नई दिल्ली: भारत का सपना है कि वह अमेरिका, रूस और चीन की तरह अपना खुद का पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ फाइटर बनाए. इस दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट के लिए DRDO की आर्म एरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (ADA) ने एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EoI) निकाला था. 30 सितंबर को इसकी डेडलाइन पूरी हुई और अब हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL), लार्सन एंड टुब्रो (L&T)-भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और BEML समेत कई बड़ी कंपनियों ने अपने-अपने बिड दाखिल किए हैं. यह लड़ाई सिर्फ 15 हजार करोड़ के डिजाइन-डेवलपमेंट प्रोजेक्ट के लिए नहीं, बल्कि भारत के सबसे महत्वाकांक्षी डिफेंस ड्रीम की है.
- HAL: भारत की सबसे बड़ी एयरोस्पेस कंपनी और पहले से लड़ाकू विमानों की सप्लायर.
- L&T + BEL: मिलकर पार्टनरशिप में बिड कर रहे हैं.
- BEML: प्राइवेट कंपनियों के साथ गठजोड़ करके उतरी है.
अब इनकी बिड्स का मूल्यांकन ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व प्रमुख ए. सिवथानु पिल्लई की अगुवाई वाली कमेटी करेगी और अपनी रिपोर्ट रक्षा मंत्रालय को सौंपेगी.
AMCA प्रोजेक्ट पर रक्षा मंत्रालय की सख्त निगरानी
AMCA प्रोजेक्ट को पिछले साल कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी से मंजूरी मिली थी. तब से रक्षा मंत्रालय इस पर करीबी नजर रखे हुए है. रक्षा सचिव गिरीधर अरमाने खुद DRDO और ADA के साथ लगातार कोऑर्डिनेट कर रहे हैं ताकि टाइमलाइन न लटके और प्रोजेक्ट तय समय पर आगे बढ़े.
AI की मदद से बनाई गई सांकेतिक तस्वीर
AMCA प्रोजेक्ट की खास बातें
इस फेज में चुनी जाने वाली कंपनी न सिर्फ फाइटर जेट को को-डेवलप करेगी बल्कि भविष्य में इसके प्रोडक्शन की जिम्मेदारी भी ले सकती है.
टाइमलाइन: 2034-35 तक इंडियन एयरफोर्स को पहली AMCA स्क्वाड्रन मिलने की उम्मीद.
स्केल: कम से कम 125 एयरक्राफ्ट, यानी 7 स्क्वाड्रन.
वैल्यू: लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का प्रोडक्शन प्रोजेक्ट.
क्यों अहम है AMCA प्रोजेक्ट
AMCA भारत को उस लीग में खड़ा करेगा, जहां फिलहाल सिर्फ अमेरिका (F-35), रूस (Su-57) और चीन (J-20) जैसे देश हैं.
नए फाइटर जेट में क्या खास होगा?
- स्टील्थ टेक्नोलॉजी
- एडवांस्ड एवियोनिक्स
- सुपरक्रूज़ क्षमता (बिना आफ्टरबर्नर लंबे समय तक सुपरसोनिक उड़ान)
- मल्टी-रोल वेपन कैरिज
यह आने वाले युद्ध की जरूरतों के हिसाब से IAF को नई धार देगा.
इंडस्ट्री के लिए सुनहरा मौका
AMCA सिर्फ एक फाइटर प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि भारतीय डिफेंस इंडस्ट्री का टर्निंग प्वाइंट है. इससे प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर को लंबे समय तक बड़े ऑर्डर्स मिलेंगे, हाई-टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप्स बनेंगी और भारत की एयरोस्पेस इंडस्ट्री मजबूत होगी.

