Saturday, June 27, 2026
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वो अमर सितारा, महंगे इंस्ट्रूमेंट्स ही नहीं, बोतल-कंघी से भी बनाता था धुन


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संगीतकार एसडी बर्मन के बेटे पंचम दा ने साबित किया कि संगीत सिर्फ वाद्ययंत्रों से नहीं, बल्कि किसी भी आवाज से बन सकता है. वे कांच, चम्मच, कंघी, चाबियों और खाली बोतलों जैसी रोजमर्रा की चीजों से धुन तैयार करने के लिए मशहूर थे. उन्होंने ‘चुरा लिया है’ और ‘महबूबा महबूबा’ जैसे गानों में इनका बखूबी इस्तेमाल किया. पंचम दा का आखिरी यादगार काम फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ में था.

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पंचम दा के पिता एसडी बर्मन भी संगीतकार थे.

नई दिल्ली: महान संगीतकार राहुल देव बर्मन को दुनिया प्यार से ‘पंचम दा’ बुलाती है. भारतीय संगीत के एक ऐसे जादूगर थे जिन्होंने संगीत की परिभाषा ही बदल दी. पंचम दा का मानना था कि संगीत सिर्फ महंगे इंस्ट्रूमेंट के मोहताज नहीं होता, बल्कि हर टकराती और धड़कती हुई आवाज में एक खूबसूरत धुन छिपी होती है. पंचम दा का जन्म 27 जून 1939 को कोलकाता में हुआ था. उन्हें संगीत विरासत में मिला था. उनके पिता सचिन देव बर्मन (एसडी बर्मन) खुद अपने दौर के दिग्गज संगीतकार थे. पंचम दा की प्रतिभा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने महज नौ साल की उम्र में फिल्म ‘फंटूश’ के लिए ‘ऐ मेरी टोपी पलट के आ’ जैसी धुन तैयार कर ली थी. जब वह मुंबई आए, तो पिता के असिस्टेंट के तौर पर काम करते-करते उन्होंने संगीतकार के रूप में अपनी एक अलग पहचान बनाई, जिसने पूरे देश को अपना दीवाना बना लिया.

पंचम दा को इंडस्ट्री में असली और बड़ा ब्रेक फिल्म ‘तीसरी मंजिल’ के गाने ‘आजा आजा मैं हूं प्यार तेरा’ से मिला. इसके बाद, जैसे हिट गानों की बाढ़ सी आ गई. ‘दम मारो दम’ और ‘ये शाम मस्तानी’ जैसे गानों ने उन्हें बॉलीवुड का सबसे सुपरहिट और ट्रेंड-सेटिंग संगीतकार बना दिया. 1970 और 80 के दशक में राजेश खन्ना, किशोर कुमार और आरडी बर्मन की तिकड़ी ने ‘मेरे सपनों की रानी’ और ‘चिंगारी कोई भड़के’ जैसे एक से बढ़कर एक अमर गाने दिए. पंचम दा को सबसे खास बनाता था उनका अतरंगी और अनोखा एक्सपेरिमेंट करने का अंदाज. वह घर और आस-पास की आम चीजों जैसे कांच, बोतल, चम्मच और कंघी से धुनें तैयार कर लेते थे. फिल्म ‘शोले’ के गाने ‘महबूबा महबूबा’ में उन्होंने खाली बोतल में फूंक मारकर रिदम बनाई, तो ‘यादों की बारात’ के गाने ‘चुरा लिया है’ में कांच की प्याली और चम्मच की टकराहट से पैदा हुआ संगीत आज भी लोगों के कानों में रस घोलता है. उन्होंने ‘पड़ोसन’ के गाने ‘एक चतुर नार’ में कंघी की खुरदुरी सतह को घिसकर कमाल का साउंड इफेक्ट दिया था.

आज भी अमर है पंचम दा का संगीत
80 के दशक के बाद पंचम दा के करियर और सेहत में थोड़ा उतार-चढ़ाव जरूर आया, लेकिन संगीत के प्रति उनकी दीवानगी कभी कम नहीं हुई. ढलते दौर में भी उन्होंने ‘आने वाला पल जाने वाला है’ और ‘तुझसे नाराज नहीं जिंदगी’ जैसे बेहद संजीदा और दिल को छू लेने वाले गाने दिए. उन्होंने फिल्म ‘1942: ए लव स्टोरी’ में संगीत देकर यह साबित कर दिया कि उनका सिक्का हमेशा चलेगा. इस फिल्म के गाने ‘एक लड़की को देखा तो ऐसा लगा’ और ‘रिमझिम रिमझिम’ आज भी हर जनरेशन के फेवरेट हैं. अफसोस की बात यह है कि 4 जनवरी 1994 को इस दुनिया को अलविदा कहने वाले पंचम दा अपनी इस आखिरी ब्लॉकबस्टर कामयाबी का जश्न देखने के लिए मौजूद नहीं रहे, लेकिन उनका संगीत आज भी अमर है.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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