नई दिल्ली. इस साल फरवरी के अंत में ईरान पर हुए हमलों के बाद जब होर्मुज स्ट्रेट बंद हुआ, तो भारत के सामने रसोई गैस की आपूर्ति बनाए रखने की एक गंभीर चुनौती खड़ी हो गई थी. भारत अपनी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत एलपीजी आयात करता है, जिसका 90 प्रतिशत हिस्सा इसी समुद्री रास्ते से होकर आता है. इस अभूतपूर्व संकट से निपटने के लिए सरकार ने तुरंत कई मोर्चों पर एक साथ काम शुरू किया. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने साफ किया है कि भारत ने इस पूरे संकट का सामना बिना किसी किल्लत के किया और आज देश के सारे पंप खुले हैं व स्टॉक पूरी तरह फुल हैं.
इस संकट के दौरान भारत के सामने एलपीजी की संवेदनशीलता कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) से कहीं ज्यादा बड़ी थी. पेट्रोलियम मंत्रालय ने मार्च में एक ब्रीफिंग के दौरान बताया था कि भारत के क्रूड इम्पोर्ट का 70 प्रतिशत हिस्सा पहले ही होर्मुज स्ट्रेट के बाहर से रूट किया जा रहा था, लेकिन एलपीजी के मामले में निर्भरता बहुत अधिक थी. इस बड़े व्यवधान को संभालने के लिए सरकार ने अपनी सोची-समझी रणनीतियों के तहत काम किया, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मचे इस बड़े ऊर्जा संकट का असर देश के आम उपभोक्ताओं की रसोई तक नहीं पहुंच सका.
रिफाइनरियों में बदलाव और बिना टैक्स सुरक्षित निकले टैंकर
इस संकट से निपटने के लिए सरकार ने जो सबसे बड़ा और आक्रामक कदम उठाया, वो था देश की घरेलू रिफाइनरियों के काम करने के तरीके को बदलना. हरदीप सिंह पुरी ने बताया कि पेट्रोलियम मंत्रालय के निर्देश पर देश की उन रिफाइनरियों को भी महज कुछ दिनों के भीतर रीकॉन्फिगर (Reconfigure) कर दिया गया, जिन्होंने अपने इतिहास में पहले कभी रसोई गैस का उत्पादन नहीं किया था. रिफाइनरियों को आदेश दिया गया कि वे प्रोपेन, ब्यूटेन और प्रोपलीन जैसी गैसों को सीधे एलपीजी पूल में डाइवर्ट करें. इस त्वरित बदलाव का असर यह हुआ कि देश का घरेलू एलपीजी उत्पादन 35 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़कर सीधे 54 हजार मीट्रिक टन प्रतिदिन पर पहुंच गया, जिसने सप्लाई के अंतर को तुरंत पाट दिया.
इसके साथ ही, समुद्री रूट पर फंसे भारत के जहाजों को निकालना भी एक बड़ी चुनौती थी. केंद्रीय मंत्री ने ट्विटर पर एक कॉमेंट के जरिए बताया कि भारत ने बिना कोई अतिरिक्त टैक्स या टोल चुकाए अपने 12 से अधिक एलपीजी टैंकरों को होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते से सुरक्षित बाहर निकाल लिया. दरअसल, ओमान सरकार ने अमेरिकी-ईरानी बातचीत के बाद इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से जहाजों की टोल-फ्री आवाजाही का आश्वासन दिया था, जिसका भारत ने पुरजोर स्वागत किया क्योंकि नई दिल्ली इस मार्ग के लिए किसी भी तरह के टैक्स भुगतान के पक्ष में नहीं थी. इसके अलावा, जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए सरकार ने डिजिटल ऑथेंटिकेशन और सिलेंडरों की खरीद पर सीमा तय करने जैसे कड़े कदम भी उठाए.
मिडिल ईस्ट पर निर्भरता कम करने के लिए नए देशों से आयात
संकट की गंभीरता को देखते हुए भारत ने केवल खाड़ी देशों के भरोसे रहने के बजाय तुरंत अपने सप्लाई रूट में विविधता लाते हुए दुनिया के अन्य कोनों से एलपीजी मंगाना शुरू कर दिया. भारत ने अल्जीरिया, जापान और कनाडा जैसे देशों के साथ नए सप्लाई लिंक खोले और अमेरिका से अतिरिक्त एलपीजी कार्गो सुरक्षित किए. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जून महीने में अमेरिका से भारत का एलपीजी आयात रिकॉर्ड 10 लाख मीट्रिक टन को पार कर गया. इसके पहले अप्रैल में भारत का कुल एलपीजी आयात घटकर करीब 7 लाख टन रह गया था, जो मई में सुधरकर 11.5 लाख टन पर पहुंचा. पिछले कुछ वर्षों में भारत ने अपनी तेल आपूर्ति के बास्केट को 27 देशों से बढ़ाकर 41 देशों तक फैलाया है, जिसका फायदा इस संकट में साफ दिख रहा है.
स्थिति अब पहले से बहुत बेहतर
अब होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई की स्थिति काफी सुधर चुकी है और सरकार ने उन कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेक्टर्स की आपूर्ति को 50 प्रतिशत तक बहाल कर दिया है, जिनकी सप्लाई पर रोक लगा दी गई थी. सबसे बड़ी राहत तब मिली जब ओमान ने अमेरिकी-ईरानी बातचीत के बाद होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को टोल-फ्री आवाजाही का आश्वासन दिया, जिसका भारत ने पुरजोर स्वागत किया क्योंकि नई दिल्ली इस अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग के लिए किसी भी तरह के टैक्स भुगतान के पक्ष में नहीं थी. हरदीप पुरी ने ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ में लिखे अपने लेख और सोशल मीडिया पर कहा कि भारत ने बिना किसी किल्लत के इस संकट का सामना किया है और आज देश के सारे पंप खुले हैं व स्टॉक पूरी तरह फुल हैं.

