Thursday, July 16, 2026
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सागर पर एक्शन होता तो जिंदा तो जिंदा होती बेटी: पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में छात्रा की हत्या पर परिजन बोले- प्रिंसिपल की लापरवाही से हत्या हुई – Pilibhit News




पीलीभीत मेडिकल कॉलेज में पैरामेडिकल छात्रा की हत्या के मामले में प्रिंसिपल पर लापरवाही के आरोप लगे हैं। परिजनों का कहना है कि अगर कॉलेज प्रशासन समय रहते कार्रवाई करता तो आज उनकी बेटी जिंदा होती। आरोप है कि कशिश ने करीब 15 दिन पहले आरोपी छात्र सागर की हरकतों की शिकायत मेडिकल कॉलेज प्रशासन से की थी, लेकिन उसपर कोई ध्यान नहीं दिया गया। कशिश के चाचा विकास पटेल ने कहा- कॉलेज प्रशासन को शिकायत की जानकारी थी तो परिवार को भी इसकी सूचना दी जानी चाहिए थी। अगर ये लोग बेटी की सुरक्षा नहीं कर पा रहे थे तो हम लोगों काू बता देते। हम अपनी बेटी को यहां से ले जाते। प्राचार्य समेत पूरा प्रशासनिक स्टाफ इस घटना के लिए जिम्मेदार है और उनके खिलाफ भी कार्रवाई के लिए डीएम को पत्र दिया गया है। फिरोजाबाद का पुराना मामला फिर आया चर्चा में मेडिकल कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. संगीता अनेजा के खिलाफ 2022 में फिरोजाबाद के स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में भी गंभीर आरोप लगे थे। उस समय एमबीबीएस सेकेंड ईयर के छात्र शैलेंद्र शंखवार ने हॉस्टल के कमरे में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। घटना के बाद मेडिकल छात्रों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-2 पर चक्काजाम कर कॉलेज प्रशासन पर मानसिक उत्पीड़न, परीक्षा में फेल करने की धमकी और अवैध वसूली जैसे आरोप लगाए थे। छात्र के पिता की तहरीर पर तत्कालीन प्रिंसिपल डॉ. संगीता अनेजा, परीक्षा नियंत्रक और वार्डन समेत पांच लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने और एससी/एसटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज हुई थी। दोनों मामलों में समान आरोप परिजनों और छात्रों का कहना है कि दोनों मामलों में शिकायतों के प्रति प्रशासन का रवैया लगभग एक जैसा रहा। फिरोजाबाद में छात्र द्वारा प्रताड़ना की शिकायतों पर समय रहते कार्रवाई नहीं हुई। पीलीभीत में भी छात्रा कशिश की लिखित शिकायत पर आरोपी के खिलाफ कठोर कदम नहीं उठाया गया। आरोप है कि पीलीभीत में शिकायत के बाद आरोपी छात्र से समझौता कराया गया और कुछ दिनों के लिए उसे छुट्टी पर भेज दिया गया। घटना के बाद भी कॉलेज प्रशासन पर शिकायतों से इनकार करने और जिम्मेदारी से बचने के आरोप लगाए जा रहे हैं। मेडिकल सुविधाओं पर भी उठे सवाल घटना के बाद मेडिकल कॉलेज की स्वास्थ्य सुविधाएं भी सवालों के घेरे में आ गई हैं। परिजनों का कहना है कि कशिश की गर्दन की मुख्य रक्त वाहिनी कट जाने के बावजूद कॉलेज में तत्काल विशेषज्ञ वैस्कुलर सर्जरी की सुविधा उपलब्ध नहीं मिल सकी। प्राथमिक उपचार के बाद उसे वेंटिलेटर एम्बुलेंस से बरेली के निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने मेडिकल कॉलेज में गंभीर आपात स्थिति से निपटने की पर्याप्त व्यवस्था नहीं थी। सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल घटना के बाद कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल उठे हैं। आरोप है कि मेडिकल कॉलेज में आउटसोर्सिंग के माध्यम से तैनात कई कर्मचारियों का पुलिस सत्यापन तक नहीं हुआ है और कई कर्मियों को नियमित नियुक्ति पत्र भी जारी नहीं किए गए हैं। इस संबंध में पहले भी उच्च अधिकारियों और आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतें की जा चुकी थीं। घटना के बाद प्रिंसिपल डॉ. संगीता अनेजा ने बताया कि कॉलेज स्टाफ के साथ बैठक कर दिवंगत छात्रा को श्रद्धांजलि दी गई। कॉलेज परिसर की सुरक्षा मजबूत करने के लिए पूर्व सैनिकों की तैनाती का प्रस्ताव भेजा गया है। फिलहाल दो प्रशिक्षित सुरक्षाकर्मी कार्यभार संभाल चुके हैं। इसके अलावा हॉस्टल वार्डन को तत्काल आवास आवंटित करने और परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों को दुरुस्त कराने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, छात्रा के परिजन और छात्र संगठन अब भी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई और मेडिकल कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे हैं।



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