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DF-41 दुनिया की सबसे लंबी दूरी की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल में से एक है. इसकी क्षमता 12000 से 15000 किमी तक की है. वहीं, ब्रह्मोस की क्षमता केवल 400 किलोमीटर तक ही है. हालांकि अपनी श्रेणी में ब्रह्मोस क…और पढ़ें
चीन की ताकत का यह बड़ा हिस्सा है. (File Photo)अमेरिका-यूरोप-एशिया सब रेंज रेंज में
DF-41 मिसाइल का वजन लगभग 80,000 किलोग्राम है और लंबाई 22 मीटर है. इसे साइलो, सड़क और रेल मार्ग से लॉन्च किया जा सकता है. DF-41 का विकास 1986 में शुरू हुआ और इसे 2017 में सेवा में शामिल किया गया. यह पहली बार 2019 में सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित हुई थी. सितंबर 2024 में इसका परीक्षण दक्षिणी महासागर में किया गया, जिसमें इसकी लंबी दूरी की क्षमता को साबित किया गया. रणनीतिक दृष्टि से DF-41 चीन को अमेरिका, यूरोप, एशिया और अफ्रीका के अधिकांश हिस्सों तक पहुंचने की क्षमता देता है.
| विशेषता | विवरण |
|---|---|
| मारक क्षमता | 12,000 – 15,000 किलोमीटर |
| गति | Mach 25 (~31,425 किमी/घंटा) |
| वजन | लगभग 80,000 किलोग्राम |
| लंबाई | लगभग 22 मीटर |
| व्यास | लगभग 2.25 मीटर |
| वॉरहेड क्षमता | 8 x 250 किलोटन या 10 x 150 किलोटन MIRVs |
| मार्गदर्शन प्रणाली | इनर्शियल, स्टारलैट अपडेट्स, BeiDou उपग्रह प्रणाली |
| लॉन्च प्लेटफॉर्म | साइलो, सड़क-मोबाइल TEL, रेल-मोबाइल |
परमाणु क्षमता से लेस
इस मिसाइल की उच्च तकनीकी विशेषताएं इसे अमेरिका की मिनिटमैन और रूस की सरमत मिसाइलों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी बनाती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि DF-41 न केवल चीन की रक्षा क्षमता को बढ़ाता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा और परमाणु संतुलन पर भी असर डालता है. चीन ने इस मिसाइल की 50 से 100 यूनिट तैयार करने की योजना बनाई है. इस मिसाइल के विकास और क्षमता के चलते चीन वैश्विक रणनीतिक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है और इसे विश्व के परमाणु शक्तियों के बीच एक महत्वपूर्ण हथियार माना जा रहा है. कुल मिलाकर DF-41 चीन की परमाणु निवारक रणनीति का प्रमुख हिस्सा है, जो लंबी दूरी, तेज गति और स्वतंत्र लक्षित वारहेड क्षमता के साथ वैश्विक स्तर पर शक्ति प्रदर्शन करने में सक्षम है.

