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दिवाली खुशियों और मिठास का त्योहार है, लेकिन मिठाई खरीदने में जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। साफ-सुथरी दुकान से खरीदारी करें, पैक्ड मिठाई की तारीख और जानकारी जांचें तथा रंग, गंध या बनावट में गड़बड़ी लगे तो उसे खाने से बचें। अगर मिलावट का संदेह हो, तो खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना दें। थोड़ी सी सावधानी त्योहार की खुशियों को बनाए रखने में मदद कर सकती है.
दिवाली पर मिठाई खरीदने से पहले हो जाएं सावधान! कहीं आप भी तो नहीं खा रहे मिलावटी मिठाई? रंग, खुशबू और स्वाद से ऐसे करें पहचान
दिवाली का त्योहार हो और घर में मिठाइयां न आएं, ऐसा भला कैसे हो सकता है। कोई मेहमानों के लिए मिठाई खरीदता है, तो कोई रिश्तेदारों और दोस्तों को मिठाई का डिब्बा उपहार में देता है। त्योहार के दिनों में बाजारों में बर्फी, पेड़ा, लड्डू, रसगुल्ले और मावे से बनी दूसरी मिठाइयों की मांग बढ़ जाती है. इसी दौरान मिलावट और खराब मिठाई बिकने का खतरा भी रहता है. ऐसे में मिठाई खरीदते समय थोड़ी सी सावधानी जरूरी है। मिठाई का रंग, उसकी बनावट और महक देखकर कुछ गड़बड़ियों का अंदाजा लगाया जा सकता है.
मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाला दूध और मावा उनकी गुणवत्ता के लिए सबसे अहम है. बर्फी, पेड़ा, कलाकंद और दूसरी दूध से बनी मिठाइयों को खरीदते समय उनकी बनावट और महक पर ध्यान देना चाहिए. अगर मिठाई से बासी या असामान्य गंध आ रही है, उस पर फफूंद दिखाई दे रही है या उसका रंग और बनावट बदली हुई लग रही है, तो उसे खरीदने से बचें.
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Local18 से बातचीत में डॉक्टर अनिल पटेल बताते हैं कि खराब या मिलावटी मिठाई खाने से सेहत पर बुरा असर पड़ सकता है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों की मांग बढ़ने पर गुणवत्ता को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. उन्होंने सलाह दी कि मिठाई में कोई असामान्य गंध, स्वाद या बनावट नजर आए, तो उसे खाने से बचें. खास बात यह है कि केवल स्वाद सामान्य होने से मिठाई के शुद्ध होने की गारंटी नहीं मिलती. कुछ मिलावट ऐसी भी होती है, जिसे पहचानने के लिए प्रयोगशाला जांच की जरूरत पड़ती है.
दुकानों में मिठाइयों को आकर्षक दिखाने के लिए कई बार उन पर चमकीले रंगों और सजावट का इस्तेमाल किया जाता है। मिठाई खरीदते समय देखें कि उसका रंग असामान्य रूप से गहरा या भड़कीला तो नहीं है। अगर मिठाई पर रंग की परत दिखाई दे या उसे छूने पर हाथ में रंग लगने लगे, तो सावधानी बरतें.हालांकि, सिर्फ चमकदार रंग देखकर मिठाई को मिलावटी घोषित नहीं किया जा सकता. कुछ मिठाइयों में नियमानुसार इस्तेमाल किए गए खाद्य रंग भी हो सकते हैं। इसलिए रंग के साथ दुकान की साफ-सफाई, मिठाई को रखने का तरीका और उसकी ताजगी पर भी ध्यान
मिठाई खरीदते समय उसकी खुशबू पर ध्यान देना भी जरूरी है. ताजा मिठाई में इस्तेमाल होने वाली सामग्री के अनुसार सामान्य महक आती है, जबकि खराब होने पर उसमें बासी या खट्टी गंध आ सकती है। इसी तरह मिठाई में असामान्य कड़वापन, खट्टापन या दूसरा अजीब स्वाद महसूस हो, तो उसे खाना बंद कर दें.ध्यान रखें कि संदिग्ध मिठाई को चखकर जांचना सुरक्षित तरीका नहीं है। यदि उसकी गंध, रंग या बनावट देखकर शक हो, तो उसे मुंह में डालने के बजाय खरीदने से बचें.
दिवाली पर कई लोग डिब्बाबंद मिठाइयां खरीदते हैं. ऐसी मिठाइयां लेते समय पैकेट पर लिखी जानकारी जरूर पढ़ें. निर्माण की तारीख, उपयोग की अंतिम तारीख, सामग्री की जानकारी और पैकेट की सील जांचें। पैकेट फूला हुआ हो, खुला हो या उस पर जरूरी जानकारी स्पष्ट न हो, तो उसे न खरीदें.
मिठाइयों पर लगा चांदी का वर्क भी कई बार चर्चा में रहता है. बाजार में चांदी जैसे दिखने वाले दूसरे पदार्थों से बनी सजावट को लेकर लोगों के मन में सवाल उठते हैं। लेकिन वर्क को उंगली से रगड़कर या उसके मुड़ने के तरीके से उसकी शुद्धता की पक्की पहचान करना भरोसेमंद तरीका नहीं है.इसलिए केवल वर्क देखकर मिठाई की गुणवत्ता का फैसला न करें. बेहतर है कि मिठाई ऐसे विक्रेता से खरीदें, जो खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करता हो। मिठाई की शुद्धता पर गंभीर संदेह होने पर उसकी जांच अधिकृत प्रयोगशाला से ही कराई जा सकती है
मिठाई में मिलावट की पहचान के लिए इंटरनेट और सोशल मीडिया पर कई घरेलू तरीके बताए जाते हैं. इनमें मिठाई को पानी में घोलना, टिश्यू पेपर पर रगड़ना या उस पर आयोडीन डालकर रंग में बदलाव देखना शामिल है। लेकिन इन तरीकों से हर तरह की मिलावट की विश्वसनीय पहचान नहीं हो सकती.उदाहरण के लिए, आयोडीन से नीला या बैंगनी रंग आना स्टार्च की मौजूदगी का संकेत हो सकता है, लेकिन इसके लिए सही जांच प्रक्रिया और नमूने की जानकारी जरूरी है। इसी तरह पानी में मिठाई घुलने या रंग छूटने से अकेले यह साबित नहीं होता कि उसमें मिलावट
खराब या दूषित मिठाई खाने से पेट दर्द, उल्टी, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी समस्याएं हो सकती हैं. वहीं, खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित रंगों या अन्य हानिकारक पदार्थों की मिलावट होने पर स्वास्थ्य को गंभीर नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी परेशानी वाले लोगों के लिए खाद्य सुरक्षा का ध्यान रखना जरूरी है.

