किसान शुभम शर्मा जैविक खेती कर रहे हैं।
यदि किसी जीव के तेल या उसे धोने मात्र से ऐसा तरल पदार्थ निकले जो फसलों व सब्जियों के लिए रामबाण हो, तो इसका उपयोग हर किसान करना चाहेगा।
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मंदसौर जिले के सिंदपन निवासी शुभम शर्मा अपने खेत पर ऐसा ही वर्मी वॉश बना रहे हैं। यह केंचुए के शरीर से निकाला जाता है। उन्होंने पूरी खेती को रासायनिक से हटाकर जैविक पद्धति पर शिफ्ट किया है। साथ ही सफल प्रयोग के बाद अब दूसरे किसानों को मशरूम की खेती करना सिखा रहे हैं।
केंचुए से निकला तरल पदार्थ कहलाता है पीला वॉश किसान शुभम ने बताया वर्मी कंपोस्ट और वर्मी वॉश भी बनाता हूं। वर्मी वॉश केंचुए के शरीर से निकलने वाला तरल पदार्थ होता है, जिसे पीला वॉश कहा जाता है।
यह केंचुओं के शरीर से रिसाव व धोवन का मिश्रित रूप है, जिसे फसलों व सब्जियों पर छिड़कें तो पौधों में फूलों की संख्या बढ़ती और फसल को मजबूती मिलती है।
केंचुओं के वर्मी वॉश से मुख्य पोषक तत्व व अन्य सहायक तत्व प्राकृतिक रूप से प्राप्त होते हैं। इसकी सहायता से भूमि भुरभुरी व फसल स्वस्थ होती है।
वर्मी वॉश के उपयोग से उपज की गुणवत्ता अच्छी होती है। यह शहद के रंग जैसा तरल जैव खाद है, जिसे प्राकृतिक जैव कीटनाशक के रूप में भी काम में ले सकते हैं।
इसका उत्पादन केंचुआ खाद बनाते समय या अलग से भी किया जाता है। क्योंकि केंचुए का शरीर तरल पदार्थों से भरा होता है एवं इनके शरीर से लगातार इनका उत्सर्जन होता रहता है।
इसमें फसलों के लिए जरूरी पोषक तत्व होते हैं, जो घुलनशील रूप में पौधों को मिलते हैं।

इस तरह कमरे में बैग के जरिए तैयार होता है मशरूम।
खेत में सब्जी, फसलें, घर पर मशरूम की खेती शुभम ने बताया, खेत में सब्जी व फसलें बोता हूं और घर में मशरूम की खेती भी कर रहा हूं। एक मशरूम बैग से करीब 300 रुपए की आमदनी होती है। अभी मेरे पास 150 बैग हैं।
मशरूम ठंडे तापमान की फसल है इसलिए सर्दी के मौसम में यह खेती अधिक लाभदायक रहती है। मशरूम की खेती पूरी तरह बंद कमरे में की जाती है।
इसकी अवधि 60 दिन की होती है, जिसमें 20 से 25 दिन में बैग तैयार और अगले 25 दिन तक हार्वेस्टिंग की जा सकती है।

