐसे में नॉनवेज प्रेमियों की बल्ले-बल्ले रहती है. 300-350 रुपये किलो में बिकने वाला यह डोका मटन की तरह बनता है. लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों में भी फायदेमंद माना जाता है.
मधुबनी: लगातार हो रही बारिश ने नॉनवेज प्रेमियों की बल्ले बल्ले कर दी है. मिथिलांचल में लोग डोका बड़े चाव से खाते हैं और ये अभी खेतों में पानी भरने से ज्यादा दिखाई दे रहा है. यहां इसे दो तरीके से लोग खाते हैं, एक मटन बनाकर और दूसरा भूनकर. इसका स्वाद बेहद ही लाजवाब होता है. ऐसे में आइये जानते हैं कि लोग डोका कैसे बनाकर खाते हैं. आइये जानते हैं इसकी मिथिला में आसान रेसिपी.
जानें डोका मटन की रेसिपी
मिथिलांचल के किसी भी क्षेत्र में अगर आप होंगे तो इन दिनों लगातार बारिश हो रही है. डोका ( घोंघा की एक प्रजाति) (snail) आपको कहीं भी आसानी से बाजार में मिल जाएगी. हालांकि अब इसकी कीमत महंगी हो गई है. यह रुपये 300 से 350 रुपये किलो मिल रहा है. इसे पकाने का तरीका भी ठीक मटन बनाने जैसा ही है. इसका 2 हिस्सा होता है, एक हिस्सा थोड़ा सा हार्ड होता है, जिसका मटन बनता है. इसे लोग बड़े ही आनंद से खाते हैं.
बता दें कि मटन बनाने के लिए आपको प्याज ,हरी मिर्च ,लहसुन, अदरक चाहिए. प्याज को वैसे ही कट करते हैं और फिर सब घरेलू , हल्दी, मिर्च, धनिया, नमक, गरम मसाला को डोका में मिक्स करते हैं. उसके बाद फिर आप किसी भी बर्तन में या कुकर में बना सकते हैं. इसके बाद उसमें तेल, जीरा, लाल सूखी मिर्च जैसे ही चटक जाता है. उसमें आप पूरा मिक्स की हुई डोका का मटन डाल दीजिए और फिर धीमी आंच पर उसको अच्छे से फ्राई करना होता है. जैसे ही वह फ्राई हो जाता है, उसमें हल्का सा आपका ग्रेवी अपने अनुसार दे सकते हैं और अगर कुकर में पका रहे हैं तो 3-4 सिटी लगाना होता है. हालांकि कढ़ाई में भी इसे बनाते हैं तो स्वाद और बढ़िया होता है. थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन यह मटन की तरह टेस्टी लगता है.
स्वाद होता है लाजवाब, कैंसर के इलाज में है लाभदायक
डोका मटन बनाने में बहुत सारे लोग आलू का भी इस्तेमाल करते हैं. जहां आलू के छिलके को उतारकर कट करके डालते हैं ताकि स्वाद लाजवाब आए. मिथिलांचल के लोग इन दिनों इसे खूब खाते हैं, इसका स्वाद भी बहुत अच्छा होता है और सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है. डोका को लेकर लोग कहते हैं कि यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी फायदा करता है. इसके साथ ही बॉडी को गर्म रखता है.
इन दिनों डोका कहीं भी जहां जल जमाव होता है. वहां आसानी से मिथिला में मिल जाता है. इसे शुद्ध मिट मानते है ,क्योंकि यह सिर्फ और सिर्फ मिट्टी और पानी में रहता है और मिट्टी ही खाता है. तालाब के किनारे या फिर खेत में जैसे ही थोड़ा पानी हो मेड के किनारे कीचड़ में डोका होता है और यह शुद्ध माना जाता है. इसका मटन पकाकर मिथिला क्षेत्र में लोग खूब खाते हैं.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें

