Monday, October 5, 2026
Homeराज्यबिहारजमुई में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे बच्चे: मिट्टी के...

जमुई में पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे बच्चे: मिट्टी के गोलों में आम-जामुन के बीज डालकर बना रहे सीड बॉल; पत्तियों से खुद बनाते हैं खाद – Jamui News




जमुई में पर्यावरण संरक्षण का संदेश अब स्कूल की कक्षा से निकलकर जंगल और खाली पड़ी जमीन तक पहुंच रहा है। बरहट प्रखंड के कृत्यानंद मध्य विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हरियाली बढ़ाने के लिए अनोखी पहल शुरू की है। बच्चे मिट्टी के छोटे-छोटे गोले बनाकर उनमें आम, जामुन और नीम के बीज डालकर सीड बॉल तैयार कर रहे हैं। इसके बाद इन सीड बॉल को ऐसी जगहों पर डाला जा रहा है, जहां पेड़ों और हरियाली की कमी है। पेड़ों के नीचे से खुद बीज जुटाते हैं बच्चे स्कूल के दर्जनों बच्चे इस गतिविधि से जुड़े हैं। खास बात यह है कि सीड बॉल तैयार करने के लिए बीज बाजार से नहीं खरीदे जाते। बच्चे आसपास के गांवों और पेड़ों से खुद बीज इकट्ठा करके लाते हैं। जामुन, आम और नीम के पेड़ों के नीचे गिरे बीजों को चुनकर एकत्र किया जाता है। इसके बाद मिट्टी और खाद की मदद से बीज को सुरक्षित तरीके से सीड बॉल का रूप दिया जाता है। पत्तियों से तैयार खाद का भी इस्तेमाल विज्ञान शिक्षिका शोभा सिंह ने बताया कि बच्चों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के उद्देश्य से यह गतिविधि शुरू की गई है। आसपास के पेड़ों से मिलने वाले बीज बच्चे खुद इकट्ठा करके लाते हैं। कुछ बीज शिक्षक भी उपलब्ध कराते हैं। उन्होंने बताया कि स्कूल में पेड़ों से गिरने वाली पत्तियों को गड्ढे में जमा कर कंपोस्ट खाद तैयार की जाती है। इसी खाद का इस्तेमाल सीड बॉल तैयार करने में किया जाता है। अनुकूल मौसम मिला तो बीज से बनेगा पौधा शिक्षिका के अनुसार, सीड बॉल तैयार करने के बाद बच्चों को इसे ऐसी जगहों पर रखने के लिए प्रेरित किया जाता है, जहां हरियाली कम है। अनुकूल परिस्थितियां मिलने पर मिट्टी में दबा बीज अंकुरित होकर पौधे का रूप ले सकता है। इससे बच्चों में प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है। बच्चों की छोटी पहल, बड़ा संदेश स्कूल के बच्चों का कहना है कि कई जगहों पर पेड़ों की संख्या कम है और पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। ऐसे स्थानों पर हरियाली बढ़ाने के लिए वे सीड बॉल के जरिए पेड़ उगाने की कोशिश कर रहे हैं। छोटी उम्र में बच्चों की यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ समाज को भी प्रकृति बचाने का संदेश दे रही है।



Source link

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments