Friday, May 29, 2026
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Live: अभी खाते में नहीं आएगी लाडकी बहिन योजना की किश्‍त, चुनाव आयोग ने लगाई रोक


Maharashtra BMC Election Live: बीएमसी चुनाव की रणभेरी बजते ही राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है. चुनावी बिगुल बजते ही ‘लाड़की बहिन योजना’ की किस्तों पर आचार संहिता का ‘ब्रेक’ लग गया है. चुनाव आयोग ने साफ किया कि वोटिंग से पहले खातों में पैसा भेजना नियमों के खिलाफ है. बहिनों को अब अगली आर्थिक मदद के लिए चुनावी नतीजों और नई सरकार का इंतजार करना होगा. फिलहाल, सरकारी खजाने की चाबी आयोग के पास है. उधर, महायुति सरकार ने अपना घोषणापत्र जारी कर इसे ‘वचन नामा’ करार दिया है. शिवसेना नेता शायना एनसी ने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि यह ‘झूठा नामा’ नहीं बल्कि जनता से किया गया सच्चा वादा है. उन्होंने साफ किया कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की जोड़ी जो कहती है, उसे शत-प्रतिशत पूरा करती है. इस बार घोषणापत्र में प्रदूषण मुक्त मुंबई और आधुनिक बुनियादी ढांचे पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया है. उधर, महाराष्ट्र सरकार की ओर से नगर निकाय चुनाव से ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री-माझी लाडकी बहिन योजना की दो किश्तों की राशि लाभार्थियों के खातों में जमा करने के फैसले ने राज्य की राजनीति में तूफान खड़ा कर दिया है. इस फैसले को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा की अगुआई वाली महायुति और विपक्षी कांग्रेस आमने-सामने आ गए हैं. राज्य सरकार ने योजना के तहत दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 की किश्तों को एक साथ 14 जनवरी को जारी करने का निर्णय लिया है. इसके तहत महिला लाभार्थियों को कुल 3000 रुपये मिलेंगे.

महाराष्‍ट्र नगर निकाय-BMC चुनाव से जुड़े पल-पल के अपडेट

BMC चुनाव LIVE: चुनाव आयोग के सख्त आदेश के बाद ‘लाडकी बहिन योजना’ की अगली किस्त के भुगतान पर फिलहाल ब्रेक लग गया है. दरअसल, चुनावी आचार संहिता (Model Code of Conduct) लागू होने के कारण आयोग ने किसी भी नई वित्तीय मदद या योजना के प्रचार-प्रसार पर रोक लगा दी है. आयोग का तर्क है कि चुनाव के दौरान ऐसी योजनाओं से मतदाताओं को प्रभावित किया जा सकता है. सरकार अब नई किस्त का भुगतान चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही कर पाएगी. पात्र महिलाओं को अब अपनी अगली राशि के लिए परिणामों और नई सरकार के गठन तक का इंतजार करना होगा.

BMC चुनाव LIVE: मायानगरी के सियासी दंगल में महायुति ने अपना ‘वचन नामा’ पेश कर हलचल मचा दी है. शिवसेना नेता शायना एनसी ने इसे ‘झूठा नामा’ बताने वालों को कड़ा जवाब दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस की सरकार जो वादा करती है, उसे 100% निभाती है. मुंबई को प्रदूषण से बचाने के लिए 17,000 करोड़ रुपये का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है. 5,000 इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा और 435 किमी का विशाल मेट्रो जाल मुंबई की रफ्तार को नई पहचान दे रहा है. शायना ने विपक्ष के ‘राजनीतिक अहंकार’ पर चोट करते हुए कहा कि विकास की राह में रोड़े अटकाने वालों को जनता पहचानती है. अब महिलाओं को एसटी बसों के किराए में 50% की सीधी छूट और 5 लाख रुपये तक का सुलभ ऋण मिल रहा है. चप्पे-चप्पे पर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी ने सुरक्षा के दावे को और पुख्ता कर दिया है. यह घोषणापत्र केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि विकसित मुंबई का संकल्प है.

BMC चुनाव LIVE: महाराष्ट्र में स्थानीय निकाय चुनावों को लेकर रविवार को उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे ने एक रैली की. इस रैली में उन्होंने बीजेपी के ‘फर्जी हिंदुत्व’ की आलोचना करते हुए कहा कि मुंबई पर मंडरा रहे खतरे के कारण वे राजनीतिक रूप से एकजुट हुए हैं. 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनाव से पहले मुंबई की इस आखिरी संयुक्त रैली में उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्होंने और राज ठाकरे ने मराठी मानुष, हिंदुओं और महाराष्ट्र के लिए अपने मतभेदों को भुला दिया है. उन्होंने और राज ठाकरे ने खुद को मुंबई को बचाने के लिए एकमात्र विकल्प के रूप में पेश किया. मराठी वोट बैंक को साधते हुए राज ठाकरे ने कहा कि दोनों भाई इसलिए साथ आए हैं क्योंकि मुंबई एक गंभीर खतरे का सामना कर रही है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने रैली को संबोधित करते हुए एक बार फिर भाषा का मुद्दा छेड़ा. उन्होंने कहा, ‘यूपी और बिहार के लोगों को समझना चाहिए कि हिंदी आपकी भाषा नहीं है. मुझे भाषा से नफरत नहीं है. लेकिन अगर आप इसे थोपने की कोशिश करेंगे, तो मैं आपको लात मारूंगा. वो चारों तरफ से महाराष्ट्र आ रहे हैं और आपका हिस्सा छीन रहे हैं. अगर जमीन और भाषा चली गई, तो आप खत्म हो जाएंगे.’

BMC चुनाव LIVE: AIMIM नेता और तेलंगाना के विधायक अकबरुद्दीन ओवैसी ने महाराष्ट्र की राजनीति पर तीखा हमला करते हुए कहा कि राज्य की राजनीतिक पार्टियों का अब किसी भी विचारधारा से कोई संबंध नहीं रह गया है और उनका एकमात्र लक्ष्य सत्ता हासिल करना है. उन्होंने आरोप लगाया कि दशकों से राष्ट्रीय नेताओं को समर्थन देने के बावजूद मुसलमानों और पिछड़े समुदायों की हालत में कोई खास सुधार नहीं हुआ और वे आज भी समाज के निचले पायदान पर हैं. मराठवाड़ा क्षेत्र के छत्रपति संभाजीनगर में 15 जनवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों से पहले आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए ओवैसी ने सत्तारूढ़ और विपक्षी दोनों दलों की आलोचना की. उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र में हुए राजनीतिक पुनर्गठन ने यह साफ कर दिया है कि यहां विचारधारा नाम की कोई चीज नहीं बची है. ओवैसी ने कहा, ‘पहले उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस और शरद पवार के साथ हाथ मिलाया. बाद में अजित पवार ने भाजपा से गठबंधन किया और शिवसेना टूटी, जहां एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट भाजपा के साथ चला गया. न तो सेक्युलरिज़्म बचा है और न ही हिंदुत्व. इन पार्टियों को सिर्फ सत्ता चाहिए.’ ओवैसी ने कहा कि उनकी पार्टी मुसलमानों के अधिकारों की आवाज उठाने के साथ-साथ दलितों और पिछड़े वर्गों के मुद्दों को भी मजबूती से सामने रखती है.

कांग्रेस क्‍यों नाराज?

कांग्रेस का तर्क है कि चुनाव से महज 24 घंटे पहले दो महीने की किश्तें एक साथ जारी करना संयोग नहीं बल्कि सोची-समझी रणनीति है, ताकि मतदाताओं पर असर डाला जा सके. पार्टी नेताओं का कहना है कि अगर सरकार वाकई नियमों का सम्मान करती है तो भुगतान को कुछ दिन टालने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए. वहीं, राज्य के राजस्व मंत्री और नागपुर जिले के पालक मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने इसे राजनीतिक अवसरवाद बताते हुए कहा कि लाडकी बहिन योजना चुनाव की घोषणा से पहले शुरू की गई थी और इसका नगर निकाय चुनावों से कोई लेना-देना नहीं है. बावनकुले ने कहा, ’29 नगर निकायों के चुनाव के कारण पूरे राज्य की महिलाओं को उनके हक से वंचित नहीं किया जा सकता. यह एक सतत कल्याणकारी योजना है. उन्होंने चेतावनी दी कि भुगतान रोकने की मांग करना महिलाओं के साथ भेदभाव के समान होगा और कांग्रेस पर पाखंड व बाधा डालने का आरोप लगाया.

संजय राउत क्‍या बोले?

इसी बीच, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद संजय राउत के एक बयान ने भी सियासी विवाद को हवा दे दी. राउत ने दावा किया कि उनकी पार्टी आज भी 10 मिनट में मुंबई बंद करा सकती है. इस पर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पलटवार करते हुए कहा कि राउत अपने घर के आसपास का इलाका भी बंद नहीं करा सकते. फडणवीस ने इसे खोखली धमकी बताते हुए कहा कि भाजपा ऐसी बातों से डरने वाली नहीं है. इस पूरे घटनाक्रम ने नगर निकाय चुनाव से पहले महाराष्ट्र का राजनीतिक तापमान और बढ़ा दिया है, अब सबकी नजर राज्य चुनाव आयोग के फैसले पर टिकी है.



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