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Udit Narayan Blockbuster Song : जिस धुन को डायरेक्टर ने पहली ही बार में खारिज कर दिया हो, उसी पर बना गाना अगर ब्लॉकबस्टर हो जाए तो इसे चमत्कार ही कहा जाएगा. बॉलीवुड में इस तरह का करिश्मा कई बार हो चुका है. बॉलीवुड के एक संगीतकार के साथ ऐसा ही वाकिया हुआ. उसकी जिस धुन को सबने रिजेक्ट किया, उसी पर बना गाना ब्लॉकबस्टर निकला. फिल्म ने भी बॉक्स ऑफिस पर परचम लहराया. कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए. इस गाने में उदित नारायण की खनकती आवाज थी. यह गाना इस फिल्म की पहचान बन गया. इतना ही नहीं, डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने इसी रिजेक्ट गाने की दम पर 800 करोड़ कमाए. वो फिल्म कौन सी थी, वो रिजेक्टेड धुन कौन सी थी, आइये जानते हैं…….
बॉलीवुड के जितने भी ब्लॉकबस्टर गाने हैं, उनके बनने की कहानी उतनी ही दिलचस्प है. कई ब्लॉकबस्टर गाने तो उन धुनों पर बनाए गए जिन्हें डायरेक्टर-प्रोड्यूसर ने रिजेक्ट कर दिया था. ऐसा ही कुछ वाकिया 2001 में रिलीज हुई सनी देओल की फिल्म ‘गदर : एक प्रेम कथा’ के साथ हुआ था. गदर फिल्म हर नजरिये से परफेक्ट थीं. गीत-संगीत, कहानी-डायलॉग, सिनेमेटोग्राफी सब कुछ परफेक्ट था. पूरी फिल्म में एक गाना बार-बार आता है. वो गाना था : उड़ जा काले कावां तेरे मुंह विच खंड पावां. यह गाना फिल्म में खुशी-गम-दर्द-बिछुड़न हर थीम पर बजता है. दिलचस्प बात यह है कि इस गाने की ट्यून को डायरेक्टर अनिल शर्मा ने पहली ही नजर में रिजेक्ट कर दिया था. फिर यह गाना फिल्म में कैसे आया, आइये जानते हैं पूरी कहानी………

‘गदर : एक प्रेमकथा’ फिल्म की कहानी भारत-पाक विभाजन, लव स्टोरी एक्शन पर थी. फिल्म 15 जून 2001 को रिलीज हुई थी. वैसे शुरुआत में इस फिल्म को दिलीप कुमार के साथ बनाया जाना था. डायरेक्टर अनिल शर्मा कश्मीरी पंडितों के पलायन पर एक फिल्म बनाना चाहते थे. उन्होंने स्क्रिप्ट राइटर शक्तिमान तलवार से फिल्म का सब-प्लॉट लिखने को कहा. जब सब प्लॉट बनकर तैयार हुआ तो अनिल शर्मा ने इसी पर फिल्म बनाने का मन बनाया. इस तरह से फिल्म में सनी देओल की एंट्री हुई. फिल्म का म्यूजिक उत्तम सिंह ने कंपोज किया था. गाने गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे.

अनिल शर्मा ने फिल्म के म्यूजिक के लिए संगीतकार उत्तम सिंह से संपर्क किया. उत्तम सिंह पूरे डेढ़ माह तक परेशान रहे लेकिन धुन नहीं बना पाए. एक दिन जब वो पार्क में टहल रहे थे तब अचानक उनके मन में ‘उड़ जा काले कावां’ की धुन आई थी. उन्होंने धुन रिकॉर्ड की और अनिल शर्मा को भेज दी. धुन में पंजाब के फॉक सॉन्ग का टच था, उसकी खुशबू थी. उत्तम सिंह ने डमी बोल लिखकर जब यह धुन अनिल शर्मा को सुनाई तो उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आई थी.
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अनिल शर्मा ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘फिल्म सबके सहयोग से बनती है. मैं जब गदर बना रहा था तो मुझे एक ऐसा गाना चाहिए था जो पूरी पिक्चर में चार-पांच बार आएगा. संगीतकार उत्तम सिंह ने मुझे एक धुन सुनाई. धुन डमी वर्डिंग के साथ सुनाई थी. कई बार डमी वर्डिंग के साथ जब आपको धुन सुनाते हैं तो आपको धुन समझ नहीं आती. मुझे धुन कुछ खास नहीं लगी. मैं घर आया और कैसेट अपनी वाइफ को सुनाई. वाइफ को म्यूजिक का ज्ञान है. उन्होंने शास्त्रीय संगीत सीखा हुआ है. वो बोलीं कि यह गाना छोड़ना नहीं. यह गाना बहुत बड़ा हिट है. मैंने कहा कि अभी तुम मेरे घर में नई-नई ब्याह करके कलकत्ता से आई हो, आपको सिनेमा के बारे में कुछ पता नहीं है. ये जीरो गाना है, बिल्कुल नहीं चलेगा.’

उन दिनों गीतकार आनंद बख्शी विदेश गए हुए थे. जब वो लौटकर आए तो संगीतकार उत्तम सिंह और डायरेक्टर अनिल शर्मा उनके घर पहुंचे. अनिल शर्मा ने जब फिल्म की स्टोरी सुनाई तो बख्शी साहब बार-बार बाथरूम जा रहे थे. स्क्रिप्ट सुनने के बाद बख्शी साहब ने कहा था कि फिल्म ‘मुगल-ए-आजम’ साबित होगी. उन्होंने यह भी बताया कि वो बार-बार बाथरूम इसलिए जा रहे थे क्योंकि उन्हें रोना आ रहा था. वो अपने आंसू छुपाने के लिए ऐसा कर रहे थे.

अब बारी फिल्म के गाने की आई. आनंद बख्शी को संगीतकार उत्तम ने बिना वर्डिंग के धुन सुनाई. बख्शी साहब ने धुन सुनी. फिर बोले कि अभी तुम जाओ. मुझे इस फिल्म और धुन के साथ जीने दे. कल शाम चार बजे तुम मुझसे मिलना. दूसरे दिन जब बख्शी साहब से मिले तो उन्होंने उसी गाने के 3 मुखड़े बनाए थे. तीनों ही मुखड़े अच्छे थे. उन्होंने कहा कि तीसरा मुखड़ा फिल्म में होना चाहिए. इसका लास्ट सीक्वेंस सुनाता हूं, जब बच्चा धुन बजाता है और मां को होश आता है. बख्शी साहब गाते बहुत अच्छा है, इसलिए धुन उनके पास थी. उन्होंने गाना शुरू किया ‘उड़ जा काला कांवा तेरा……ओ घर आजा परदेसी, तेरी-मेरी एक जिंदड़ी…’ जैसे ही उन्होंने ‘ओ घर आजा परदेसी…’ सुनाया, मुझे पसंद आ गया. उन्होंने इस गाने के 16 अंतरे लिखे थे.’

डायरेक्टर अनिल शर्मा ने इंटरव्यू में बताया था, ‘मुझे ‘उड़ जा काले कांवा’ की धुन इसलिए पसंद नहीं आ रहा थी क्योंकि वो मेरी फिल्म की सिचुएशन के हिसाब से सही नहीं थी, इसलिए मैं बार-बार अटक रहा था. मैं धुन नहीं सुन रहा था. उस दिन मुझे सीख मिली कि हमें धुन सुनना चाहिए. वर्डिंग तो गीतकार सिचुएशन के हिसाब से लिख देगा. जैसे ही आनंद बख्शी ने गाया कि ‘घर आजा परदेसी’ मुझे लगा कि बच्चा मां को मिल गया. टक से मेरा दिमाग ठनका. अगर मैं उनके पहले मुखड़े को ओके कर देता तो शायद कभी भी ‘उड़ जा काले कावां’ गाना नहीं आता.’ इस गाने को उदित नारायण ने अपनी खनकती आवाज में गाया. उन्होंने गाने का सैड वर्शन भी गाया और इसे ‘कालजयी’ गाना बना दिया.

‘उड़ जा काले कावां’ गाना कितना बड़ा हिट साबित हुआ, आप सभी जानते हैं. इस गाने की पॉप्युलैरिटी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि गदर 2 में भी यही सॉन्ग हमें बार-बार पूरी फिल्म में सुनने को मिलता है. इसी तरह फिल्म का ‘हैंडपंप’ वाला सीन आइकॉनिक बन गया. पूरी यूनिट को इस सीन पर ऐतराज था. पूरे तीन घंटे तक शूटिंग रुकी रही थी. गदर और गदर 2 दोनों फिल्मों ने इतिहास रच दिया. करीब 800 करोड़ का वर्ल्डवाइड किया. दोनों ही फिल्में ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुईं.

