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जंइन दिनों तराई के इलाकों में पारा आसमान छू रहा है. गर्मी के इस मौसम ने जहां इंसानों को बेहाल कर रखा है, वहीं वन्यजीवों के लिए भी पानी की तलाश चुनौतीपूर्ण हो गई है. लेकिन पीलीभीत टाइगर रिजर्व की भौगोलिक बनावट इसे बाकी जंगलों से अलग और खास बनाती है. यहां प्राकृतिक जल स्रोतों की भरमार है. सबसे खास बात यह है कि शारदा मुख्य नहर इस टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच से होकर गुजरती है.
पीलीभीतः जंगल की सैर पर निकलने वाले हर पर्यटक के मन में बस एक ही ख्वाहिश होती है कि काश एक बार बाघ के दीदार हो जाएं. लोग हजारों रुपए खर्च करते हैं, दूर-दराज के नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व की खाक छानते हैं, लेकिन अक्सर हाथ लगती है तो बस मायूसी. असल में बाघ स्वभाव से बेहद शर्मीला और खुद को छिपाकर रखने वाला जानवर है. उसकी यही खूबी उसे जंगल का सबसे खतरनाक शिकारी बनाती है. लेकिन अगर आप भी उन लोगों में शामिल हैं जिनकी बाघ देखने की हसरत अब तक अधूरी है, तो उत्तर प्रदेश का पीलीभीत टाइगर रिजर्व इन दिनों आपके लिए किसी जन्नत से कम नहीं है.
जंगल के बीच से गुजरती है शारदा नहर
इन दिनों तराई के इलाकों में पारा आसमान छू रहा है. गर्मी के इस मौसम ने जहां इंसानों को बेहाल कर रखा है, वहीं वन्यजीवों के लिए भी पानी की तलाश चुनौतीपूर्ण हो गई है. लेकिन पीलीभीत टाइगर रिजर्व की भौगोलिक बनावट इसे बाकी जंगलों से अलग और खास बनाती है. यहां प्राकृतिक जल स्रोतों की भरमार है. सबसे खास बात यह है कि शारदा मुख्य नहर इस टाइगर रिजर्व के घने जंगलों के बीच से होकर गुजरती है. अक्सर अन्य पार्कों में बाघों को खोजने के लिए घंटों की मशक्कत करनी पड़ती है, लेकिन पीलीभीत में नजारा कुछ और ही है. जंगल का वह हिस्सा जहां से शारदा नहर गुजरती है, वही मुख्य सफारी रूट पर स्थित है. गर्मी बढ़ने के कारण बाघ और अन्य वन्यजीव पानी की तलाश में इन्हीं जलस्रोतों और नहर के किनारों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं. यही कारण है कि सफारी पर निकलने वाले पर्यटकों को इन दिनों बाघों की साइटिंग के लिए ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ रहा.
पीलीभीत टाइगर रिजर्व को मिल चुका है पुरस्कार
पीलीभीत टाइगर रिजर्व को अपनी बाघों की आबादी तेजी से दोगुना करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर TX2 पुरस्कार भी मिल चुका है. यहां का घना साल का जंगल और बीच से गुजरती नहर एक ऐसा प्राकृतिक सेट तैयार करती है जो फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए किसी सपने जैसा है. अगर आप भी जंगल के राजा को उसकी प्राकृतिक मस्ती में देखना चाहते हैं, तो अपना बैग पैक कीजिए और पीलीभीत का रुख करिए. यहां की ठंडी नहर की हवा और बाघों की दहाड़ आपकी ट्रिप को यादगार बनाने के लिए तैयार है. याद रहे, जंगल में बाघ आपको तभी दिखता है जब वो खुद चाहता है, और इन दिनों पीलीभीत के बाघ पर्यटकों से रूबरू होने के मूड में नजर आ रहे हैं.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

