Wednesday, June 3, 2026
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दीपावली से पहले सुनवाई… सिब्बल ने जब उमर खालिद के लिए SC में दी दलील


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Kapil Sibal; Umar Khalid Case: सुप्रीम कोर्ट में उमर खालिद केस पर सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने अपील की कि दीपावली से पहले सुनवाई कर ली जाए. कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है. सुनवाई की अगली तारीख 7 अक्टूबर तय की गई है.

दीपावली से पहले सुनवाई... सिब्बल ने जब उमर खालिद के लिए SC में दी दलीलकपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में उमर खालिद और अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर दीपावली से पहले सुनवाई की अपील की. (फाइल फोटो PTI)
नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को 2020 दिल्ली दंगों की तथाकथित बड़ी साजिश से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम पल आया. जब वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कोर्ट से अनुरोध किया कि मामले की अगली सुनवाई दीपावली से पहले कर ली जाए. यह अपील उमर खालिद, शरजील इमाम, गुलफिशा फातिमा और मीरान हैदर सहित अन्य आरोपियों की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान हुई.

सिब्बल ने कोर्ट से कहा कि ये लोग पिछले पांच साल से जेल में बंद हैं और हर बार सुनवाई टल जाने से न्याय मिलने में देरी हो रही है. उनका कहना था कि न्यायिक प्रक्रिया लंबी खिंचने से आरोपी लगातार जेल भुगत रहे हैं. जबकि संविधान उन्हें सुनवाई का अधिकार देता है. अदालत ने इस पर संज्ञान लेते हुए दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया और अगली तारीख सात अक्टूबर तय की.
कपिल सिब्बल ने क्या दी दलील

कपिल सिब्बल ने कोर्ट में कहा-

  • “दीपावली से पहले सुनवाई कर ली जाए.”
  • “मेरे मुवक्किल और अन्य आरोपी पांच साल से जेल में बंद हैं.”
  • “हर बार सुनवाई टल जाने से न्याय में देरी हो रही है.”
सिब्बल का कहना था कि मामले का जल्द निपटारा होना जरूरी है, क्योंकि लम्बे समय तक जेल में रहना आरोपी के अधिकारों का उल्लंघन है.

जानें पूरा मामला
यह मामला 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ा है, जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और 700 से अधिक घायल हुए. इस हिंसा को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के खिलाफ प्रदर्शनों से जोड़ा गया. उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य पर आरोप है कि उन्होंने हिंसा की “साजिश” रची.

इन आरोपियों पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत मामला दर्ज है. दिल्ली हाई कोर्ट ने 2 सितंबर को नौ आरोपियों, जिनमें उमर और शरजील भी शामिल हैं, की जमानत याचिका खारिज कर दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है. लेकिन इसे हिंसा का रूप नहीं लेने दिया जा सकता.

दिल्ली हाई कोर्ट ने क्या दिया था आदेश
दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि अनुच्छेद 19(1)(a) के तहत नागरिकों को बोलने और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन यह अधिकार पूर्ण नहीं है. यदि बिना किसी सीमा के विरोध प्रदर्शन की छूट दी जाए तो यह संवैधानिक ढांचे और कानून-व्यवस्था को नुकसान पहुंचा सकता है.

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Sumit Kumar

Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in News18 Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master’s degree in Journalism. Before working in News18 Hindi, …और पढ़ें

Sumit Kumar is working as Senior Sub Editor in News18 Hindi. He has been associated with the Central Desk team here for the last 3 years. He has a Master’s degree in Journalism. Before working in News18 Hindi, … और पढ़ें

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