प्रज्ञा प्रवाह इकाई, सीवान द्वारा आयोजित “भारत बोध और सांस्कृतिक अवधारणा” विषयक बौद्धिक संगोष्ठी गुरुवार को आंदर रोड स्थित दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज परिसर में संपन्न हुई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह केंद्र काशी की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रामाशीष सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल उन्होंने भारतीय संस्कृति, राष्ट्र चेतना और सनातन ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। अपने संबोधन में रामाशीष सिंह ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक दृष्टि और मानव कल्याण की भावना का जीवंत स्वरूप है। अपनी जड़ों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता उन्होंने कहा कि भारत बोध का अर्थ केवल इतिहास और परंपराओं की जानकारी प्राप्त करना नहीं है, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कृति, राष्ट्रीय चिंतन और सामाजिक दायित्वों को आत्मसात करना भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और एकता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ.प्रजापति त्रिपाठी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखती है। वहीं विषय प्रवेश कराते हुए डॉ.अशोक प्रियंबद ने भारत की सांस्कृतिक अवधारणा, उसके ऐतिहासिक विकास और वर्तमान संदर्भ में उसकी उपयोगिता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विविधताओं में एकता, सहिष्णुता, समन्वय और सर्वधर्म समभाव की अनूठी परंपरा को अपने भीतर समेटे हुए है। भारतीय संस्कृति और राष्ट्र चेतना से जुड़े विषयों पर गंभीर विमर्श संगोष्ठी में शिक्षकों, विद्यार्थियों,बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। प्रतिभागियों ने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन तथा उसके व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति और राष्ट्र चेतना से जुड़े विषयों पर गंभीर विमर्श किया। अंत में प्रज्ञा प्रवाह इकाई, सीवान की ओर से सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
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