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Tata Sons IPO : टाटा संस के शीर्ष अधिकारी आगे की रणनीति और समयसीमा पर स्पष्टता के लिए जल्द ही आरबीआई के अधिकारियों से बैठक कर सकते हैं. अगर आरबीआई ने कोई अतिरिक्त ढील नहीं दी, तो टाटा संस को जल्द ही आईपीओ लाना पड़ सकता है.
आरबीआई ने टाटा संस को अपर लेयर की एनबीएफसी लिस्ट में रखा है.
नई दिल्ली. टाटा समूह की मूल कंपनी टाटा संस (Tata Sons) टाटा संस खुद को गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के दायरे से बाहर निकालकर शेयर बाजार में लिस्ट होने से बचना चाहती थी. लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने उसकी एनबीएफसी वाला दर्जा खत्मक करने की मांग खारिज कर दी. टाटा संस की इस मांग के खारिज होने के पीछे सबसे बड़ी वजह बना है पब्लिक फंड. मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भले ही टाटा संस खुद सीधे तौर पर पब्लिक फड न जुटाती हो, मगर उसकी समूह कंपनियों की पहुंच पब्लिक फंड तक है. जटिल क्रॉस-होल्डिंग के चलते टाटा संस अप्रत्यक्ष रूप से सार्वजनिक धन से गहराई से जुड़ी है. इसी एक तकनीकी अड़चन ने अब टाटा संस की लिस्टिंग के दरवाजे खोल दिए हैं.
टाटा समूह की कंपनियों के बीच शेयरों का ताना-बाना बेहद जटिल है. टाटा ट्रस्ट्स के पास टाटा संस की 66 फीसदी हिस्सेदारी ह. शापूरजी पालोनजी (SP) ग्रुप 18.4 फीसदी हिस्सेदारी के साथ सबसे बड़ा एकल स्टैक होल्डर है. बाकी का बड़ा हिस्सा समूह की ही विभिन्न लिस्टेड कंपनियों और व्यक्तिगत शेयरधारकों के पास है. टाटा संस भी इन सभी कंपनियों में नियंत्रक हिस्सेदारी रखती है. सूत्रों का कहना है कि आरबीआई ने माना है कि जब समूह की सहायक कंपनियां बैंक फाइनेंस, डिबेंचर या कमर्शियल पेपर के जरिए बाजार से सार्वजनिक धन जुटाती हैं, तो होल्डिंग कंपनी होने के नाते टाटा संस को इससे अलग नहीं माना जा सकता.
क्या है पब्लिक फंड जिसने फंसाया पेंच
आरबीआई के नियमों के अनुसार पब्लिक फंड की परिभाषा सिर्फ बैंक में जमा पैसों तक सीमित नहीं है. इसमें बैंक फाइनेंस, इंटर-कॉरपोरेट डिपॉजिट, कमर्शियल पेपर और डिबेंचर के जरिए जुटाया गया फंड भी शामिल है. इतना ही नहीं, सहयोगी और समूह कंपनियों के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से आने वाला फंड भी इसी दायरे में आता है. चूंकि टाटा संस की समूह कंपनियां इन वित्तीय साधनों का इस्तेमाल करती हैं, इसलिए नियामक ने माना कि कंपनी पर पब्लिक फंड की जवाबदेही पूरी तरह लागू होती है.
अब लिस्टिंग क्यों बन गई मजबूरी?
केंद्रीय बैंक ने अक्टूबर 2022 में टाटा संस को अपर लेयर (NBFC-UL) के रूप में वर्गीकृत किया था. इस श्रेणी के कड़े नियमों के तहत कंपनी को अनिवार्य रूप से 30 सितंबर 2025 तक शेयर बाजार में लिस्ट होना था. लिस्टिंग की बाध्यता से बचने के लिए ही टाटा संस ने दिसंबर 2024 में अपना एनबीएफसी दर्जा सरेंडर करने का आवेदन दिया था. अब याचिका खारिज होने के बाद टाटा संस एक बार फिर टाइप-1 एनबीएफसी-CIC के कड़े रेगुलेटरी फ्रेमवर्क में आ गई है.
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रुली बिश्नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …
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