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Strait Of Hormuz: ईरान और इजराइल के बीच सीजफायर के बावजूद स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर तनाव बना हुआ है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर टोल वसूली की खबरों के बीच भारत ने साफ किया है कि उसके जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा. साथ ही, भारत फ्री व सुरक्षित आवाजाही का समर्थन करता है. ट्रंप ने भी ईरान को चेतावनी दी है, जबकि भारत ने स्थिति पर नजर बनाए रखते हुए भविष्य में हालात के अनुसार फैसला लेने की बात कही है.
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों को दो हफ्तों तक सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए ईरान की सेना के साथ तालमेल रखना होगा और कुछ तकनीकी सीमाओं का पालन करना पड़ेगा.
ईरान और इजराइल के बीच भले ही 2 हफ्ते के लिए सीजफायर हुआ हो, लेकिन अभी भी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर ईरान ट्रांजिट फीस लगा रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी भी दे डाली है कि वह स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की कोशिश न करे. उन्होंने ईरान पर आरोप लगाया कि वह सीजफायर समझौते के बावजूद ऊर्जा सप्लाई को सही तरह से चलाने में ठीक से काम नहीं कर रहा है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, इन सबके बीच भारत ने साफ कर दिया है कि भारतीय जहाजों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा है.
भारत का कहना है कि वह इस अहम समुद्री रास्ते में फ्री और सुरक्षित आवाजाही का समर्थन करता है. यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. ये रास्ता तेल, गैस समेत कई जरूरी सामानों की सप्लाई के लिए अहम है.
जहाजों की आवाजाही सुरक्षित तरह से होना जरूरी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि ईरान की खबरों पर भारत नजर बनाए हुए है, लेकिन उसकी स्थिति पहले जैसी ही है. भारत लगातार इस बात पर जोर दे रहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजों की आवाजाही बिना किसी रुकावट और सुरक्षित तरीके से होती रहनी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में अगर ऐसी कोई स्थिति बनती है, तो भारत उस समय हालात के अनुसार फैसला करेगा.
Suez Canal और Panama Canal जैसे जलमार्गों के विपरीत, समुद्री स्ट्रेट प्राकृतिक रास्ते होते हैं, जिनसे गुजरने पर आमतौर पर कोई शुल्क नहीं लिया जाता. हालांकि, Bosphorus Strait और Dardanelles Strait जैसे कुछ एक्सेप्शन हैं, जहां तुर्की एक विशेष अंतरराष्ट्रीय समझौते के तहत टोल वसूलता है. इसी तरह, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज भी एक अंतरराष्ट्रीय रूट है, जहां सिर्फ गुजरने के लिए कोई टोल नहीं लिया जाता.
फ्री पासेज का नियम
संयुक्त राष्ट्र के समुद्री कानून यूनाइटेड नेशन कन्वेंशन ऑन द लॉ ऑफ सी (United Nations Convention on the Law of the Sea) के अनुसार, ऐसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में फ्री पासेज का नियम लागू होता है. हालांकि, ईरान और यूएस ने इस समझौते को औपचारिक रूप से मंजूरी नहीं दी है, फिर भी दोनों देश आमतौर पर इसका पालन करते हैं. सूत्रों के मुताबिक, अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति बदलनी होती है, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून का मामला होगा और इसके लिए संयुक्त राष्ट्र के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी पड़ेगी.
ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से जहाजों को दो हफ्तों तक सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी जा सकती है, लेकिन इसके लिए ईरान की सेना के साथ तालमेल रखना होगा और कुछ तकनीकी सीमाओं का पालन करना पड़ेगा. युद्ध के बीच ही ईरान ने कुछ देशों के जहाजों को दोस्त करार दिया था और जहाज निकालने की अनुमति दी थी. इनमें भारत, पाकिस्तान समेत कुछ अन्य देश शामिल थे. हालांकि, हालात अभी भी तनाव से भरे हुए हैं और इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही काफी सीमित है, जिससे वैश्विक सप्लाई पर असर पड़ रहा है.
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यशस्वी यादव एक अनुभवी बिजनेस राइटर हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में दो साल का अनुभव है। ये नेटवर्क18 के साथ मनी सेक्शन में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यशस्वी का फोकस बिजनेस और फाइनेंस से जुड़ी खबरों को रिस…और पढ़ें

