Tuesday, April 14, 2026
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मुझसे कहा गया- लिखो, राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे: मैंने मना किया तो पार्टी से निकाल दिया; कांग्रेस से निष्कासित होने के बाद बोले लक्ष्मण सिंह – Guna News



लक्ष्मण सिंह ने गुना में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया।

कांग्रेस से निष्कासित किए जाने के बाद पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने आज (गुरुवार) अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पार्टी ने नोटिस का जवाब देने के दौरान मुझसे कहा था कि लिख कर दो कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बनेंगे, तभी कार्रवाई रोकी जाएगी। मैंने

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लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा- जिसकी खुद की बारात नहीं निकली, वो बारात के घोड़े और रेस के घोड़े की बात कर रहा है। उन्होंने कहा, मैं कोई ज्योतिषी नहीं हूं, जो यह बताऊं कि कौन प्रधानमंत्री बनेगा और कौन नहीं।

उमर अब्दुल्ला और वाड्रा पर की थी टिप्पणी पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के भाई और पूर्व सांसद लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी के अलावा रॉबर्ट वाड्रा और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला पर भी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि राहुल गांधी को सोच-समझकर बोलना चाहिए। वहीं उमर अब्दुल्ला पर आरोप लगाया था कि वह आतंकवादियों से मिले हुए हैं।

इसी बयान के बाद कांग्रेस ने 9 मई को उन्हें नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। पार्टी ने जवाब देने के लिए 10 दिन का समय दिया था। इसके बाद करीब एक महीने बाद 11 जून को कांग्रेस ने छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया।

‘पहलगाम घटना पर जो कहा, उस पर अफसोस नहीं’ निष्कासन के एक दिन बाद लक्ष्मण सिंह गुना पहुंचे और एक निजी होटल में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रखा। उन्होंने कहा- मैंने सोचा कि सबसे पहले गुना में ही अपनी बात रखूं, क्योंकि यहीं का रहने वाला हूं और यहीं से राजनीति शुरू की है। मैं पहले भी बोलता रहा हूं, लेकिन तब मुझे नोटिस नहीं दिया गया।

उन्होंने कहा- पहलगाम घटना पर जो कहा, उस पर मुझे कोई अफसोस नहीं है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उस बयान का समर्थन किया था। जब कार्यकर्ता मेरे साथ थे, तो हाईकमान को क्या आपत्ति थी?

राहुल गांधी पर फिर कसा तंज लक्ष्मण सिंह ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा- अब लंगड़ा घोड़ा, बारात का घोड़ा, खुद की बारात तो निकली नहीं और बारात का घोड़ा। उन्हें क्या मालूम बारात का घोड़ा कैसा चलता है। जो उनके पिताजी के उम्र के लोग हैं, पिताजी के साथ जिन्होंने काम किया है, उनका अपमान करना ये कौनसा संस्कार है। ऐसे व्यक्ति को क्या हम लीडर मान सकते हैं। जो मान रहे हैं, मुझे तो उन पर आश्चर्य होता है।



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