भारतीय स्ट्रीट फूड की बात हो और कचौरी का नाम न आए, ऐसा हो ही नहीं सकता. देश के अलग-अलग हिस्सों में कचौरी के कई स्वाद मिलते हैं, लेकिन राजकचोरी और जोधपुरी कचौरी सबसे लोकप्रिय विकल्पों में गिनी जाती हैं. देखने में भले ही दोनों एक जैसी लगें, लेकिन इनके स्वाद, बनाने के तरीके और पोषण मूल्य में काफी अंतर होता है. आइए जानते हैं दोनों के बीच का फर्क और सेहत के लिहाज से कौन-सी बेहतर मानी जा सकती है.
क्या है राजकचोरी?
राजकचोरी को अक्सर “कचौरी की चाट” भी कहा जाता है. यह आकार में बड़ी, कुरकुरी और फूली हुई होती है. इसके अंदर उबले आलू, मूंग, चने, दही, हरी चटनी, मीठी चटनी, सेव, अनार और कई तरह के मसाले डाले जाते हैं. ऊपर से दही और चटनियों की परत इसे बेहद स्वादिष्ट बना देती है.
राजकचोरी का स्वाद खट्टा, मीठा और तीखा तीनों का मिश्रण होता है. यह एक तरह से संपूर्ण चाट डिश है, जिसे स्नैक या हल्के भोजन के रूप में खाया जाता है.
क्या है जोधपुरी कचौरी?
जोधपुरी कचौरी, जिसे अक्सर प्याज कचौरी या मसाला कचौरी भी कहा जाता है, राजस्थान के जोधपुर की प्रसिद्ध डिश है. इसमें मैदा की परत के अंदर मसालेदार प्याज, दाल या अन्य भरावन भरी जाती है और फिर इसे डीप फ्राई किया जाता है.
इसका स्वाद तीखा और मसालेदार होता है. इसे आमतौर पर हरी चटनी या इमली की चटनी के साथ खाया जाता है. जोधपुरी कचौरी अपेक्षाकृत अधिक भारी मानी जाती है क्योंकि इसमें भरी गई स्टफिंग और तलने की प्रक्रिया से कैलोरी बढ़ जाती है.
दोनों में मुख्य अंतर
राजकचोरी एक चाट आधारित डिश है जिसमें दही, चने, अंकुरित दालें और विभिन्न टॉपिंग्स शामिल होती हैं, जबकि जोधपुरी कचौरी मुख्य रूप से भरावन वाली तली हुई कचौरी है. राजकचोरी का स्वाद कई फ्लेवर का मिश्रण होता है, वहीं जोधपुरी कचौरी अधिक मसालेदार और तीखी होती है.
इसके अलावा राजकचौरी में दही और दालों के कारण कुछ मात्रा में प्रोटीन और पोषक तत्व भी मिल जाते हैं, जबकि जोधपुरी कचौरी में तेल और कार्बोहाइड्रेट की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है.
सेहत के लिए कौन है बेहतर?
यदि दोनों का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए तो कोई बड़ी समस्या नहीं होती, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से राजकचोरी अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प मानी जा सकती है. इसमें दही, चने और अंकुरित सामग्री होने के कारण कुछ पोषण भी मिलता है. हालांकि इसमें भी चटनी, सेव और तले हुए हिस्से के कारण कैलोरी कम नहीं होती.
दूसरी ओर, जोधपुरी कचौरी अधिक तली हुई और ऑयली होती है, इसलिए वजन नियंत्रित रखने वाले लोगों, हृदय रोगियों या हाई कोलेस्ट्रॉल से परेशान लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में करना चाहिए.

