राजस्थान हाईकोर्ट ने जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर की स्पेशल अपील खारिज कर दी। मामला कर्मचारी रमेश पंडित के नियमितीकरण से जुड़ा है। अदालत ने एकल पीठ का आदेश बरकरार रखा।
जस्टिस विनीत कुमार माथुर और जस्टिस चंद्र शेखर शर्मा की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। विश्वविद्यालय ने कर्मचारी के पक्ष में दिए गए एकल पीठ के आदेश को चुनौती दी थी। उस आदेश में ‘ललित गहलोत एवं अन्य बनाम जेएनवीयू’ मामले के फैसले को आधार बनाया गया था।
18 नवंबर 2024 को हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय को अंतरिम राहत देते हुए एकल पीठ के आदेश पर रोक लगाई थी। इसकी वजह यह थी कि जेएनवीयू ने ‘ललित गहलोत’ मामले में एकल पीठ के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी 2024 को उस आदेश पर रोक लगाई थी।
रमेश पंडित की ओर से मामले का जल्द निपटारा करने के लिए आवेदन दिया गया था। उनके वकील डॉ. निखिल डुंगावत, निहार जैन और निखिल भंडारी ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने 20 अगस्त 2026 को जेएनवीयू की विशेष अनुमति याचिका अन्य संबंधित एसएलपी के साथ खारिज कर दी थी।
वकीलों ने 16 सितंबर 2026 को संतोष कुमार से जुड़े मामले में डिवीजन बेंच के फैसले का भी हवाला दिया। उस मामले में बेंच ने विश्वविद्यालय की अपील खारिज करते हुए कहा था कि मामला ‘मुकेश शर्मा’ के पहले से तय फैसलों से अलग नहीं है।
‘ललित गहलोत’ मामले की एसएलपी सुप्रीम कोर्ट से खारिज होने के बाद इस विवाद का कानूनी आधार समाप्त हो गया था।
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