Last Updated:
Mohit Chauhan Evergreen Hit Song : 14 साल पहले आई एक फिल्म के गाने ने युवाओं को दीवाना बना दिया था. एआर रहमान के संगीत और इरशाद कामिल के बोलों ने ऐसा जादू किया, जिसका खुमार अभी तक दिलों से उतरा नहीं है. लोग इसे आज गाना नहीं, बल्कि इबादत मानते हैं. कमाल की बात यह है कि गाने को कुरान की आयतों और ऋग्वेद के मंत्रों से प्रेरणा लेकर लिखा गया था. रणबीर कपूर पर फिल्माए गाने पर अब इम्तियाज अली ने कई दिलचस्प खुलासे किए हैं.
नई दिल्ली: फिल्म ‘रॉकस्टार’ का यूं तो हर एक गाना अपने-आप में कल्ट है, मगर एक गाने की बात निराली है. गाने का संगीत और बोल इतने पवित्र लगते हैं कि इसे पूरी टीम ने नंगे पैर रिकॉर्ड किया था. रणबीर कपूर को गाने में ट्रांस स्टेट में दिखाया गया है, जिसमें प्रेम, ईश्वर से मिलन का प्रतीक बनता नजर आता है. हम गाने ‘कुन फाया कुन’ की बात कर रहे हैं, जिसे कुरान की आयत और ऋग्वेद के मंत्रों से प्रेरित होकर क्रिएट किया गया था. फिल्म ‘रॉकस्टार’ के डायरेक्टर इम्तियाज अली ने गाने को लेकर कई दिलचस्प खुलासे किए हैं.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

फिल्म ‘रॉकस्टार’ के जादुई गाना ‘कुन फाया कुन’ ही घूम जाता है. इस गाने में जॉर्डन का किरदार जिस तरह संगीत की दुनिया में खो जाता है, उसने दर्शकों के दिलों को छू लिया था. आज भी यह गाना एआर रहमान की सबसे बेहतरीन और रूहानी धुनों में से एक माना जाता है, जो लोगों को एक अलग ही शांति देता है. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

फिल्म के डायरेक्टर इम्तियाज अली ने इस गाने से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प और बड़ा राज खोला है. उन्होंने बताया कि यह सिर्फ एक गाना नहीं है, बल्कि इसके पीछे कई गहरे धार्मिक और दार्शनिक विचार छिपे हैं. इम्तियाज की मानें, तो गाने को लिखते और बनाते समय पवित्र कुरान शरीफ और ऋग्वेद जैसी महान किताबों से प्रेरणा ली गई थी. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
Add News18 as
Preferred Source on Google

इम्तियाज अली ने बहुत ही सादगी से इस गाने की कामयाबी का पूरा क्रेडिट खुद लेने के बजाय अपनी टीम को दिया. उन्होंने कहा कि इसका असली श्रेय संगीतकार एआर रहमान और गीतकार इरशाद कामिल को जाता है. उन्होंने ही अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों की अच्छी बातों को मिलाकर इस गाने के शब्दों को पिरोया है. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

गाने की गहराई को समझाते हुए डायरेक्टर ने बताया कि इसमें ऋग्वेद, कुरान शरीफ और भगवद गीता का निचोड़ शामिल है. जैसे गाने की शुरुआत में जो लाइन आती है- ‘जब कहीं भी, कुछ नहीं, भी नहीं था’, वह असल में ऋग्वेद के सृष्टि की रचना के सूक्त से प्रेरित है. गाने का जो टाइटल है- ‘कुन फाया कुन’ वह पवित्र कुरान से लिया गया है. इसका सीधा और आसान मतलब होता है- ‘हो, और वह हो गया’ यानी अल्लाह के ‘हो’ कहने पर दुनिया वजूद में आ गई. यही बात बाइबल में भी कही गई है. इस तरह यह गाना अलग-अलग धर्मों की खूबसूरत सोच को एक-साथ पिरोने का काम करता है. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

इम्तियाज अली ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि एआर रहमान इस गाने को लेकर बहुत गंभीर थे. रहमान साहब जानते थे कि इन शब्दों में बहुत ताकत है, इसलिए वे किसी भी तरह की कोई गलती नहीं करना चाहते थे. उन्होंने गाना फाइनल करने से पहले कई जानकारों से सलाह भी ली थी कि इसे फिल्म के किरदार पर फिल्माना सही रहेगा या नहीं. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

गाने को रिकॉर्ड करने का माहौल भी किसी इबादत से कम नहीं था. इम्तियाज बताते हैं कि जब टीम स्टूडियो में रिकॉर्डिंग के लिए इकट्ठा हुई, तो सभी लोग हाथ-पैर धोकर और नंगे पैर अंदर आए थे. पूरी टीम के मन में इस गाने के प्रति एक खास इज्जत और जिम्मेदारी का अहसास था, जिसे सबने बखूबी निभाया. गाने को मोहित चौहान ने गाया है. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

इम्तियाज अली ने साफ किया कि वे किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहते थे, इसलिए गाने के साथ-साथ उसके विजुअल्स पर भी पूरा ध्यान दिया गया. टीम की इसी संवेदनशीलता और सम्मान की वजह से यह गाना आज भी हर किसी के दिल के बेहद करीब है. इन दिनों इम्तियाज अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ को लेकर चर्चा में हैं, जो हाल में सिनेमाघरों में रिलीज हुई है. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

