Saturday, September 12, 2026
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रूसी पुलिस ने कानपुर के इंजीनियर का हाथ बांधकर उठाया: बोला- अब विदेश नहीं जाऊंगा, जान से मारने की धमकी दी; 48 घंटे टॉर्चर किया – Kanpur News




मॉस्को में रूसी पुलिस ने कानपुर के इंजीनियर को 48 घंटे हिरासत में रखा, टॉर्चर किया। इंजीनियर पत्नी और 10 साल के बेटे के साथ गुरुवार रात कानपुर घर लौटे। दैनिक भास्कर से बातचीत में इंजीनियर चंदन गुप्ता ने कहा- दोस्त और मेरा हाथ बांधकर पुलिस वैन में ले गई। पुलिसवालों ने गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। मेरे दोस्त को अलग कमरे में ले जाकर डंडे से पीटा। परिवार से बात करने की अनुमति नहीं दी। फोन और ट्रांसलेटर भी नहीं दिया। पुलिस ने मेरे ऊपर नशे में एंबुलेंस का शीशा तोड़ने का झूठा आरोप लगाया। चंदन ने कहा- इस घटना के बाद अब मेरा दोबारा रूस जाकर नौकरी करने का कोई इरादा नहीं है। बल्कि, दोबारा विदेश में नौकरी करने नहीं जाऊंगा। मैं मॉस्को में साल 2023 से पत्नी और बेटे के साथ रह रहा था। इससे पहले भी दो साल तक मॉस्को में रह चुका हूं। पत्नी स्नेहा ने कहा- अगर एंबुलेंस का शीशा तोड़ा गया था तो उसका सबूत कहां है। पढ़ें इंजीनियर और उनकी पत्नी से बातचीत पर खास रिपोर्ट… हाथ बांधकर पुलिस ले गई, पासपोर्ट छीन लिया इंजीनियर चंदन गुप्ता नोएडा सेक्टर-62 स्थित एक पॉलीफिल्म कंपनी के जरिए हाई-क्वालिफाइड वीजा पर मॉस्को में नौकरी कर रहे थे। वह कानपुर के यशोदा नगर के रहने वाले हैं। पत्नी स्नेहा ने LLB की पढ़ाई की है। चंदन ने कहा- 5 सितंबर को दोस्त आशीष और एक अन्य दोस्त के साथ डिनर के बाद टहलने निकले थे। हम लोग हैंगिंग ब्रिज, रेड स्क्वायर होते हुए कितईगार्ड मेट्रो स्टेशन पहुंच रहे थे। जहां पुलिस ने आशीष और मुझे दोनों को पकड़ लिया, जबकि एक दूसरा दोस्त थोड़ा दूर था, तो वह बच गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों के एक-एक हाथ बांध दिए और करीब 400 मीटर दूर खड़ी पुलिस की गाड़ी तक ले गए। इस दौरान मेरे मोबाइल, पासपोर्ट और दूसरे डॉक्यूमेंट भी ले लिए। चंदन का कहना है कि हम लगातार पुलिस से पूछते रहे कि आखिर मुझे क्यों पकड़ा जा रहा है, लेकिन पुलिसकर्मियों ने कोई जवाब नहीं दिया। पुलिसवालों ने कहा नशे में हो, एंबुलेंस का ग्लास तोड़ा चंदन ने कहा- पुलिस ने गाड़ी में बैठाने के बाद मुझसे कहा कि मैंने एंबुलेंस का शीशा तोड़ा है। पुलिसकर्मी बार-बार कहते रहे ‘यू ब्रोक एंबुलेंस ग्लास।’ पुलिस से पूछा कि मैंने एंबुलेंस का शीशा कब और कहां तोड़ा? मुझे कोई वीडियो या अन्य सबूत नहीं दिखाया गया। शराब के नशे में होने की बात पुलिस ने कही, लेकिन मैंने ड्रिंक नहीं की थी। पुलिसवालों का व्यवहार बेहद गलत था। पुलिस मुझे धक्का दे रही थी और सवाल पूछने पर मारने की धमकी दे रही थी। मेरे साथ पकड़े गए दोस्त ने पुलिसवालों से बार-बार पूछा कि क्यों पकड़ा गया है। इसके बाद उसे अलग ले जाया गया और कई डंडे मारे गए। कोर्ट जाने तक फोन और ट्रांसलेटर नहीं दिया चंदन ने बताया- पुलिस की गाड़ी हम दोनों को लेकर करीब एक घंटे तक घूमती रही। रास्ते में पुलिसकर्मियों ने एक जगह रुककर किसी अधिकारी से बातचीत भी की। इसके बाद दोनों को बॉन्सकायर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। रात करीब एक बजे तक हमें ये नहीं पता था कि आखिर क्या कार्रवाई की जा रही है। चंदन ने बताया- पुलिस स्टेशन में उन्हें किसी से फोन पर बात करने की परमिशन नहीं दी गई। उनके पास फोन नहीं था और न ही कोई ट्रांसलेटर उपलब्ध कराया गया। उनका कहना है कि कोर्ट जाने तक उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया गया। चंदन के मुताबिक, भाषा की समस्या के कारण उनके लिए स्थिति और मुश्किल हो गई थी। हालांकि उन्हें भरोसा था कि उनकी फैमिली और कंपनी उनकी मदद के लिए प्रयास कर रही होगी। पुलिसवालों ने अपनी मर्जी से लिखवाकर साइन कराए चंदन ने बताया- रिहाई से पहले रूसी पुलिस ने हमसे कुछ प्रोटोकॉल और डॉक्यूमेंट पर हस्ताक्षर करवाए। पुलिसवालों ने कहा कि जैसा बता रहे हैं, वैसा ही लिखना होगा। पुलिस ने मुझे धमकी दी कि अगर मैंने बात नहीं मानी तो अभी तो छोड़ दिया जाएगा, लेकिन दोबारा हिरासत में लेकर लंबी रिमांड मांगी जा सकती है। मुझे डर था कि अगर मैं मॉस्को में रुका तो दोबारा किसी मामले में फंसाया जा सकता है। इसी वजह से मैंने परिवार के साथ भारत लौटने का फैसला किया। चंदन ने कहा- पिछले करीब 5 महीने से रूस में भारतीयों को पुलिस द्वारा परेशान किए जाने की घटनाओं के बारे में सुनने को मिल रहा था। मेरे परिचितों और कंपनी के लोगों ने बताया था कि पुलिस भारतीयों को रोकती है। कई घंटों तक बैठाकर रखती है, डॉक्यूमेंट और पैसे ले लेती है। चंदन बोले- भारतीय दूतावास ने मुझसे बात तक नहीं की चंदन ने मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हिरासत के करीब 48 घंटों के दौरान भारतीय दूतावास के किसी अधिकारी ने मुझसे संपर्क नहीं किया। मेरी पत्नी स्नेहा ने सोशल मीडिया के जरिए भारत सरकार से मदद की अपील की थी। इसके बावजूद भारतीय दूतावास से न तो कोई अधिकारी मुझसे मिलने आया और न ही फोन पर मुझसे घटना के बारे में बात की गई। मुझे इस बात का सबसे ज्यादा दुख है कि भारतीय दूतावास ने मेरा पक्ष जाने बिना ही रूसी पुलिस के बयान को आधार बनाकर जानकारी जारी की। स्नेहा बोलीं- बयान जारी करने से पहले सबूत कहां था? चंदन की पत्नी स्नेहा गुप्ता ने भी भारतीय दूतावास पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पति के बारे में बयान जारी करने से पहले भारतीय दूतावास ने मुझसे या मेरे पति से घटना की पूरी जानकारी नहीं ली। अगर चंदन ने शराब पी थी तो क्या उनका मेडिकल कराया गया? अगर उन्होंने एंबुलेंस का शीशा तोड़ा था तो उसका वीडियो या फोटो कहां है? एंबुलेंस की लोकेशन क्या थी और पति की लोकेशन क्या थी? उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब सामने आना चाहिए। स्नेहा ने कहा कि अगर एंबुलेंस का शीशा तोड़ने का आरोप है तो उसके सबूत सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने भारतीय दूतावास से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। स्नेहा ने कहा कि मैं चाहती हैं कि इस मामले की जांच हो। ————————– ये खबर भी पढ़िए- करोड़पति कारोबारी के बेटे ने नौकर को क्यों नहीं पहचाना: कानपुर में 309 कॉल कीं, 3 बार साथ घूमा; बेटे पर शक गहराने की 5 वजह कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में बहू शालू के बाद अब बेटे सुब्रत पर भी पुलिस का शक गहरा गया है। जांच में सामने आया है कि सुब्रत ने सुपारी किलर विशाल गौतम से तीन महीने में करीब 309 बार फोन पर बात की थी। पढ़ें पूरी खबर…



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