Tuesday, September 29, 2026
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बघेलखंड का खास पकवान अरबी के पत्ते का पतौड़ा, 20 मिनट भाप में पककर तैयार


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बघेलखंड का खास पकवान अरबी के पत्ते का पतौड़ा, 20 मिनट भाप में पककर तैयार

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Arbi Patta Patoda: भादो के महीने में बघेलखंड के गांव-घर में कई ऐसे पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं, जिनका स्वाद आज भी लोगों को अपनी पुरानी यादों से जोड़ देता है. इन्हीं में से एक है अरबी के पत्तों से बनने वाली रकचिया या पतौडा (पतौड़ा). बाहर से कुरकुरी और अंदर से मसालेदार यह डिश चाय के साथ नाश्ते से लेकर दाल-चावल के साथ सब्जी तक के रूप में खाई जाती है. इसकी खास बात यह है कि साधारण सी दिखने वाली अरबी के पत्तों को बेसन और मसालों के साथ तैयार करके एक ऐसा स्वाद दिया जाता है, जिसे एक बार खाने के बाद आसानी से भुलाया नहीं जा सकता. लोकल 18 को जानकारी देते हुए सतना निवासी मीना द्विवेदी ने बताया कि घर पर इसे बनाने की प्रक्रिया थोड़ी मेहनत वाली जरूर है लेकिन स्वाद के सामने यह मेहनत छोटी लगती है.

पतौडा बनाने के लिए अरबी के ताजे और कोमल पत्ते लिए जाते हैं. सबसे पहले इन्हें पानी से अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है. इसके बाद पत्तों के पीछे मौजूद मोटी और सख्त नसों को चाकू की मदद से सावधानी से निकाल दिया जाता है. ऐसा करने से पत्ते आसानी से मुड़ जाते हैं और खाने के दौरान गले में खराश या चुभन जैसी परेशानी कम होती है. पत्तों की यह तैयारी रकचिया को सही तरीके से रोल करने के लिए भी जरूरी होती है.

अब एक बड़े बर्तन में बेसन लिया जाता है. इसमें स्वाद के हिसाब से हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, गरम मसाला, हींग और नमक मिलाया जाता है. इसके साथ लहसुन, अदरक और हरी मिर्च का पेस्ट डाला जाता है, जिससे इसमें अच्छा चटपटा स्वाद आता है. रकचिया की खासियत बढ़ाने के लिए इसमें अमचूर पाउडर या इमली का गाढ़ा रस भी मिलाया जाता है. खटाई इस पकवान के स्वाद को उभारने के साथ अरबी के पत्तों से जुड़ी प्राकृतिक खराश को कम करने में भी मदद करती है. सभी चीजों को मिलाकर थोड़ा-थोड़ा पानी डाला जाता है और ऐसा गाढ़ा लेप तैयार किया जाता है, जो पत्तों पर आसानी से चिपक सके.

अब एक साफ जगह पर अरबी का बड़ा पत्ता उल्टा फैलाया जाता है और उसके ऊपर बेसन के मसालेदार लेप की पतली और बराबर परत लगाई जाती है. इसके बाद उसके ऊपर दूसरा पत्ता रखा जाता है और फिर बेसन का लेप लगाया जाता है. इसी तरह तीसरे और चौथे पत्ते की परत लगाई जाती है. पत्तों को एक-दूसरे की विपरीत दिशा में रखने से रोल मजबूत बनता है. इसके बाद दोनों किनारों को अंदर की तरफ मोड़कर नीचे से ऊपर की ओर दबाते हुए एक टाइट बेलनाकार रोल तैयार किया जाता है.

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तैयार रोल को कुकर में रखकर उबलते पानी की भाप में करीब 15 से 20 मिनट तक पकाया जाता है. इस दौरान बेसन अंदर तक अच्छी तरह पककर ठोस हो जाता है. रोल पकने के बाद उसे तुरंत काटने के बजाय कमरे के तापमान पर पूरी तरह ठंडा किया जाता है. गर्म रोल काटने पर उसके बिखरने का डर रहता है जबकि ठंडा होने के बाद वह सख्त हो जाता है और आसानी से गोल टुकड़ों में कट जाता है.

ठंडे हो चुके रोल को तेज और पैने चाकू से करीब आधा-आधा इंच मोटे गोल टुकड़ों में काटा जाता है. कटे हुए टुकड़ों में अरबी के पत्तों और बेसन की परतें दिखाई देती हैं, जिससे ये देखने में भी काफी आकर्षक लगते हैं. इसके बाद तवे या उथले पैन में थोड़ा सा सरसों का तेल गर्म किया जाता है. इसमें राई, हींग और सफेद तिल का तड़का लगाया जाता है. अब रकचिया के टुकड़ों को तवे पर रखकर धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ से पलट-पलटकर सेंका जाता है. जब बाहर की परत सुनहरी और कुरकुरी हो जाए, तो समझिए पतौडा तैयार है.

अरबी के पत्तों में विटामिन ए, विटामिन सी और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस रेसिपी में पहले रोल को भाप में पकाया जाता है और बाद में बहुत कम तेल में तवे पर सेंका जाता है, इसलिए इसे बनाने में तेल की मात्रा भी सीमित रहती है.

रकचिया को शाम की चाय पर हरी चटनी के साथ कुरकुरे नाश्ते के तौर पर परोस सकते हैं. वहीं दाल-चावल के साथ इसे सूखी भाजी या साइड डिश की तरह भी खाया जाता है. घर में मेहमान हों, तो टमाटर, प्याज और गरम मसालों से तरी वाली ग्रेवी बनाकर इन्हीं टुकड़ों की रसेदार सब्जी तैयार की जा सकती है. इसके अलावा छाछ के साथ कढ़ी बनाकर भी इसे परोसा जाता है. यही वजह है कि बघेलखंड की यह पारंपरिक रकचिया स्वाद तरीके और परोसने के मामले में एक बेहद खास घरेलू डिश मानी जाती है.

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