Friday, November 6, 2026
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चार पीढ़ियों से नहीं बदला स्वाद, अलसी के तेल में तैयार कोटा का यह फेमस नमकीन


कोटा. दिवाली का त्योहार हो और मिठाइयों की बात न हो, ऐसा भला कैसे हो सकता है! त्योहारों की रौनक मिठाइयों के बिना अधूरी है. देश के हर शहर की कोई न कोई ऐसी खास मिठाई या नमकीन होती है, जो उसकी पहचान बन जाती है. एजुकेशन सिटी कोटा की पहचान भी एक ऐसे ही अनोखे स्वाद से जुड़ी है, जिसे यहां के लोग कड़के सेव के नाम से जानते हैं. अलसी के तेल में तैयार होने वाले तीखे, चटपटे और कुरकुरे कड़के सेव का जायका ऐसा है कि एक बार खाने वाला इसे भूल नहीं पाता.

कोटा में मिठाई और नमकीन की बात हो तो इन सेव का जिक्र जरूर होता है. खास बात यह है कि बदलते दौर और बाजार में नए स्वादों की आमद के बावजूद इस पारंपरिक जायके को मोहन जी की चौथी पीढ़ी आज भी संजोए हुए है. स्वाद के साथ इस दुकान की अपनी विरासत और ग्राहकों की दिलचस्प कहानियां भी हैं. आइए, देखते हैं संवाददाता हिमांशु मित्तल की कोटा से यह खास रिपोर्ट.

अलसी के तेल में तैयार होता है खास स्वाद

कोटा के कड़के सेव की सबसे बड़ी खासियत इन्हें बनाने का 100 साल से भी अधिक पुराना पारंपरिक तरीका है. जहां बाजार में ज्यादातर नमकीन अलग-अलग तरह के तेलों में तैयार की जाती है, वहीं यहां अलसी के तेल का इस्तेमाल इस स्वाद को खास बनाता है. तीखापन, मसालों का चटपटापन और कुरकुरापन इन सेव को दूसरी नमकीन से अलग पहचान देते हैं. यही वजह है कि इनका स्वाद सिर्फ कोटा तक सीमित नहीं है, बल्कि बाहर से आने वाले लोग भी इन्हें अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं.

चार पीढ़ियों से कायम है स्वाद की विरासत

किसी भी पारंपरिक व्यंजन की असली पहचान उसका स्वाद और उसे बनाने का तरीका होता है. मोहन जी की चौथी पीढ़ी भी इसी परंपरा को आगे बढ़ा रही है. पीढ़ियां बदल गईं, लोगों की पसंद में बदलाव आया और बाजार में नमकीन की कई नई किस्में आ गईं, लेकिन कड़के सेव का पारंपरिक स्वाद आज भी बरकरार है. पुराने ग्राहकों के लिए यह सिर्फ नमकीन नहीं, बल्कि बचपन और पुरानी यादों से जुड़ा जायका है. वहीं नई पीढ़ी भी इसके तीखे और कुरकुरे स्वाद की मुरीद हो रही है.

दिवाली पर बढ़ जाती है मांग

दिवाली जैसे त्योहारों पर घरों में मिठाइयों के साथ नमकीन की खरीदारी भी खूब होती है. मेहमानों की आवभगत हो या रिश्तेदारों को कुछ खास खिलाने की बात, कोटा के कड़के सेव लोगों की पसंद में शामिल रहते हैं. त्योहार के दिनों में इनकी मांग बढ़ जाती है. स्थानीय लोगों के लिए यह नमकीन कोटा की पहचान और स्वाद की विरासत है. बाहर से आने वाले पर्यटक और कोचिंग के सिलसिले में शहर में रहने वाले विद्यार्थी भी इस खास जायके का अनुभव लेना पसंद करते हैं. कोटा के कड़के सेव सिर्फ एक नमकीन नहीं, बल्कि शहर की खानपान संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा का हिस्सा हैं. अलसी के तेल का खास इस्तेमाल, तीखा स्वाद और कुरकुरा अंदाज इन्हें अलग बनाता है. यही वजह है कि दिवाली की मिठास के बीच कोटा के इन कड़के सेव का चटपटा स्वाद भी लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है.



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