केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने गुरुवार को साफ कहा कि देश के बाहर बैठे भगोड़ों के खिलाफ अब कोई ढिलाई नहीं होगी. उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि हर अपराधी, चाहे वह आर्थिक अपराधी हो, साइबर अपराधी या आतंकवादी, उसे समयबद्ध तरीके से भारतीय कानून के सामने लाया जाए. यह बात उन्होंने CBI की ओर से आयोजित भगोड़ों के प्रत्यर्पण-चैलेंज और स्ट्रेटजी कॉन्फ्रेंस में कही. उन्होंने राज्यों से कहा, ऐसी जेलें बनाएं, जो इंटरनेशनल लेवल की हों. यही बहाना बनाकर ललित मोदी और नीरव मोदी भारत की जेलों में आने से बच रहे हैं, वे बार बार दलील दे देते हैं कि भारत की जेलों की हालत खराब है. उनका प्रत्यर्पण नहीं किया जा सकता. और कोर्ट भी उनकी बातें मान लेती है. लेकिन अगर शाह का फार्मूला चल गया तो इनका बचना मुश्किल होगा.
12 अरब डॉलर की संपत्ति जब्त
अमित शाह ने यह भी याद दिलाया कि हाल के कानून सुधारों ने भगोड़ों के खिलाफ कार्रवाई को और सख्त बनाया है. उन्होंने भगोड़ा कानून 2018 का जिक्र किया, जिसके जरिए सरकार ने आर्थिक अपराधियों की संपत्तियों पर कब्जा कर लगभग 2 अरब डॉलर की रिकवरी की. इसके अलावा, प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के मजबूत होने से 2014 से 2023 तक लगभग 12 अरब डॉलर की संपत्तियों को जब्त किया जा सका.
तुरंत पासपोर्ट रद्द करो
गृहमंत्री ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ाने पर जोर दिया.उन्होंने कहा कि CBI और राज्य पुलिस को नए कानून के तहत ट्रायल की सुविधा का पूरा लाभ उठाना चाहिए. उन्होंने कहा कि जैसे ही किसी के खिलाफ इंटरपोल का रेड कॉर्नर नोटिस जारी हो, उसके पासपोर्ट को तुरंत रद्द या रेड-फ्लैग करना चाहिए ताकि वह विदेश में आसानी से घूम न सके. उनका यह मानना है कि आधुनिक तकनीक और ग्लोबल समझ के साथ न्याय प्रणाली को सशक्त बनाना ही अब चुनौती है, ताकि कोई भी अपराधी कानून की पहुंच से बाहर न रह सके.
भारत भगोड़ों को बख्शने वाला नहीं
कुल मिलाकर अमित शाह का संदेश साफ था कि भारत अब किसी भगोड़े को बख्शने वाला नहीं है. चाहे आर्थिक अपराधी हों, साइबर अपराधी हों या आतंकवादी, हर किसी के लिए कानून एक जैसा होगा. राज्यों को आधुनिक और अंतरराष्ट्रीय मानक वाले जेल बनाने की हिदायत, विदेशों में भगोड़ों के बहाने खत्म करने की रणनीति और कानून को समयबद्ध तरीके से लागू करने की दिशा में यह कदम बड़े बदलाव की तरफ इशारा करता है.
अपराधियों के लिए चेतावनी
अमित शाह की यह रणनीति न सिर्फ अपराधियों के लिए चेतावनी है, बल्कि यह भारत की अंतरराष्ट्रीय छवि को भी मजबूती देगी. अब विदेशों में बैठे लोग यह दावा नहीं कर पाएंगे कि भारतीय जेलें खराब हैं और इसलिए उन्हें प्रत्यर्पित नहीं किया जा सकता. यह कदम यह भी दिखाता है कि भारत न्याय के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई को बर्दाश्त नहीं करेगा और भगोड़ों के खिलाफ सख्त कार्रवाई में पीछे नहीं हटेगा.

