Monday, October 26, 2026
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यूपी: 15,000 करोड़ की लागत से बनेंगे 3 नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे


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UP Greenfield Expressway: सीएम योगी आदित्यनाथ की यूपी सरकार यूपी के रोड इंफ्रास्टक्चर में बदलाव के लिए कमर कस ली है. राज्य में यात्री और माल ढुलाई को रफ्तार देने के लिए मास्टरप्लान तैयार किया है. इसके तहत तीन नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के लिए करीब 8,200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा. इस पूरी भू-अधिग्रहण प्रक्रिया पर राज्य के खजाने से 15,000 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होगी. इन परियोजनाओं को यूपीडा (UPEIDA) द्वारा विकसित किया जा रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के साल 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के सपने को भारी बल मिलेगा.

उत्तर प्रदेश में आधारभूत संरचना (इंफ्रास्ट्रक्चर), कनेक्टिविटी और औद्योगिक विकास में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलने वाला है. प्रदेश में यात्री परिवहन और माल ढुलाई (कार्गो मोबिलिटी) को पंख लगाने के लिए सरकार ने तीन नए ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाने का निर्णय लिया है. इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को जमीन पर उतारने के लिए राज्य सरकार लगभग 8,200 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने जा रही है, जिस पर कुल 15,000 करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम खर्च आएगा.

योगी सरकार ने बताया कि वर्तमान और आगामी एक्सप्रेसवे परियोजनाएं उत्तर प्रदेश को वर्ष 2030 तक 1 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था (1 Trillion Dollar Economy) बनाने के लक्ष्य की तरफ तेजी से अग्रसर करने में मील का पत्थर साबित होंगी.

इन तीनों शानदार परियोजनाओं को राज्य की नोडल एजेंसी उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) द्वारा विकसित किया जा रहा है. सरकार ने इन तीनों एक्सप्रेसवे के संरेखण (Alignments) को भी अंतिम रूप दे दिया है, जो उत्तर प्रदेश और पड़ोसी राज्य उत्तराखंड के लगभग 650 गांवों से होकर गुजरेंगे.

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विंध्य एक्सप्रेसवे (Vindhya Expressway): यह तीनों परियोजनाओं में सबसे बड़ा प्रोजेक्ट है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में लगभग 4,615 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण इसके लिए किया जाएगा, जो 109 गांवों से होकर गुजरेगा. यह एक्सप्रेसवे देश के सबसे लंबे 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे को प्रयागराज, भदोही और मिर्ज़ापुर जिलों के रास्ते सीधे सोनभद्र से जोड़ेगा.

मेरठ-Haridwar एक्सप्रेसवे (Meerut-Haridwar Expressway): इस प्रोजेक्ट के तहत गंगा एक्सप्रेसवे को उत्तर प्रदेश के मेरठ से आगे बढ़ाकर उत्तराखंड के हरिद्वार तक विस्तारित किया जाएगा. इसके लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अमरोहा और बिजनौर जिलों के साथ-साथ उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के कुल 184 गांवों से लगभग 2,020 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा.

विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे (Vindhya Purvanchal Link Expressway): पूर्वी यूपी के चंदौली, गाजीपुर और मिर्ज़ापुर जिलों के 140 गांवों में लगभग 1,560 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण इस तीसरे लिंक एक्सप्रेसवे के लिए किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में जबरदस्त सुधार होगा.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 अप्रैल 2026 को देश के सबसे लंबे ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे यानी ‘गंगा एक्सप्रेसवे’ का उद्घाटन किया जा चुका है. 36,000 करोड़ रुपये की लागत से बने इस एक्सप्रेसवे को भी यूपीडा (UPEIDA) द्वारा पीपीपी (PPP) मॉडल पर विकसित किया गया था, जो वर्तमान में यूपी के 12 जिलों (मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज) को आपस में जोड़ता है.

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर ही राज्य के निवेश माहौल को बेहतर बनाने की रीढ़ है. तेज और सुगम कनेक्टिविटी न केवल परिवहन और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को बढ़ावा देती है, बल्कि यह सुदूर ग्रामीण इलाकों और आंतरिक क्षेत्रों में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (MSMEs) के विकास को भी तीव्र गति प्रदान करती है.

हाल ही में अपने उत्तर प्रदेश दौरे के दौरान एक्सिस बैंक के एमडी और सीईओ अमिताभ चौधरी ने भी इस बात की सराहना की थी कि अब यूपी में औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियां बड़े महानगरों से निकलकर टायर-II और टायर-III शहरों तक तेजी से फैल रही हैं, जिससे राज्य में भारी मात्रा में नए निवेश आकर्षित हो रहे हैं. इन नए एक्सप्रेसवे के बन जाने से पूर्वांचल से लेकर पश्चिम उत्तर प्रदेश तक व्यापार, पर्यटन और रोजगार के अनगिनत नए द्वार खुलेंगे.

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