तिलवाड़ा में संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर और श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर (श्री नागणेच्या माताजी) सहित पंच मंदिरों के प्रस्तावित प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की पहली बैठक हुई। यह बैठक श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया परिसर में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के अध्यक्ष और संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी के 25वें गादीपति रावल किशन सिंह जसोल ने की। 2 सिंतबर 2027 को होगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव
बैठक में रावल किशन सिंह जसोल ने घोषणा की कि पंच मंदिरों का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 2 सितंबर 2027 को आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर सहित पंच मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा संपूर्ण मालाणी और राठौड़ वंश की आस्था, संस्कृति तथा गौरव से जुड़ा एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने सभी समाजबंधुओं से इस आयोजन में तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान किया। रावल किशन सिंह जसोल ने राठौड़ वंश के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राठौड़ वंश के पूर्वजों, राष्ट्रकूटों ने एलोरा के विश्वविख्यात कैलाश मंदिर का निर्माण कराया था, जो भगवान कैलाशपति शंकर को समर्पित है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उस समय अनेक गुफाओं का निर्माण भी किया गया, जो विभिन्न आस्थाओं के संरक्षण और सम्मान की परंपरा को दर्शाते हैं। ‘ऐतिहासिक विरासतें गौरवशाली इतिहास की साक्षी’
उन्होंने कहा कि मेवानगर स्थित नाकोड़ा, खेड़ और मालाणी क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासतें आज भी गौरवशाली अतीत की साक्षी हैं। उन्होंने विशेष रूप से खेड़ मंदिर का जिक्र किया, जो एक हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन है और क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर कहा कि पंच मंदिरों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है और समय पर पूरा हो जाएगा, किंतु संपूर्ण राठौड़ वंश एवं आस्थावान समाज तक महोत्सव का निमंत्रण पहुंचाने के लिए पर्याप्त समय आवश्यक है। इसी दृष्टि से पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव भादवा सुदी बीज, 02 सितम्बर 2027 को आयोजित करने का निर्णय लिया गया, ताकि देशभर में समाजबंधुओं तक आमंत्रण पहुंचाया जा सके। अपने संबोधन में रावल किशन सिंह जसोल ने संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी, श्री जगमाल जी, श्री वीरमदे जी एवं श्री जेतमाल जी जैसे वीर पूर्वजों का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने एकजुट होकर आक्रमणकारियों का सामना किया और अपनी वीरता से इस क्षेत्र की रक्षा की। इतिहास में वर्णित पांच महत्वपूर्ण युद्धों में इन वीरों ने मिलकर पराक्रम का परिचय दिया, जिसके कारण ये धरती अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान बनाए रखने में सफल रही। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में मालाजाल, तिलवाड़ा में निर्माणाधीन संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर इतिहास, शौर्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणास्रोत बनेगा। संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी का व्यक्तित्व संत, यशस्वी योद्धा, कुशल शासक और धर्मरक्षक के रूप में बहुआयामी रहा है। अपने जीवनकाल में उन्होंने पांच विजयी युद्धों के माध्यम से समाज और सनातन संस्कृति की रक्षा की तथा लोककल्याण, पराक्रम और जनसेवा के आदर्श स्थापित किए। उनका जीवन आज भी समाज को साहस, धर्मनिष्ठा और लोकमंगल की प्रेरणा प्रदान करता है। रावल किशन सिंह ने कहा कि भारत का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रहा है। विभिन्न क्षेत्रों के वीर शासकों, संतों और लोकनायकों ने अपने त्याग, बलिदान और संघर्ष से राष्ट्र एवं संस्कृति की रक्षा की। राजस्थान की धरती पर मेवाड़, मारवाड़ और मालाणी सहित अनेक क्षेत्रों ने इतिहास निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि समाज तभी प्रगति कर सकता है, जब वो अपने इतिहास, संस्कृति और पूर्वजों के योगदान को जाने और उस पर गर्व करे। युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने तथा सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध होगा। संस्थान ट्रस्ट सदस्य हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी की लोककल्याणकारी परंपराओं, आदर्शों एवं प्रेरणादायी जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, संगठन, सांस्कृतिक चेतना एवं ऐतिहासिक विरासत को सुदृढ़ बनाने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का सशक्त बनाने का महाअभियान’
हरिशचंद्र सिंह जसोल ने बताया कि पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समाज को एक सूत्र में जोड़ने, नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने का एक महाअभियान है। निर्माणाधीन पंच मंदिरों में विशेष रूप से संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर एवं श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर भविष्य में राठौड़ वंश की आस्था, श्रद्धा और गौरव के प्रमुख तीर्थस्थलों के रूप में स्थापित होंगे। हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि ये मंदिर राठौड़ वंश के गौरवशाली इतिहास, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक बनेंगे। इन तीर्थों के माध्यम से समाज की नई पीढ़ी अपने इतिहास, आदर्शों और पूर्वजों के योगदान से प्रेरणा प्राप्त करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का ये ऐतिहासिक अवसर संपूर्ण समाज के लिए गौरव का विषय बनेगा। इससे राठौड़ वंश की गौरवगाथा को नई पहचान मिलेगी, धार्मिक चेतना को बल मिलेगा तथा सनातन धर्म के प्रति आस्था और अधिक प्रगाढ़ होगी। उन्होंने देशभर में निवासरत राठौड़ समाज, श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों से इस ऐतिहासिक आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। प्रबंधन समिति सदस्य गिरधर सिंह कोटड़ा ने मालाणी की धार्मिक परंपराओं एवं लोक आस्था की गौरवशाली विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये क्षेत्र सदियों से संतों, वीरों और लोकदेवताओं की तपोभूमि रहा है। उनके अनुसार पंच मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी और समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह परिसर भविष्य में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। जनसंपर्क अभियान चलाने का सुझाव
मदन सिंह राजमथाई ने कहा कि संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी, श्री राणी रूपादे जी एवं श्री चक्रेश्वरी माता के प्रति समाज की अगाध श्रद्धा इस महोत्सव को अभूतपूर्व स्वरूप प्रदान करेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक परिवार, गांव एवं समाजबंधु तक महोत्सव का संदेश पहुंचाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह आयोजन समाज की सामूहिक शक्ति, संगठन क्षमता एवं धार्मिक आस्था का भव्य उदाहरण बनेगा। मांगू सिंह विशाला ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन मालाणी क्षेत्र के साथ-साथ देशभर में निवासरत राठौड़ वंश के लोगों को एक मंच पर जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि समाज की एकता, संगठन और पारस्परिक संवाद को सुदृढ़ बनाने के लिए ऐसे अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने युवाओं से महोत्सव की तैयारियों में अग्रणी भूमिका निभाने तथा समाज के प्रत्येक परिवार तक इस ऐतिहासिक आयोजन का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा कि राठौड़ वंश की गौरवशाली परंपराओं एवं सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सामाजिक जीवन में अपने आराध्य एवं पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का भाव निरंतर प्रकट होना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राठौड़ वंश के पुरुष जब आपस में मिलें तो “जय श्री रावल मल्लीनाथ जी री” तथा महिलाएं आपस में मिलें तो “जय श्री राणी रूपादे जी री” कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करें। उनके अनुसार यह परंपरा समाज में अपने गौरवशाली इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने इस पहल का शुभारंभ इसी बैठक से करने का आह्वान किया, जिसका उपस्थित समाजबंधुओं ने समर्थन किया। बाल सिंह मारूड़ी ने कहा कि समाज की एकता एवं सहभागिता ही इस महोत्सव की सबसे बड़ी शक्ति होगी। उन्होंने गांव-गांव, ढाणी-ढाणी तक महोत्सव का संदेश पहुंचाने तथा प्रत्येक परिवार को इस ऐतिहासिक आयोजन से जोड़ने का आह्वान किया। साथ ही विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सामूहिक सहयोग से यह महोत्सव ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय बनेगा। प्रबंधन समिति सदस्य स्वरूप सिंह खारा ने अपने उद्बोधन में संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी के आदर्शों का स्मरण करते हुए कहा कि उनके जीवन से समाज को त्याग, सेवा, धर्मनिष्ठा एवं लोककल्याण की प्रेरणा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव धर्म, संस्कृति एवं सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध होगा तथा समाज में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सुदृढ़ करेगा। प्रबंधन समिति सदस्य एवं पूर्व विधायक पोकरण शैतान सिंह ने कहा कि श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर एवं संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा संपूर्ण राठौड़ वंश के लिए गौरव और आस्था का ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस महोत्सव को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने के लिए व्यापक जनसंपर्क, प्रचार-प्रसार एवं समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से इस महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया। प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समिति का गठन
बैठक में संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल की अध्यक्षता में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समिति का गठन भी किया गया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि मालाणी क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों की छत्तीशी कौम, विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं देशभर में निवासरत समाजबंधुओं तक महोत्सव का संदेश पहुंचाया जाएगा तथा समाज के प्रत्येक परिवार को इस ऐतिहासिक आयोजन से जोड़ा जाएगा। साथ ही हर साल की भांति भादवा बीज की पूर्व संध्या 12 सितम्बर 2026 को श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया में भव्य रात्रि जागरण तथा 13 सितम्बर 2026 को श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, मालाजाल तिलवाड़ा में ध्वजारोहण एवं महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। सर्व समाज से इन कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आह्वान किया गया। बैठक में मालाणी, मारवाड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से पधारे राठौड़ समाज के प्रबुद्धजन, समाज प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को ऐतिहासिक, भव्य एवं सर्वसमाज की सहभागिता वाला आयोजन बनाने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किए।
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