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जहां आज के आधुनिक दौर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है तो वहीं यह लकड़ी का पूल आज भी इन दूर दराज के क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है. सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बीच मौजूद इस पूल को देखने पर हमें पुराने ऐतिहासिक दृश्य जैसा लगता है. इसमें प्रयोग हुए लकड़ी काफी जर्जर हो चुके हैं इसके बावजूद भी यहां से लोगों को गुजरते हुए देखा जाता है.
महराजगंज: महराजगंज जिले के चौक क्षेत्र के घने जंगलों के बीच में एक बहुत ही अनोखा लकड़ी से बना पुल देखने को मिलता है. जो देखने में काफी आकर्षक लगता है. इसकी बनावट देखकर ऐसा लगता है कि यह आज से नहीं बल्कि सदियों से यहां खड़ा है, जो अपनी मजबूत और टिकाऊ होने की वजह से आज भी इस स्थिति में है. लकड़ी से बने इस पूल की बात करें तो यह एक नाले के ऊपर बना है जहां से जंगल के बीच रहने वाले लोग और आसपास के लोग इधर से आवागमन करते हैं.
जहां आज के आधुनिक दौर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है तो वहीं यह लकड़ी का पूल आज भी इन दूर दराज के क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है. सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बीच मौजूद इस पूल को देखने पर हमें पुराने ऐतिहासिक दृश्य जैसा लगता है. इसमें प्रयोग हुए लकड़ी काफी जर्जर हो चुके हैं इसके बावजूद भी यहां से लोगों को गुजरते हुए देखा जाता है.
पुल की ज्यादातर पटरियां टूटी
सदियों बीत जाने के बावजूद भी यह पूल यूंही खड़ा है. खास बात है कि इसके नीचे पिलर से बना लकड़ी का बेस पूरी तरह पानी में रहता है लेकिन आज भी बहुत कमजोर नहीं दिखता बल्कि इस पूल का पूरा भार अपने ऊपर लिए खड़ा है. मौजूदा समय में यह काफी सकरा हो गया है लेकिन पहले ऐसा नहीं था यह पूल पहले काफी चौड़ा होता था. जब आप इसके स्ट्रक्चर को देखेंगे तो इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि यह पहले कितना चौड़ा हुआ करता था. पूल इतना पुराना है कि इसकी ज्यादातर पटरियां उखड़ चुकी हैं लेकिन स्थानीय लोगों ने आवागमन की सुविधा के लिए टूटे हुए पटरियों की जगह पर पेड़ की शाखों का इस्तेमाल किया है. वर्तमान समय में भी यहां के स्थानीय लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और रोजाना इसी पूल से होकर आते जाते भी है. बीच जंगल में खड़ा यह पूल वर्षों से यहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहा है. जंगल में कई ऐसे गांव हैं जिनके लिए यह पूल बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है.
इस क्षेत्र का इतिहास बन चुका है यह पुल
बहुत से लोग ऐसा बताते हैं कि यह पूल आज से नहीं बल्कि बहुत समय से यहां पर है. हालांकि इसकी उम्र का अंदाजा लगाना आज के समय में संभव नहीं है. आज के समय में यह पूल सिर्फ आवागमन का साधन ही नहीं है बल्कि इस क्षेत्र के इतिहास का एक हिस्सा बन चुका है. घने जंगलों के बीच मौजूद होने की वजह से इसके आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य भी लोगों को खूब आकर्षित करता है. चारों तरफ फैली हरियाली, ऊंचे पेड़ और नीचे बहता पानी इसको और भी खूबसूरत बनाता है. समय समय पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसके फोटोज और वीडियो देखने को मिलता है. स्थानीय लोगों की ऐसी मांग है कि इस पूल को सही करने की जरूरत है जिससे लोगों को आने-जाने में आसानी हो सके क्योंकि यह जर्जर हो चुका है जिस पर आना-जाना बहुत खतरे भरा हो गया है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें

