Tuesday, August 11, 2026
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नगर निगम: खराब सड़कों को लेकर हाई कोर्ट सख्त, निगम परिषद की बैठक में भी हुआ हंगामा – Gwalior News




नगर निगम ने शहर में कैसी सड़कें बनाईं, अब इसकी जांच के लिए अब सड़कों की खुदाई होगी। हाईकोर्ट इसके लिए कमीशन नियुक्त करेगा। इसकी कमान एक अधिवक्ता के हाथ में होगी। तकनीकी टीम भी साथ रहेगी। कमीशन सड़कें खुदवाकर देखेगा कि निर्माण तय मापदंडों के मुताबिक हुआ था या नहीं। जांच के दौरान नगर निगम का कोई अधिकारी मौजूद नहीं रहेगा। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच ने सोमवार को कैलाश चंद अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई की। सिटी प्लानर सुरेश अहिरवार भी कोर्ट में उपस्थित हुए। उनके जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। आदेश में साफ लिखा कि सिटी प्लानर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद नगर निगम से सड़क निर्माण का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया गया। कोर्ट ने पिछले पांच साल में सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि का पूरा हिसाब मांगा है। निर्माण के समय सड़कों की जो माप ली गई थी, उसका रिकॉर्ड भी पेश करना होगा। कमीशन मौके पर जाकर सड़कें खोदेगा। इसके बाद देखा जाएगा कि निर्माण निर्धारित स्पेसिफिकेशन के मुताबिक हुआ था या नहीं। हालांकि कमीशन की जांच के दौरान नगर निगम के वकील गौरव मिश्रा निगम का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे। मामले में अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। इस तरीख को निगम को सड़क निर्माण का जुड़ा पूरा रिकॉर्ड को पेश करना होगा। साथ ही पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा पर चल रहे मुकदमे की प्रति भी देनी होगी। निगम का दावा- 65.30 किलोमीटर सड़कें ठीक निगम ने हाई कोर्ट में जो जवाब पेश किया, उसमें सड़कों को 4 श्रेणी में विभाजित किया। पहली- ठीक सड़कें। ऐसी 62 सड़कें (65.30 किलोमीटर) बताई गईं। इसी तरह 34 सड़कें (36.75 किलोमीटर) आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त बताई गईं। 24 सड़कें (28.05 किलोमीटर) क्षतिग्रस्त बताई, जबकि 9 ऐसी सड़कें हैं, जहां कार्य प्रगति पर है। यानी कि निगम के जिम्मे 129 सड़कें हैं, जिनकी कुल लंबाई 140.58 किलोमीटर है। भास्कर ने जब निगम की रिपोर्ट का रिएलिटी चेक किया तो कलई खुल गई। नागदेवता मंदिर से ढोलीबुआ का पुल निर्माण कार्य तक और तारागंज पुल नागदेवता मंदिर से आंग्रे पुल तक की रोड को ठीक बताया गया। जबकि यहां एक तरफ की सड़क का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है। दूसरी तरफ जर्जर सड़क को सही करने के लिए गिट्टी डाली दी गई है। इसके अलावा, कुछ स्थान पर मलबे से गड्ढे को भर दिया है। स्थानीय निवासी राजू जाटव ने बताया कि एलिवेटेड रोड बनाने का काम कर रही कंपनी से यहां गिट्टी डलवाई है। पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा का रिकॉर्ड भी तलब किया
सुनवाई में पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा का मामला भी सामने आया। मौजूदा सिटी प्लानर ने कोर्ट को बताया कि वर्मा रिश्वत लेते हुए ट्रैप हुए थे। उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल रहा है। वे निलंबित हैं और उनका मुख्यालय नगर निगम ग्वालियर है। हाईकोर्ट ने नगर निगम के वकील गौरव मिश्रा को वर्मा के खिलाफ चल रहे मुकदमे की प्रमाणित प्रति पेश करने के निर्देश दिए हैं। सड़कों पर समिति, होर्डिंग-गेंट्री पर जांच रिपोर्ट के बाद फैसला शहर की खराब सड़कों को लेकर सोमवार को जल वि​हार स्थित निगम परिषद की बैठक में हंगामा हुआ। पार्षदों ने सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर अधिकारियों को घेरा। बैठक में पार्षदों ने मोबाइल पर भास्कर में प्रकाशित खबर सड़कें टूटी और नालियां फूटीं, इधर भूमिपूजन के इंतजार…. का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद खराब सड़कों को लेकर हंगामा और बढ़ गया। पार्षद सुरेश सोलंकी और आशा चौहान ने आसंदी के पास धरना भी दिया। 16 एजेंडों वाली अभियाचित बैठक 217 दिन बाद खत्म हुई। सभापति मनोज सिंह तोमर ने कहा कि जिन कार्यों का भूमिपूजन नहीं हो पा रहा है, उनमें प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भूमिपूजन कराया जाए, अन्यथा 7 दिन में काम शुरू करा दिया जाए। महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने कहा कि पहले विधानसभा स्तर पर बैठकें होती थीं, लेकिन पार्षदों ने रुचि नहीं दिखाई। सभी तैयार हों तो फिर से ऐसी बैठकें कराई जा सकती हैं। पार्षद दीपक मांझी ने तत्कालीन जेडओ तनुजा वर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होंने मेरी मौलिक निधि से दूसरे वार्ड में काम करा दिए। इस पर सभापति ने इसकी जांच कराने को कहा। पार्षद गिर्राज कंसाना ने झांसी रोड और डीडी नगर, मोहित जाट ने जीवाजीगंज खराब रोड का मुद्दा उठाया। सुरेश सोलंकी ने कहा कि पार्षद आपस में उलझते हैं, इसका फायदा अधिकारी उठा रहे हैं। यह मुद्दे उठे, लेकिन समाधान नहीं इन पर हुए फैसले



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