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Gulgula Sweet Recipe: मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में खान-पान की अपनी अलग पहचान है और यहां बनने वाले पारंपरिक व्यंजन आज भी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं. बुरहानपुर जिले में भी कई ऐसे पारंपरिक पकवान हैं जिनका स्वाद लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है. इन्हीं में से एक है गुलगुला मिठाई जो गेहूं के आटे और गुड़ से तैयार की जाती है. निमाड़ की रसोई से निकला यह देसी स्वाद बुरहानपुर की खान-पान की संस्कृति को भी दर्शाता है. यही वजह है कि गुलगुला आज भी स्थानीय लोगों की पसंदीदा पारंपरिक मिठाइयों में शामिल है.
लोकल 18 की टीम को एक्सपर्ट महिला फूलाबाई ने जानकारी देते हुए बताया कि गुलगुला बनाने के लिए मुख्य रूप से गेहूं का जाड़ा आटा गुड़ और तेल की जरूरत होती है. इन साधारण सामग्री से तैयार होने वाली यह मिठाई स्वाद में बेहद खास होती है. पहले आटे और गुड़ को मिलाकर इसका मिश्रण तैयार किया जाता है.
इसके बाद इसे आकार देकर तेल में पकाया जाता है. तैयार होने के बाद गुलगुले बाहर से हल्के कुरकुरे और अंदर से नरम होते हैं. बुरहानपुर और निमाड़ क्षेत्र में गुलगुला सिर्फ एक मिठाई नहीं बल्कि पारंपरिक खान-पान का हिस्सा माना जाता है.
घरों में जब भी मेहमान आते हैं तो कई परिवार इसे बनाकर मेहमानों को परोसते हैं. खास बात यह है कि इसे बच्चे और बड़े सभी बड़े चाव से खाते हैं. ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों में गुलगुले को कई बार बड़े चावल जैसे स्थानीय भोजन के साथ भी खाया जाता है.
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वहीं परिवार के लोग यात्रा पर जाते समय भी इसे साथ लेकर जाते हैं. इसकी सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबे समय तक टिकने की क्षमता है. सही तरीके से तैयार और सुरक्षित रखने पर गुलगुला करीब सात दिनों तक खराब नहीं होता है. यही वजह है कि इसे सफर के लिए भी सुविधाजनक माना जाता है.
आज के दौर में जहां बाजार में तरह-तरह की आधुनिक मिठाइयां उपलब्ध हैं. वहीं, बुरहानपुर का गुलगुला अपनी पारंपरिक पहचान बनाए हुए है. गेहूं के आटे और गुड़ से बनने वाली यह मिठाई कम सामग्री में तैयार होकर भी स्वाद और परंपरा का अनोखा मेल पेश करती है.

