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3 Bollywood films with same Title : बॉलीवुड हो य हॉलीवुड, हर फिल्म का टाइटल, गीत-संगीत, कहानी-स्क्रीनप्ले सबकुछ अलग होते हैं. फिर भी एक ही नाम से फिल्में बनकर रिलीज हो जाती हैं. बॉलीवुड में सेम टाइटल से कई फिल्में बन चुकी हैं. कई फिल्मों में एक जैसी धुन के गाने भी सुनने को मिल जाते हैं. बॉलीवुड में 26 साल के अंतराल में एक ही नाम से तीन फिल्में रिलीज हो चुकी हैं. दो में फिल्मों का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर रहा. दो फिल्मों में ‘विलेन’ की खूब चर्चा हुई. तीनों फिल्मों की कहानी जरूर अलग थी. एक मूवी सुपरहिट, दूसरी हिट और तीसरी फ्लॉप रही.
बॉलीवुड में सेम टाइटल से फिल्में बनाने का चलन बहुत पुराना है. 26 साल के अंतराल में तीन ऐसी फिल्में भी रिलीज हुई जिनका टाइटल सेम था. एक मूवी 70 के दशक में तो दो फिल्में 90 के दशक में सिनेमाघरों में आई थीं. एक में राजेश खन्ना-मुमताज की जोड़ी थी तो दूसरी में काजोल-संजय दत्त और आशुतोष राणा की तिकड़ी नजर आई थी. एक फिल्म में मिथुन चक्रवर्ती-मंदाकिनी की जोड़ी थी. बात हो रही है ‘दुश्मन’ फिल्म की. इस नाम से तीन बार फिल्में बनाई जा चुकी हैं. दो फिल्मों की खूब सराहना हुई. एक फिल्म सुपरहिट रही तो दूसरी हिट रही. एक मूवी 1972 में तो दूसरी 1990 में और तीसरी 1998 में रिलीज हुई थी. आइये जानते हैं तीनों फिल्मों से जुड़े दिलचस्प तथ्य……

सबसे पहले बात करते हैं 7 जनवरी 1972 को रिलीज हुई फिल्म ‘दुश्मन’ की जिसे दुलाल गुहा ने डायरेक्ट किया था. फिल्म में राजेश खन्ना, मीना कुमारी और मुमताज लीड रोल में थीं. फिल्म को प्रेम जी ने प्रोड्यूस किया था. फिल्म की कहानी विरेंद्र शर्मा के उपन्यास पर बेस्ड थी. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म की कहानी एक ट्रक ड्राइवर (राजेश खन्ना) की थी जिससे अनजाने में एक किसान का कत्ल हो जाता है. उसे सजा के तौर पर उस किसान के परिवार के साथ रहना पड़ता है. शुरुआत में उसे नफरत मिलती है. वो खुद भी गांव में नहीं रहना चाहता था. बाद में उसे किसान के परिवार से हमदर्दी हो जाती है लेकिन किसान की विधवा पत्नी से माफी के लिए तड़पता रहता है.

फिल्म के गानों का जादू आज तक बरकरार है. सुपरहिट गानों में ‘वादा तेरा वादा’, ‘मैंने देखा, तूने देखा, इसने देखा, उसने देखा’, ‘पैसा देखो, तमाशा देखो’ जैसे सॉन्ग शामिल थे. राजेश खन्ना ने फिल्म में अपने माथे पर रूमाल बांधा था. आगे चलकर यह स्टाइल बन गया. फिल्म दुश्मन का टाइटल ‘जंजीर’ था लेकिन प्रोड्यूसर इस नाम से खुश नहीं थे. फाइनली फिल्म का नाम ‘दुश्मन’ रखा गया. ‘जंजीर’ नाम से प्रकाश मेहरा ने 1973 में फिल्म बनाई. इस मूवी ने अमिताभ बच्चन को रातोंरात स्टार बना दिया. राजेश खन्ना का सूरज डूबता ही चला गया.
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‘दुश्मन’ फिल्म की शूटिंग के दौरान मीना कुमारी की तबीयत बेहद खराब थी. प्रोड्यूसर प्रेम जी ने उनके अस्पताल का बिल चुकाया था. फिल्म के लिए पहली पसंद धर्मेंद्र थे. राजेश खन्ना ने यह फिल्म आराधना से पहले साइन की थी. दुश्मन फिल्म का कलेक्शन 2.9 करोड़ रहा था. फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी. यह 1972 की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

‘दुश्मन’ नाम से ही एक और फिल्म 1990 में बनाई गई. मिथुन चक्रवर्ती-मंदाकिनी स्टारर इस फिल्म का डायरेक्शन शक्ति सामंत ने किया था. वही शक्ति सामंत जिन्होंने राजेश खन्ना के साथ ‘आराधना’, ‘कटी पतंग’ जैसी फिल्में बनाईं. जिन्होंने राजेश खन्ना को सुपर स्टार बनाया. ‘दुश्मन’ फिल्म में म्यूजिक आरडी बर्मन का था. गीतकार स्वप्न चक्रवर्ती थे. फिल्म 12 मार्च 1990 को रिलीज हुई थी और फ्लॉप साबित हुई थी.

1998 में ‘दुश्मन’ नाम से ही एक और फिल्म बनाई गई जिसमें आशुतोष राणा ने ऐसा खतरनाक किरदार निभाया कि 90 के दशक के मूवी लवर्स आज तक नहीं भुला पाए. फिल्म का डायरेक्शन तनूजा चंद्रा ने किया था. तनूजा चंद्रा आरए बैनर के लिए ‘प्रेम रोग’ जैसी फिल्म लिखने वाली राइटर कामना चंद्रा की बेटी हैं. फिल्म का म्यूजिक उत्तम सिंह ने कंपोज किया था जिन्होंने ‘दिल तो पागल है’ में भी संगीत दिया था. गीतकार आनंद बख्शी थे.

‘दुश्मन’ फिल्म की स्टोरी सचिन भौमिक ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले महेश भट्ट ने लिखा था. महेश भट्ट-पूजा भट्ट ने यह फिल्म प्रोड्यूस की थी. काजोल-संजय दता और आशुतोष राणा ने शानदार एक्टिंग की थी. यह आशुतोष राणा की डेब्यू फिल्म थी. यह एक साइकोलॉजिकल थ्रिलर फिल्म थी. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. ‘आवाज दो हमको, हम खो गए’, ‘चिट्ठी ना कोई संदेश, जाने वो कौन सा देश’ और ‘प्यार को हो जाने दो’ जैसे गाने आनंद बख्शी की कलम से निकले थे.

‘दुश्मन’ फिल्म ने 44वें फिल्म फेयर अवॉर्ड में बेस्ट विलेन कैटेगरी में अवॉर्ड जीता था. बेस्ट विलेन का अवॉर्ड आशुतोष राणा को मिला था. यह फिल्म काजोल-आशुतोष राणा की जानदार एक्टिंग के लिए याद की जाती है. इस फिल्म से जस अरोड़ा ने भी डेब्यू किया था. यह इकलौती फिल्म है जिसमें संजय दत्त ने काजोल के साथ काम किया. फिल्म में आशुतोष राणा ने जिस तरह का विलेन का किरदार निभाया था, वो रोंगटे खड़े कर देना वाला था. ऐसा विलेन पहले कभी हिंदी फिल्मों में नजर नहीं आया था. लोगों के दिल-दिमाग में गजब का खौफ पैदा कर दिया था. 4 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 10 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक सेमी हिट फिल्म साबित हुई थी.

